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कैंसर मरीजों के लिए अच्छी खबर, एम्स के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में होगी अत्याधुनिक मशीन
Mon, 02 Mar 2020 12:11 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 02 Mar 2020 12:11 AM IST
सार
अगले महीने से मिलने लगेगी सुविधा, 28 करोड़ की है लागत
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एसएन मेडिकल कालेज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर के जख्म की सिकाई लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन से होगी। मशीन के सेटअप लगाने का कार्य शुरू हो गया है। अगले महीने से मरीजों को इसकी सुविधा शुरू हो जाएगी।
कैंसर रोग विभाग में मशीन सेटअप के लिए कार्य शुरू हो गया है, इसके लिए सुरक्षित रेडिएशन फ्री सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए बेरीकेडिंग कर दी गई है। इस मशीन की कीमत करीब 28 करोड़ रुपये है। इसे ब्रेकीथेरेपी मशीन के पास लगाया जा रहा है।
अभी तक यह सुविधा केजीएमयू और एम्स में ही है। एसएन में रोजाना 40-60 मरीजों की रेडियोथेरेपी दी जा रही है। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि इससे कैंसर के मरीजों को बड़ी सुविधा मिलेगी, 40-50 दिन में इसका कार्य पूरा हो जाएगा। यह चुनिंदा मेडिकल कॉलेज में ही मशीन लगी है।
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यह है खासियत
एसएन में अभी कोबाल्ट मशीन से कैंसर के जख्म की सिकाई हो रही है। इससे जख्म के आसपास की मांसपेशियां भी प्रभावित होती हैं। मरीज को साइड इफेक्ट भी होते हैं। लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन से साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। इससे सटीक जख्म की ही सिकाई होगी, आसपास की मांसपेशियाें को नुकसान नहीं पहुंचेगा। मरीजों को पीड़ा भी कम होगी।
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कैंसर रोग विभाग में मशीन सेटअप के लिए कार्य शुरू हो गया है, इसके लिए सुरक्षित रेडिएशन फ्री सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए बेरीकेडिंग कर दी गई है। इस मशीन की कीमत करीब 28 करोड़ रुपये है। इसे ब्रेकीथेरेपी मशीन के पास लगाया जा रहा है।
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अभी तक यह सुविधा केजीएमयू और एम्स में ही है। एसएन में रोजाना 40-60 मरीजों की रेडियोथेरेपी दी जा रही है। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि इससे कैंसर के मरीजों को बड़ी सुविधा मिलेगी, 40-50 दिन में इसका कार्य पूरा हो जाएगा। यह चुनिंदा मेडिकल कॉलेज में ही मशीन लगी है।
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यह है खासियत
एसएन में अभी कोबाल्ट मशीन से कैंसर के जख्म की सिकाई हो रही है। इससे जख्म के आसपास की मांसपेशियां भी प्रभावित होती हैं। मरीज को साइड इफेक्ट भी होते हैं। लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन से साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। इससे सटीक जख्म की ही सिकाई होगी, आसपास की मांसपेशियाें को नुकसान नहीं पहुंचेगा। मरीजों को पीड़ा भी कम होगी।