Lockdown: औरैया हादसे से नहीं लिया सबक, पुलिस ने ट्रकों से ही भेजे सैकड़ों मजदूर
औरैया हादसे के बाद शनिवार को तीन इंस्पेक्टर सस्पेंड किए गए थे।इसके बावजदू रविवार को पुलिस ने ट्रक रुकवाकर मजदूरों को भेजा
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औरैया हादसे से पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। रविवार को मजदूरों को आगरा से ट्रक से ही भेजा गया। एक-एक ट्रक में 80 से 100 तक मजदूर खड़े होकर गए। पैदल चल रहे मजदूरों को पुलिस ने ही ट्रकों में बैठाया। दरअसल, मजदूर बड़ी संख्या में थे। इतनी बसों का इंतजाम नहीं हो पाया।
औरैया हादसे के बाद ट्रकों से जा रहे मजदूरों को जहां का तहां रोक दिया गया था। पुलिस अफसरों ने सख्त निर्देश जारी किए थे कि मजदूर न पैदल जाएंगे और न ही ट्रकों से जाने दिया जाएगा।
शासन ने हादसे में पुलिस की यह लापरवाही मानी थी कि ट्रकों से जाते मजदूरों को रोका क्यों नहीं गया। इसके लिए आगरा में फतेहपुर सीकरी, मथुरा में कोसीकलां और गाजियाबाद में इंदिरापुरम थाना प्रभारी को निलंबित किया गया।
रात में ट्रकों से उतारा, सुबह को चढ़ाया
शासन ने आदेश जारी कर दिया कि मजदूरों को न पैदल जाने दिया जाएगा और न ही ट्रकों से। बसों का इंतजाम किया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आदेश की सख्ती शनिवार की रात तक ही चली। सुबह होते ही व्यवस्था बदल गई।
शनिवार की रात जिन मजदूरों को ट्रकों से उतारकर आईएसबीटी भेज दिया गया था, उनके लिए रात भर में बस का इंतजाम नहीं हो पाया। सुबह तक संख्या बढ़ती चली गई। आखिर में सुबह मजदूरों ने ट्रकों को रुकवाकर उनमें सवार होना शुरू कर दिया। पुलिस ने भी ट्रक रुकवाए।
ट्रक का नंबर, चालक का मोबाइल नंबर नोट किया
बाद में व्यवस्था की गई कि ट्रकों के नंबर और चालकों के मोबाइल नंबर नोट किए जाने लगे। उधर फतेहपुर सीकरी और रूनकता में पैदल आ रहे मजदूरों की संख्या बढ़ी तो वहां पुलिसवालों ने ट्रक रुकवाकर उनके जाने का इंतजाम करा दिया।
शहर में बंगाली मिठाई बनाने वाले कारीगर भी लॉकडाउन में फंसे हुए थे। राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह के प्रयासों से इन मिठाई कारीगरों को सड़क मार्ग से घर के लिए रवाना किया गया तो उनकी आंखें छलक आईं।
आगरा मिष्ठान्न विक्रेता संघ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह बैराठ ने बताया कि शहर में विभिन्न मिष्ठान्न विक्रेताओं के यहां पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के कारीगर यहां फंसे हुए थे। लॉकडाउन में प्रतिष्ठान बंद होने के कारण तकरीबन दो माह से इनके पास कोई कामकाज नहीं था। इस पर राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह को उनकी पीड़ा बताई गई।
उन्होंने शासन स्तर से मिठाई कारीगरों की घर वापसी के लिए प्रयास किए। उनके लिए सड़क मार्ग से जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई। रास्ते में उनके खानपान के लिए खाद्यान्न और सिलिंडर भी दिया गया, ताकि वह रास्ते में खाना बनाकर खा सकें। सभी कारीगर शांति स्वीट्स हसनपुरा से पश्चिमी बंगाल के लिए रवाना किए गए।