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मोपेड से ही घर के लिए निकल पड़े दिहाड़ी मजदूर
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किशनी (मैनपुरी)। प्रशासन जब व्यवस्था नहीं कर सका तो दिहाड़ी मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया।
राजस्थान के उदयपुर से सीतापुर जाने के लिए 18 दिहाड़ी मजदूर मोपेड से ही निकल पड़े।
पांच दिन चलकर किशनी की सीमा में पहुंचे। मंगलवार की सुबह खिदरपुर बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया। बाद में उनको बस से मुख्यालय भेजा गया।
मंगलवार को उदयपुर से सीतापुर के हरदौली गांव जा रहे पांच मोपेड पर परिवार सहित सवार अठारह लोगों को पुलिस ने रोक लिया। बॉर्डर पर मौजूद नगर पंचायत कर्मियों ने दिहाड़ी मजदूरों को भोजन करवाया।
सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष ओमहरी बाजपेयी भी बार्डर पर पहुंच गए। उन्होंने मजदूरों को बस से मुख्यालय भेजा। दिहाड़ी मजदूर उदयपुर में टाउन हॉल के पीछे रेगर कॉलोनी में रहकर मजदूरी करते हैं। पांच दिन पहले 18 दिहाड़ी मजदूर मोपेड से सीतापुर के लिए निकले हैं।
पांच दिन से भरपेट खाना नहीं खाया
मजदूर सिदार्थ ने बताया उन लोगों ने पांच दिन से भरपेट खाना नहीं खाया है। रास्ते में ग्रामीण जो कुछ भी देते थे वही खाना खा लेते थे। वह लोग घर जाना चाहते थे। उदयपुर प्रशासन जब व्यवस्था नहीं कर सका तो निजी वाहनों से ही घर जाने का फैसला किया। शुक्रवार को सुबह वह लोग गांव जाने के लिए पांच मोपेड से निकले हैं। रास्ता लंबा होने तथा परिवार साथ होने के कारण पांच दिन में किशनी तक पहुंच सके हैं।
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राजस्थान के उदयपुर से सीतापुर जाने के लिए 18 दिहाड़ी मजदूर मोपेड से ही निकल पड़े।
पांच दिन चलकर किशनी की सीमा में पहुंचे। मंगलवार की सुबह खिदरपुर बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया। बाद में उनको बस से मुख्यालय भेजा गया।
मंगलवार को उदयपुर से सीतापुर के हरदौली गांव जा रहे पांच मोपेड पर परिवार सहित सवार अठारह लोगों को पुलिस ने रोक लिया। बॉर्डर पर मौजूद नगर पंचायत कर्मियों ने दिहाड़ी मजदूरों को भोजन करवाया।
सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष ओमहरी बाजपेयी भी बार्डर पर पहुंच गए। उन्होंने मजदूरों को बस से मुख्यालय भेजा। दिहाड़ी मजदूर उदयपुर में टाउन हॉल के पीछे रेगर कॉलोनी में रहकर मजदूरी करते हैं। पांच दिन पहले 18 दिहाड़ी मजदूर मोपेड से सीतापुर के लिए निकले हैं।
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पांच दिन से भरपेट खाना नहीं खाया
मजदूर सिदार्थ ने बताया उन लोगों ने पांच दिन से भरपेट खाना नहीं खाया है। रास्ते में ग्रामीण जो कुछ भी देते थे वही खाना खा लेते थे। वह लोग घर जाना चाहते थे। उदयपुर प्रशासन जब व्यवस्था नहीं कर सका तो निजी वाहनों से ही घर जाने का फैसला किया। शुक्रवार को सुबह वह लोग गांव जाने के लिए पांच मोपेड से निकले हैं। रास्ता लंबा होने तथा परिवार साथ होने के कारण पांच दिन में किशनी तक पहुंच सके हैं।
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