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कड़े इम्तिहान में फंसे राज बब्बर, भाजपा के राजकुमार चाहर से मिल रही कड़ी चुनौती

Wed, 17 Apr 2019 05:13 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर सीकरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर सीकरी Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 17 Apr 2019 05:13 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019 Raj Babbar is stranded in a tough test on Fateh Pur Seat
राज बब्बर (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जगह बनाने वाली फतेहपुर संसदीय सीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर का कड़ा इम्तिहान हो रहा है। वर्ष 2009 में इस सीट पर बसपा की सीमा उपाध्याय से 9936 वोटों से हारने वाले राज बब्बर को भाजपा के राजकुमार चाहर से कड़ी चुनौती मिल रही है। गठबंधन के बसपा उम्मीदवार श्रीभगवान उर्फ गुड्डू पंडित ने भी मुख्य मुकाबले में आने के लिए पूरी ताकत लगाई हुई है।

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फतेहपुर सीकरी 2008 के परिसीमन में लोकसभा सीट बनी। परिसीमन के बाद यह तीसरा चुनाव है। 2009 में बसपा ने यह सीट जीती। भाजपा तीसरे नंबर पर रही थी। लेकिन, 2014 में स्थिति बदल गई। भाजपा के चौधरी बाबूलाल ने बसपा की सीमा उपाध्याय को करीब पौने दो लाख मतों से शिकस्त दी। भाजपा ने इस बार नए चेहरे राजकुमार चाहर को उतारा है। भाजपा में आने से पहले चाहर क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे हैं। तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
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हालांकि, कभी जीते नहीं। बसपा के टिकट को लेकर यहां काफी उठापटक रही। सीमा उपाध्याय ने चुनाव लड़ने से इनकार किया तो आखिरी वक्त में डिबाई (बुलंदशहर) से बसपा व सपा के विधायक रहे श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित को चुनाव मैदान में उतारा गया। उनकी छवि पर सवाल उठ रहे हैं। टिकट वितरण से उपजे असंतोष के बाद पूर्व विधायकों समेत बसपा के कई प्रमुख नेता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जा चुके हैं। 
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फतेहपुर सीकरी
फतेहपुर सीकरी 1570 से 1585 तक मुगल बादशाह अकबर की राजधानी रही। पानी का संकट सबसे बड़ी समस्या। 
विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं यहां के स्थल। सूफी संत सलीम चिश्ती की दरगाह व मुगलकालीन स्मारकों के लिए मशहूर। 
फतेहपुर सीकरी सीट आगरा जिले में पड़ती है। 

जातीय समीकरण
राजपूत     3.20 लाख
ब्राह्मण     2.50 लाख
जाट     1.90 लाख
लोध-निषाद     1.85 लाख
कुशवाहा     1.25 लाख
मुस्लिम     70 हजार
वैश्य     70 हजार

स्टारडम राजनीतिक कौशल दांव पर
भाजपा के सामने जहां सीट बचाने की चुनौती है, वहीं राज बब्बर के स्टारडम व राजनीतिक कौशल की परीक्षा है। राज बब्बर राजनीति में नए नहीं हैं। दो बार आगरा और एक बार फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं। बसपा मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रही है, लेकिन वेस्ट यूपी की अन्य सीटों की तरह गठबंधन की उतनी धमक नहीं दिखती। जाट व मुस्लिम बहुल किरावली में कंस मेला व दंगल के चलते आसपास से तमाम लोग आए हुए हैं। यहां जनरल स्टोर चलाने वाले गबरू खां कहते हैं, मुकाबला तो चाहर व बब्बर में है। किसी के भी सिर सेहरा बंध सकता है। उन्हें लगता है कि बसपा से सीमा उपाध्याय चुनाव लड़तीं तो तस्वीर दूसरी होती। कागरौल में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. धर्मेन्द्र सोलंकी व राजबीर सोलंकी कहते हैं कि मोदी इफेक्ट के चलते भाजपा की बढ़त हैं। दूसरे नंबर पर राज बब्बर रहेंगे। यदि गठबंधन का प्रत्याशी लोकल होता, तो स्थिति दूसरी होती। 

5 विधानसभा सीट सभी भाजपा के पास
फतेहपुर संसदीय क्षेत्र में पांचों विधानसभा सीट आगरा देहात, फतेहपुर सीकरी, खैरागढ़, फतेहाबाद और बाह पर भाजपा का कब्जा है।

चाहर को स्थानीय होने का लाभ 
खैरागढ़ में एइला निवासी रामजीलाल सिकरवार बताते हैं कि भाजपा प्रत्याशी इसी क्षेत्र के कालियागढ़ी के निवासी हैं, नई उम्र के हैं। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। हालांकि बेरी चाहर निवासी एडवोकेट नितिन कुमार राज बब्बर की वकालत करते नजर आते हैं। मिष्ठान भंडार चलाने वाले तुलसी भी भाजपा व कांग्रेस में मुकाबला मानते हैं। ओमदत्त कहते हैं कि राज बब्बर राजनीतिक हैं, उनका ग्लैमर भी है, लेकिन वह 2009 में चुनाव हारने के बाद सक्रिय नहीं रहे। फतेहाबाद में गजेन्द्र शर्मा कहते हैं कि दूसरे-तीसरे नंबर पर जो भी रहे, मुकाबला भाजपा से है। 

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