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लॉकडाउन में 'कोविड योद्धा परफेक्ट सॉफ्टवेयर' से पहुंचा भोजन, प्रदेश का पहला जिला बना आगरा
Fri, 08 May 2020 12:15 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 08 May 2020 12:15 AM IST
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लोगों को खाना देते आगरा पुलिस के सिपाही (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन में जरूरतमंद और गरीबों को भोजन वितरण करने के लिए आगरा में नई व्यवस्था की गई है। एसएसपी के गोपनीय सहायक चौधरी विकास रावत की पहल पर कोविड योद्धा परफेक्ट सॉफ्टवेयर की मदद से थाने और चौकी की पुलिस भोजन पहुंचा रही है। इस नई तकनीकी से भोजन वितरण करने वाला आगरा प्रदेश में पहला जिला बन गया है। इसकी मदद से कॉल करने वाले हर व्यक्ति के पास भोजन पहुंच रहा है।
गोपनीय सहायक चौधरी विकास रावत ने बताया कि भोजन के लिए लगातार पुलिस के पास कॉल आ रहे थे। पुलिस के व्हाट्स ग्रुप पर कॉल करने वालों की जानकारी भेजी जाती थी। कई बार भोजन वितरण में दिक्कत आ रही थी। उन्होंने समाजसेवी नितेश अग्रवाल से बात की।
उन्होंने परफेक्ट सॉफ्टवेयर कंपनी से बात की। उन्होंने साफ्टवेयर बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों ने चार दिन की मेहनत के बाद कोविड योद्धा नामक साफ्टवेयर तैयार किया है।
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गोपनीय सहायक चौधरी विकास रावत ने बताया कि भोजन के लिए लगातार पुलिस के पास कॉल आ रहे थे। पुलिस के व्हाट्स ग्रुप पर कॉल करने वालों की जानकारी भेजी जाती थी। कई बार भोजन वितरण में दिक्कत आ रही थी। उन्होंने समाजसेवी नितेश अग्रवाल से बात की।
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उन्होंने परफेक्ट सॉफ्टवेयर कंपनी से बात की। उन्होंने साफ्टवेयर बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों ने चार दिन की मेहनत के बाद कोविड योद्धा नामक साफ्टवेयर तैयार किया है।
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गोपनीय सहायक चौधरी विकास रावत
- फोटो : अमर उजाला
यूपी-112 पर आने वाले कॉल से इस साफ्टवेयर पर खाना मांगने वालों की जानकारी अपलोड की जाती है। इसके बाद एक संदेश थाना की लॉगइन आईडी पर जाता है। इस संदेश को थाना प्रभारी की ओर से चौकी पुलिस के मोबाइल एप पर स्थानांतरित किया जाता है।
इसके बाद पुलिस जरूरतमंद को खाना के पैकेट देती है। इसकी जानकारी साफ्टवेयर पर अपलोड कर दी जाती है। रोजाना खाना मांगने वालों का साफ्टवेयर की मदद से संदेश भी स्वत: ही तैयार होता है। इसलिए बार-बार कॉल करने की जरूरत नहीं है।
इससे झूठ बोलकर खाने के पैकेट लेने वालों पर लगाम लगेगी। तीन दिन में साफ्टवेयर पर एक हजार से अधिक लोगों के कॉल आने पर जानकारी दर्ज की जा चुकी है। विकास रावत ने बताया कि यह साफ्टवेयर प्रदेश में पहला है, जिससे भोजन की व्यवस्था हो रही है।
इसके बाद पुलिस जरूरतमंद को खाना के पैकेट देती है। इसकी जानकारी साफ्टवेयर पर अपलोड कर दी जाती है। रोजाना खाना मांगने वालों का साफ्टवेयर की मदद से संदेश भी स्वत: ही तैयार होता है। इसलिए बार-बार कॉल करने की जरूरत नहीं है।
इससे झूठ बोलकर खाने के पैकेट लेने वालों पर लगाम लगेगी। तीन दिन में साफ्टवेयर पर एक हजार से अधिक लोगों के कॉल आने पर जानकारी दर्ज की जा चुकी है। विकास रावत ने बताया कि यह साफ्टवेयर प्रदेश में पहला है, जिससे भोजन की व्यवस्था हो रही है।
फीड करते हैं डाटा
चौकी से भोजन वितरण में लगे पुलिसकर्मी अपने मोबाइल एप पर जानकारी अपलोड करते हैं। इसमें जिस व्यक्ति ने पैकेट लिया है, उसका आधार कार्ड का नंबर लिया जाता है। क्यूआर कोड स्कैन करते हैं। इसके बाद जरूरतमंद व्यक्ति की जानकारी आ जाती है, जिसे एडमिन भी देख सकते हैं।
संस्थाएं बांट रहीं भोजन
समाजसेवी संस्थाएं प्रतिदिन 35-40 हजार भोजन के पैकेट पुलिस की सहायता से वितरण करा रही है। इसके बावजूद पुलिस के पास खाने के पैकेट के लिए कॉल आते हैं।
नकार भी सकते हैं
इस साफ्टवेयर की खासियत है कि रोजाना खाना मांगने वालों की भी जानकारी भर दी जाती है। अगर, किसी व्यक्ति ने गलत सूचना देकर खाने के पैकेट मांगे हैं तो उसे नकारा भी जा सकता है।
चौकी से भोजन वितरण में लगे पुलिसकर्मी अपने मोबाइल एप पर जानकारी अपलोड करते हैं। इसमें जिस व्यक्ति ने पैकेट लिया है, उसका आधार कार्ड का नंबर लिया जाता है। क्यूआर कोड स्कैन करते हैं। इसके बाद जरूरतमंद व्यक्ति की जानकारी आ जाती है, जिसे एडमिन भी देख सकते हैं।
संस्थाएं बांट रहीं भोजन
समाजसेवी संस्थाएं प्रतिदिन 35-40 हजार भोजन के पैकेट पुलिस की सहायता से वितरण करा रही है। इसके बावजूद पुलिस के पास खाने के पैकेट के लिए कॉल आते हैं।
नकार भी सकते हैं
इस साफ्टवेयर की खासियत है कि रोजाना खाना मांगने वालों की भी जानकारी भर दी जाती है। अगर, किसी व्यक्ति ने गलत सूचना देकर खाने के पैकेट मांगे हैं तो उसे नकारा भी जा सकता है।