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UP: गैस सिलिंडर की किल्लत से लगा महंगाई का तड़का, छात्रों का बिगड़ गया बजट; गृहणियां भी झेल रहीं परेशानी

Tue, 05 May 2026 11:16 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 05 May 2026 11:16 AM IST
सार

आगरा में एलपीजी संकट बरकरार है। गैस सिलिंडर की किल्लत ने महंगाई का तड़का लगा दिया है। चाय, समोसा से लेकर रेस्तरां में खाना तक महंगा हो गया है। महिलाओं और व्यापारियों से लेकर छात्र तक सभी का बजट बिगड़ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर में 40 और घरेलू सिलिंडर में 30 प्रतिशत की कटौती से आम आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है।

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LPG Shortage Sparks Price Rise in Agra Household Budgets Hit Hard
LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले में 13 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं। प्रतिदिन करीब 150 टन एलपीजी खपत है। प्रतिदिन करीब 40 हजार व्यावसायिक सिलिंडर की खपत है। 88 गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं। इंडियन ऑयल, एचपी और भारत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति करती हैं। कंपनियों की लापरवाही और प्रशासन के ढुलमुल रवैये से डिस्ट्रीब्यूटर्स से लेकर उपभोक्ता तक कटौती की मार झेल रहे हैं। करीब एक लाख से अधिक सिलिंडर का बैकलॉग है। व्यावसायिक सिलिंडर 935 रुपये और पांच किलो का छोटू सिलिंडर 230 रुपये महंगा हो गया है। इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद डिलीवरी नहीं मिल रही।
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पीजी से लेकर छात्रावास तक प्रभावित
छात्र गुरुप्रसाद ने कहा कि एलपीजी के व्यावसायिक और छोटू सिलिंडर महंगा होने से पीजी से लेकर छात्रावास तक प्रभावित हैं। छात्रों पर महंगाई की मार पड़ रही है। उनके लिए खाना बनाना महंगा हो गया है। किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों को पांच किलो सिलिंडर ब्लैक में 2000 रुपये तक खरीदना पड़ रहा है। 
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उठानी पड़ रही परेशानी
छात्र सचिन का कहना है कि पीजी में रहने वालों को ब्लैक में सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। सिलिंडर बहुत महंगा है। पढ़ाई करने वाले छात्रों का बजट गड़बड़ा रहा है। रसोई गैस की कमी के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।
 
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हॉकर करते हैं मनमानी
छात्र अतुल ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर ब्लैक में मिल रहे हैं, हॉकर मनमानी करते हैं। बाहर खाना खाना मजबूरी बन गया है। वहां भी दाम बढ़ गए हैं। गैस एजेंसियों में पांच किलो वाला गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। 
 

थाली पर बढ़े 40 रुपये
छात्र यश का कहना है कि 120 रुपये की थाली अब 160 रुपये तक पहुंच गई है। छोटा सिलिंडर भी करीब 2000 रुपये में मिल रहा है। इतने महंगे सिलिंडर लेने से अच्छा है कि चूल्हे पर लकड़ियां जलाकर खाना बना लें। 

करना पड़ रहा लंबा इंतजार
खंदारी निवासी शालू ने बताया कि सिलिंडर बुक कराने के बाद 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। पड़ोस से चूल्हा मांगना पड़ता है तो कभी आधा पका खाना छोड़ना पड़ता है।
 

महंगे दाम पर खरीदना मजबूरी
नेहरू नगर कृतिका गौर का कहना है कि गरीब परिवार छोटा सिलिंडर वहन नहीं कर पा रहे हैं। मिलता भी आसानी से नहीं। ब्लैक में महंगे दाम पर खरीदना उनकी मजबूरी है।

बड़े परिवारों में ज्यादा परेशानी
दयालबाग निवासी सुंदरी ने बताया कि बड़े परिवारों में सिलिंडर की किल्लत और ज्यादा परेशानी खड़ी कर रही है। उनके घर में 10 से 12 सदस्य हैं, लेकिन एक ही सिलेंडर है। एक सिलेंडर 15-20 दिन भी नहीं चल पाता।
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