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महाशिवरात्रि: मथुरा के 'कोतवाल' हैं महादेव, कंस वध के बाद कृष्ण-बलराम का सुलझाया था विवाद

Mon, 28 Feb 2022 02:13 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 28 Feb 2022 02:13 PM IST
सार

मान्यता है कि रंगेश्वर महादेव मंदिर में 40 दिन दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होती है। यहां पर दूरदराज क्षेत्र से श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं। कंस वध के बाद कृष्ण और बलराम का विवाद भोले बाबा ने ही सुलझाया था। 

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mahashivratri 2022 history of rangeshwar mahadev temple in Mathura
रंगेश्वर महादेव मंदिर, मथुरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा को श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां के कोतवाल महादेव हैं। शहर के होली गेट स्थित रंगेश्वर महादेव को दक्षिण का कोतवाल कहा जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर रंगेश्वर महादेव में जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में 40 दिन तक दीपक जलाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

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मंदिर सेवायत विपिन ने बताया कि यूं तो कान्हा की नगरी कृष्ण लीलाओं के लिए जानी जाती है, लेकिन मथुरा में भगवान शिव का ये मंदिर द्वापरकालीन है। कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के बीच इस बात को लेकर विवाद शुरू हो गया था कि आखिर कंस को किसने मारा है? श्रीकृष्ण और बलराम का झगड़ा देख भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि तुम दोनों भाइयों ने ही कंस को मारा है। 

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कृष्ण-बलराम ने रखा था रंगेश्वर महादेव नाम 

शिवजी ने कृष्ण से कहा कि तुम छलिया हो, तुमने छल से कंस का वध किया है। बलराम से कहा कि तुम बलिया हो तुमने बल से कंस का वध किया है। यह कहकर भगवान शिव वहां से जाने लगे तभी श्रीकृष्ण और बलराम ने भोलेनाथ के सामने हाथ जोड़कर कहा कि प्रभु आपने जिस प्रकार हम दोनों भाइयों का न्याय किया है, इसी प्रकार आपको रंगेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाएगा। 

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श्रद्धालु राघव ने कहा कि रंगेश्वर महादेव भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। जब भी परेशानी आती है, महादेव की शरण में आ जाते हैं। महादेव परिवार के दुख हर लेते हैं। रंगेश्वर मंदिर में भक्ति की अविरल धारा बहती है। 

एडवोकेट ओमवीर सारस्वत ने कहा कि रंगेश्वर बाबा की शरण में जो भी भक्त जाकर अपना दु:ख प्रकट करता है, उसको बाबा भोलेनाथ निराश नहीं होने देते हैं। जो भक्त बाबा के प्रति भाव और समर्पण रखते हैं उस पर बाबा अपनी कृपा बरसाते हैं। 

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