Mainpuri By-Elections 2022: मुलायम की कर्मभूमि पर 'साइकिल' की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकता है 'हाथी'
मैनपुरी में 2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा गठबंधन ने एक साथ लड़ा था। इसके बाद गठबंधन टूट गया। अब उपचुनाव में मायावती ने बसपा से प्रत्याशी न उतारने के संकेत दिए हैं।
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मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि मैनपुरी में होने वाले उपचुनाव में सपा और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला है। लेकिन सोमवार को लखनऊ में जिलाध्यक्षों के साथ हुई बसपा सुप्रीमो की बैठक में मैनपुरी सीट से प्रत्याशी न उतारने के संकेत से चुनावी गणित गड़बड़ा गया है। ऐसे में बेसवार हाथी साइकिल की रफ्तार पर ब्रेक लगाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा के सामने विरासत बचाने की चुनौती है। वहीं भाजपा सपाई दुर्ग को ध्वस्त कर मैनपुरी पर भगवा लहराना चाहती है। चुनाव में मुख्य मुकाबला भले ही सपा भाजपा में है, लेकिन इसमें बसपा भी अहम भूमिका निभाएगी।
2019 में था सपा और बसपा का गठबंधन
दरअसल 2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा गठबंधन ने एक साथ लड़ा था। मुलायम सिंह यादव गठबंधन के ही प्रत्याशी थे। इसके बाद भी मुलायम की जीत का आंकड़ा बीते 2014 के चुनाव और उप चुनाव की अपेक्षा काफी कम रह गया था। वहीं इस बार तो हाथी भी साइकिल की रफ्तार को बढ़ाने की बजाए और धीरे कर सकता है।
सोमवार को सपा सुप्रीमो मायावती ने जिलाध्यक्षों के साथ बैठक में निकाय चुनाव पर ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मैनपुरी उप चुनाव में प्रत्याशी न उतारने के संकेत दिए हैं। ऐसे में हाथी का साथी वोटर भी इस बार चुनाव में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में सपा को इस बार चुनाव में अपनी साख बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी होगी।
भाजपा की ओर है बसपा के परंपरागत वोटर का झुकाव
उप चुनाव में बसपा प्रत्याशी के न उतारे जाने के संकेत से बसपा का परंपरागत वोटर अन्य किसी भी दल को मतदान के लिए स्वतंत्र है। लेकिन सियासी चाणक्य के अनुसार बसपा के परंपरागत वोटर का झुकाव बसपा प्रत्याशी न होने के चलते भाजपा की तरफ होने की अधिक संभावना है। इससे सपा को झटका लग सकता है।
कांग्रेस ने अब तक नहीं खोले पत्ते
जिले में कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के सामने बीते कई चुनावों से प्रत्याशी नहीं उतार रही है। आखिरी बार 2004 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा था। ऐसे में कांग्रेस इस बार उप चुनाव में प्रत्याशी उतारती है या नहीं ये बाद में ही पता चलेगा। अब तक पार्टी की ओर से प्रत्याशी को लेकर कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है।
बसपा सुप्रीमो के ट्वीट की भी है चर्चा
सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा किए गए ट्वटी की भी लोगों के बीच चर्चा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि सपा के सामने आजमगढ़ की तरह ही मैनपुरी में भी अपनी सीट बचाने की चुनौती है। देखना होगा कि क्या सपा ये सीट भाजपा को हराकर पुन: जीत पाएगी या फिर वह भाजपा को हराने में सक्षम नहीं है ये पुन: साबित होगा। ये ट्वीट सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है।