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लॉकडाउन- बाहरी मांग ठप होने से दूध की कीमतें गिरीं
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कासगंज। देश में लॉकडाउन के चलते व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाके की रीढ़ कहे जाने वाले दुग्ध उत्पादन की मंदी के कारण कमर टूट गई है। लॉकडाउन से पहले मिल्क फैक्ट्री एवं चिलिंग प्लांटों से 45 रुपये लीटर दूध की खरीद की जा रही थी। अब दूध की कीमत 30 से 32 रुपये लीटर की रह गई है। जिससे गांव के दुग्ध उत्पादकों को काफी झटका लगा है।
यहां तक कि दुग्ध उत्पादन की लागत भी पशुपालक नहीं निकल पा रही है। कुछ समय के लिए डेयरी प्रोडक्ट उत्पादक फैक्ट्री और चिलिंग प्लांट भी बंद हो गए थे। इससे गांवों से दूध का उठान भी नहीं हो रहा था। अब पिछले सप्ताह डेयरी फैक्ट्री संचालित हुई है और धीमे धीमे चिलिंग प्लांट शुरू हुए हैं, लेकिन बाहरी मांग न आने के कारण दूध की कीमतों में सुधार नहीं हो रहा है।
दुग्ध उत्पादन कारोबार से जुड़े कारोबारी अनिल गुप्ता ने बताया कि बाहरी मांग न निकलने के कारण दिक्कतें हैं। बाजार में नकदी की भी किल्लत हो रही है। आवागमन ठप है। यहां का दूध कई फैक्ट्रियों के माध्यम से बाहरी राज्यों में जाता था। घोर निराशा के बीच पशुपालक पशुओं को बेचने का मन बना रहे हैं। सिद्धपुरा निवासी पशुपालक सोहित ने बताया कि दूध की कीमतें गिर कर 30 रुपये पर आ चुकी हैं। इससे उत्पादन की लागत भी नहीं निकल रही। पशुपालकों को सहायता की जरूरत है।
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- गांव में दूध 30 रुपये से कम कीमत पर बिक रहा है। ऐसी स्थिति में दूध बिक्री का कोई मतलब नहीं रह जाता, लेकिन पशुओं के दाने चारे के लिए मजबूरी में कम कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। पशुपालक बरबाद हो रहे हैं। रामसिंह, इटौआ।
- कोरोना महामारी में दूध के दाम धड़ाधड़ गिरे हैं। इससे पशुपालक किसान परेशान हैं। ऐसी स्थिति में पशुओं को कैसे पाला जाएगा। समझ में नहीं आ रहा। सरकार का ध्यान भी इस ओर नहीं है- सीनेश यादव, नौरथा।
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यहां तक कि दुग्ध उत्पादन की लागत भी पशुपालक नहीं निकल पा रही है। कुछ समय के लिए डेयरी प्रोडक्ट उत्पादक फैक्ट्री और चिलिंग प्लांट भी बंद हो गए थे। इससे गांवों से दूध का उठान भी नहीं हो रहा था। अब पिछले सप्ताह डेयरी फैक्ट्री संचालित हुई है और धीमे धीमे चिलिंग प्लांट शुरू हुए हैं, लेकिन बाहरी मांग न आने के कारण दूध की कीमतों में सुधार नहीं हो रहा है।
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दुग्ध उत्पादन कारोबार से जुड़े कारोबारी अनिल गुप्ता ने बताया कि बाहरी मांग न निकलने के कारण दिक्कतें हैं। बाजार में नकदी की भी किल्लत हो रही है। आवागमन ठप है। यहां का दूध कई फैक्ट्रियों के माध्यम से बाहरी राज्यों में जाता था। घोर निराशा के बीच पशुपालक पशुओं को बेचने का मन बना रहे हैं। सिद्धपुरा निवासी पशुपालक सोहित ने बताया कि दूध की कीमतें गिर कर 30 रुपये पर आ चुकी हैं। इससे उत्पादन की लागत भी नहीं निकल रही। पशुपालकों को सहायता की जरूरत है।
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- गांव में दूध 30 रुपये से कम कीमत पर बिक रहा है। ऐसी स्थिति में दूध बिक्री का कोई मतलब नहीं रह जाता, लेकिन पशुओं के दाने चारे के लिए मजबूरी में कम कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। पशुपालक बरबाद हो रहे हैं। रामसिंह, इटौआ।
- कोरोना महामारी में दूध के दाम धड़ाधड़ गिरे हैं। इससे पशुपालक किसान परेशान हैं। ऐसी स्थिति में पशुओं को कैसे पाला जाएगा। समझ में नहीं आ रहा। सरकार का ध्यान भी इस ओर नहीं है- सीनेश यादव, नौरथा।