अनुसूचित जाति की राजधानी कहे जाने वाले आगरा में एक बार फिर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। आगरा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट के साथ उत्तर विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखा। अब यहां पार्षद से लेकर सांसद तक सब भाजपा के हैं। भाजपा की इस बड़ी जीत के पीछे पांच कारण माने जा रहे हैं।
भाजपा की व्यूह रचना में फंसा गठबंधन
2 of 7
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने 50 फीसदी बाजी तो मौजूदा सांसद रामशंकर कठेरिया का टिकट काटकर ही जीत ली थी। एसपी सिंह बघेल के उम्मीदवार बनते ही भाजपाइयों को लगने लगा था कि कमल का फूल एक बार फिर कमाल करेगा। उनकी छवि ऐसे जुझारू नेता है जो अपने लोगों के लिए लड़ते हैं, उनके सुख-दुख में शरीक होते हैं। मोदी लहर ने जीत की राह और आसान कर दी।
मोदी के लिए लकी साबित हुआ यह मैदान
3 of 7
जीत के बाद अभिवादन स्वीकार करते एसपी सिंह बघेल
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा की जीत के पांच कारण रहे। एक तो कठेरिया के हटने से एंटी इंकमबेंसी फैक्टर खत्म हुआ। दूसरा, एसपी सिंह बघेल के आने से जातीय समीकरण मजबूत हुए। तीसरा, क्षेत्रीय समीकरण में भी भाजपा प्लस हो गई। बघेल पहले भी एटा और जलेसर क्षेत्र के सांसद रह चुके हैं।
4 of 7
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
चौथा, भाजपा ने व्यूह रचना ऐसी की कि गठबंधन इसमें फंसकर रह गया। अमित शाह ने आगरा आकर बसपा और सपा के नेताओं को अपनी तरफ कर लिया। पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री भाजपाई हो गए। इससे सकारात्मक संदेश गया। इस जीत के बाद आगरा भाजपा का बेहद मजबूत किला बन गया है।
5 of 7
जीत का जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम में आधे से ज्यादा पार्षद भाजपा के हैं। मेयर भी भाजपा का है। जिला पंचायत पर भी भगवा ध्वज लहरा रहा है। नौ विधायक हैं, नौ के भाजपा के। दो लोकसभा सीट हैं, दोनों पर भाजपा के प्रत्याशी जीते हैं। उत्तर विधानसभा में उपचुनाव हुआ। इसे भी भाजपा ने जीता है। अब तो भाजपाई यहां तक कह रहे हैं, आगरा में चाहें जिसे भी टिकट दे दो, चाहें किसी का भी टिकट काट दो, जो भी उम्मीदवार होगा, जीत ही जाएगा, क्योंकि वोट मोदी के नाम पर मिल रहा है।