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न्यायादेश की अवहेलना में फंसे बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता
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कासगंज। समय से न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करना विद्युत निगम के अधिषाशी अभियंताको महंगा साबित होने जा रहा है। स्थायी लोक अदालत की पूर्णपीठ ने न्यायादेश की अव्हेलना करने पर अधिशासी अभियंता को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही चेतावनी दी है कि क्यों न वेतन से पांच हजार रुपये की कटौती कर क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित पक्ष को दे दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब न मिला तो वेतन से कटौती की कार्रवाई कर दी जाएगी।
विद्युत विभाग के उपभोक्ता क्षत्री नरायन ने स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बिजली विभाग के खिलाफ वाद दायर कराया। अदालत को बताया कि मीटर तेजी से चल रहा है और अधिक बिल आ रहा है। जिस पर स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य वसंत शर्मा और डॉ. सपना अग्रवाल ने सुनवाई की। इस सुनवाई में 3 सितंबर को न्यायालय ने विभाग के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया कि पीड़ित पक्ष के ट्यूबवेल पर सात दिन में चेक मीटर लगवाकर एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। 10 सितंबर तक चेक मीटर लगाया जाना था, लेकिन बिजली विभाग लापरवाह बना रहा और 23 सितंबर को चेक मीटर लगाया। इस मामले में सोमवार को स्थायी लोक अदालत में सुनवाई थी।
इस पर न्यायालय ने पाया कि विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है। बिना किसी कारण बिलंब से चैक मीटर लगाया। जिससे उपभोक्ता को शारीरिक और मानसिक रूप से क्षति हुई है और न्यायालय का अनावश्यक रूप से समय बर्बाद किया गया है। इस पर न्यायालय ने अधिशासी अभियंता को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और न्यायादेश की अवहेलना के मामले में चेतावनी दी है कि क्यों न वेतन से पांच हजार रुपये की कटौती की जाए। 30 अक्तूबर तक न्यायालय ने जवाब मांगा है।
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अधिशासी अभियंता विद्युत ने न्यायालय के आदेश की अव्हेलना की। इस मामले में उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो न्यायालय पंाच हजार रुपये की कटौती उनके वेतन से कटौती कर उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाएगा। -बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत।
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विद्युत विभाग के उपभोक्ता क्षत्री नरायन ने स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बिजली विभाग के खिलाफ वाद दायर कराया। अदालत को बताया कि मीटर तेजी से चल रहा है और अधिक बिल आ रहा है। जिस पर स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य वसंत शर्मा और डॉ. सपना अग्रवाल ने सुनवाई की। इस सुनवाई में 3 सितंबर को न्यायालय ने विभाग के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया कि पीड़ित पक्ष के ट्यूबवेल पर सात दिन में चेक मीटर लगवाकर एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। 10 सितंबर तक चेक मीटर लगाया जाना था, लेकिन बिजली विभाग लापरवाह बना रहा और 23 सितंबर को चेक मीटर लगाया। इस मामले में सोमवार को स्थायी लोक अदालत में सुनवाई थी।
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इस पर न्यायालय ने पाया कि विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है। बिना किसी कारण बिलंब से चैक मीटर लगाया। जिससे उपभोक्ता को शारीरिक और मानसिक रूप से क्षति हुई है और न्यायालय का अनावश्यक रूप से समय बर्बाद किया गया है। इस पर न्यायालय ने अधिशासी अभियंता को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और न्यायादेश की अवहेलना के मामले में चेतावनी दी है कि क्यों न वेतन से पांच हजार रुपये की कटौती की जाए। 30 अक्तूबर तक न्यायालय ने जवाब मांगा है।
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अधिशासी अभियंता विद्युत ने न्यायालय के आदेश की अव्हेलना की। इस मामले में उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो न्यायालय पंाच हजार रुपये की कटौती उनके वेतन से कटौती कर उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाएगा। -बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत।