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नोटबंदी के बाद जीएसटी से जूता उद्योग को लगा झटका, ये हैं मुश्किलें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 31 Jan 2018 05:05 PM IST
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आगरा में 14 महीने पहले की गई नोटबंदी और छह महीने पहले लागू हुए जीएसटी ने जूता कारोबार को जोर का झटका दिया। देश की 65 फीसदी फुटवियर की जरूरत पूरी करने वाले आगरा के जूता उद्योग में नोटबंदी के बाद दो महीने तक तो 50 फीसदी घरेलू इकाइयों में ताले लगे रहे तो निर्यात इकाइयों पर आर्डर पूरे करने के लिए कच्चे माल को खरीदने में मुश्किलें आईं।
40 फीसदी तक सिमटे घरेलू उत्पादन में अब इकाइयां पटरी पर लौट रही हैं। जूते की चाल अब संभलती दिख रही है। आगरा से हर साल साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। 190 निर्यातक दुनियाभर में जूते की धाक जमा रहे हैं।
वहीं आठ हजार से ज्यादा इकाइयों के जरिये देश के 65 फीसदी कारोबार पर आगरा काबिज है, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी ने इस कारोबार की कमर तोड़कर रख दी। गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले में हाथ से जूते बनाने वाली इकाइयों पर नोटबंदी का ज्यादा असर पड़ा।
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नोटबंदी से जैसे तैसे उबरे तो जीएसटी में 500 रुपये तक पांच फीसदी और इससे अधिक के जूतों पर 12 से 18 फीसदी तक टैक्स लगाया तो हींग की मंडी और घरेलू जूता कारोबारियों को मुश्किलें आ गई। वित्त राज्यमंत्री, वित्त मंत्री के वादा करने और अब तक कई जीएसटी काउंसिल बैठकों के बाद भी जूते से टैक्स कम नहीं किया गया।
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40 फीसदी तक सिमटे घरेलू उत्पादन में अब इकाइयां पटरी पर लौट रही हैं। जूते की चाल अब संभलती दिख रही है। आगरा से हर साल साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। 190 निर्यातक दुनियाभर में जूते की धाक जमा रहे हैं।
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वहीं आठ हजार से ज्यादा इकाइयों के जरिये देश के 65 फीसदी कारोबार पर आगरा काबिज है, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी ने इस कारोबार की कमर तोड़कर रख दी। गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले में हाथ से जूते बनाने वाली इकाइयों पर नोटबंदी का ज्यादा असर पड़ा।
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नोटबंदी से जैसे तैसे उबरे तो जीएसटी में 500 रुपये तक पांच फीसदी और इससे अधिक के जूतों पर 12 से 18 फीसदी तक टैक्स लगाया तो हींग की मंडी और घरेलू जूता कारोबारियों को मुश्किलें आ गई। वित्त राज्यमंत्री, वित्त मंत्री के वादा करने और अब तक कई जीएसटी काउंसिल बैठकों के बाद भी जूते से टैक्स कम नहीं किया गया।
जूता उद्योग को चाहिए ऑक्सीजन
कल पेश होने वाले आम बजट से आगरा के जूता कारोबारियों को बड़ी उम्मीदें हैं। दो साल से बजट में जूता उद्योग के लिए रियायतें मिल रही हैं, लेकिन इस बार जीएसटी से त्रस्त कारोबारियों को बड़े पैकेज और रियायतों की दरकार है।
एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर के मुताबिक जीएसटी की मुश्किलें दूर हों और बजट में निर्यात पर प्रोत्साहन के साथ मशीनरी और अपग्रेड के लिए नीति आनी चाहिए।
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन अध्यक्ष गागन दास रामानी के मुताबिक जीएसटी में जब तक टैक्स दरें कम नहीं होगी, कारोबार पटरी पर और सरकार का टैक्स रेवेन्यू बढ़ ही नहीं पाएगा।
एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर के मुताबिक जीएसटी की मुश्किलें दूर हों और बजट में निर्यात पर प्रोत्साहन के साथ मशीनरी और अपग्रेड के लिए नीति आनी चाहिए।
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन अध्यक्ष गागन दास रामानी के मुताबिक जीएसटी में जब तक टैक्स दरें कम नहीं होगी, कारोबार पटरी पर और सरकार का टैक्स रेवेन्यू बढ़ ही नहीं पाएगा।
ये भी जानें
5500 करोड़ रुपये का आगरा से जूता निर्यात
3.5 लाख लोगों का रोजगार जूता कारोबार से
65 फीसदी हिस्सा घरेलू जूता निर्माण आगरा में
8000 इकाइयां जूते की आगरा में मौजूद
350 साल पुराना है आगरा में जूता कारोबार
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