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आगरा: रेलवे की जमीन पर बने 30 घरों को तोड़ने के नोटिस पर हंगामा और प्रदर्शन

Sat, 30 Jan 2021 01:07 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 30 Jan 2021 01:07 PM IST
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local protests over the notice of breaking 30 houses built on railway land in agra
विरोध प्रदर्शन करते स्थाीय लोग - फोटो : अमर उजाला

आगरा में यमुना ब्रिज के निकट नया पुल बनाया जा रहा है। पुल के निर्माण में बाधा बन रहे मोती महल की बस्ती के 30 मकानों को तोड़ने के लिए रेलवे ने नोटिस जारी किए थे। यह मकान 40 साल पहले रेलवे की जमीन पर बने हैं और इनमें 51 परिवार रहते हैं।

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 इन सभी परिवारों को रेलवे ने घर खाली करने के लिए नोटिस दिए हैं। घर खाली कराने और तोड़ने के नोटिस के विरोध में प्रभावित लोगों ने शुक्रवार को बस्ती में प्रदर्शन किया। इसके बाद बसपा नेताओं के साथ मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर दूसरी जगह आवास दिलाने की मांग की। 
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बस्ती की निवासी करिश्मा ने बताया कि करीब 40 साल पहले यहां रहने आए थे, तब कच्चा मकान बनाया था। अब पक्का मकान है। अगर यह जमीन सरकारी थी तो यहां बिजली के बिल और पानी की पाइपलाइन क्यों डाली गई। 

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वहीं देवी सिंह का कहना था कि बस्ती के ज्यादातर लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हैं। ऐसे में 15 दिन में दूसरी जगह व्यवस्था कहां से कर पाएंगे। रेलवे पुलिस रोजाना परेशान कर रही है। कुछ मकान तो आगे से तोड़ भी दिए हैं, ताकि पूरी तरह टूटने से बच जाएं, लेकिन रेलवे प्रशासन पूरी तरह मकान हटाने पर आमादा है। 

मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन
मोती महल में गरीबों के घर तोड़ने के विरोध में बसपा जिलाध्यक्ष विमल कुमार वर्मा ने शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल के साथ मंडलायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि यहां के विस्थापितों को कांशीराम योजना के खाली आवासों का आवंटन किया जाए या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना में जगह दी जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में संदीप मुखरैया, सत्तार उस्मानी, अरविंद मथुरिया, संतोष चक, नवाब सिंह मौर्य, पार्षद हरिमोहन, संतोष चक, यासीन अब्बास आदि थे। 

यहां रहता है वीरता पुरस्कार से सम्मानित शहंशाह का परिवार
बस्ती में ही वर्ष 2012 में यमुना में डूबते बच्चों को बचाने वाले शहंशाह का घर भी है। शहंशाह मजदूरी करता है। उसके पिता बिश्वा ने बताया कि शहंशाह को आठ साल पहले राष्ट्रपति का वीरता पुरस्कार मिल चुका है। परिवार करीब 40 साल से यहां रहा है। 

नोटिस भेजे गए हैं, मोहलत भी दे चुके: डीसीएम
आगरा रेल मंडल के वाणिज्य प्रबंधक एसके श्रीवास्तव ने कहा कि मोती महल की जमीन पर अवैध निर्माण को हटाने के लिए नोटिस दिए गए हैं। 15 दिन का वक्त भी दिया गया था। इसके बाद से वहां के निवासियों ने विभागीय अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया है। जिला प्रशासन की ओर से कोई जानकारी मांगी जाती है तो उपलब्ध करवाई जाएगी। 
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