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Lok Sabha Election Result: एटा सीट से छह बार जीत चुकी है भाजपा, सपा का भी रहा दबदबा
Thu, 23 May 2019 10:18 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 23 May 2019 10:18 AM IST
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भाजपा और सपा
महान सूफी संत अमीर खुसरो की जन्मभूमि एटा ना सिर्फ राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। एटा संसदीय सीट उत्तर प्रदेश के चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार है। पिछली बार की तरह इस बार भी इस सीट के चुनाव नतीजे पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
अब तक के लोकसभा चुनावों की बात करें तो सबसे ज्यादा छह बार यहां से भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह ने भाजपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की थी। इनसे पहले कल्याण सिंह एटा से सांसद बने थे।
वर्ष 1999 और 2004 के लोकसभा चुनावों में एटा लोकसभा सीट से लगातार दो बार समाजवादी पार्टी के देवेंद्र सिंह यादव ने जीत हासिल की। इस बार देवेंद्र यादव ने दोहरी ताकत से चुनाव लड़ा, क्योंकि गठबंधन होने से बसपा का भी समर्थन मिला। गठबंधन नेता उनकी जीत के दावे कर रहे हैं।
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अब तक के लोकसभा चुनावों की बात करें तो सबसे ज्यादा छह बार यहां से भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह ने भाजपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की थी। इनसे पहले कल्याण सिंह एटा से सांसद बने थे।
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वर्ष 1999 और 2004 के लोकसभा चुनावों में एटा लोकसभा सीट से लगातार दो बार समाजवादी पार्टी के देवेंद्र सिंह यादव ने जीत हासिल की। इस बार देवेंद्र यादव ने दोहरी ताकत से चुनाव लड़ा, क्योंकि गठबंधन होने से बसपा का भी समर्थन मिला। गठबंधन नेता उनकी जीत के दावे कर रहे हैं।
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कांग्रेस ने नहीं उतारा प्रत्याशी
वहीं इस सीट पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। कांग्रेस ने यह एटा सीट अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय जन अधिकार पार्टी (आरजेएपी) के लिए छोड़ी थी। आरजेएपी के टिकट पर सूरज सिंह ने चुनाव लड़ा। अब तक के चुनावों में एटा लोकसभा सीट पर कांग्रेस सिर्फ तीन बार ही जीत दर्ज पाई है।
जातीय समीकरण के अनुसार एटा का क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है। एटा लोकसभा क्षेत्र में लोध, यादव और शाक्य जातीय बहुल है। लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें कासगंज, अमांपुर, पटियाली, एटा और मारहरा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
अब सबकी निगाहें एटा लोकसभा चुनाव के नतीजे पर हैं। राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत को लेकर दावा ठोंक रहे हैं। एटा लोकसभा सीट जहां भाजपा के लिए साख का सवाल है तो समाजवादी पार्टी के लिए वापसी का मौका। इस बार यह सीट किसके खाते में जाएगी यह 23 मई को मतगणना के बाद भी पता चलेगा।
जातीय समीकरण के अनुसार एटा का क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है। एटा लोकसभा क्षेत्र में लोध, यादव और शाक्य जातीय बहुल है। लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें कासगंज, अमांपुर, पटियाली, एटा और मारहरा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
अब सबकी निगाहें एटा लोकसभा चुनाव के नतीजे पर हैं। राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत को लेकर दावा ठोंक रहे हैं। एटा लोकसभा सीट जहां भाजपा के लिए साख का सवाल है तो समाजवादी पार्टी के लिए वापसी का मौका। इस बार यह सीट किसके खाते में जाएगी यह 23 मई को मतगणना के बाद भी पता चलेगा।