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लाइफलाइन की ‘सेहत’ सुधारने को बनी कमेटी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 21 Jun 2015 02:15 AM IST
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शहर की लाइफ लाइन (एमजी रोड) के ट्रैफिक में सुधार के लिए कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने स्वयंसेवी संगठन स्पीहा के वाइस प्रेसीडेंट प्रेम प्रशांत की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। इसी संगठन के प्रयासों से आईआईटी दिल्ली के दो प्रोफेसरों ने शहर की प्रमुख तीन सड़कों पर रिसर्च के बाद रिपोर्ट तैयार की है। इसी रिपोर्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है।
जेपी होटल में शनिवार को स्पीहा की ओर से आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने कहा कि दिनोंदिन वाहनों (खासतौर से कार) की संख्या बढ़ने से शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ा है। आरटीओ के आंकड़ों को देखें तो हर माह साढ़े आठ हजार नए वाहन सड़क पर आ रहे हैं। अतिक्रमण और हादसों की दर भी बढ़ी है। ट्रैफिक सुधार के लिए सरकारी मशीनरी और जागरूक लोगों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने ‘सेफ स्ट्रीट्स फॉर आगरा’ और ‘ट्रैफिक एंड सेफ कम्युनिटीज’ का लोकार्पण किया। ये किताब आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर दिनेश मोहन और प्रोफेसर गीतम तिवारी ने आगरा के ट्रैफिक पर लिखी है। स्पीहा के प्रोफेसर आरएन सिंह ने कहा कि शहर के ट्रैफिक को 50 साल के तक के लिए सोचकर बनाना होगा। एसएसपी राजेश डी. मोदक, नगरायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। स्पीहा के सचिव प्रदीप सहगल, राजीव नरायन आदि मौजूद रहे।
चौराहों की डिजाइन में बदलाव की जरूरत
प्रोफेसर दिनेश मोहन ने बताया कि आगरा में हादसों की दर अधिक होने का कारण पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ की कमी है। साइकिल चालकों के लिए भी कोई स्थान नहीं है। चौराहों का डिजाइन ठीक नहीं है। इसमें तकनीकी रूप से बदलाव की जरूरत है। उन्होंने अंडरपास और फुट ओवर ब्रिज की उपयोगिता के बारे में भी बताया। ट्रैफिक में सुधार के लिए विदेशों की तरह ही सड़क निर्माण में इंजीनियर, प्लानर और आर्किटेक्ट की मदद लेनी होगी।
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क्रॉसिंग के पास सबसे ज्यादा हादसे
प्रोफेसर गीतम तिवारी ने सेफ स्ट्रीट की व्याख्या करते हुए बताया कि सड़क पर पहला हक पैदल राहगीर का है। लेकिन उनके हक को दबा दिया गया है। रिसर्च में सामने आया कि हाईवे और क्रासिंग के आसपास सबसे ज्यादा हादसे होते हैं, जिनमें लोगों की मौत होती है। चौराहों पर संकेतक और मार्किंग भी ठीक नहीं है। सिग्नल की दशा भी कमोवेश यही है।
एमजी रोड का ट्रैफिक डायवर्ट हो तो बने बात
आगरा। सेमिनार में आगरा विकास मंच के अध्यक्ष अशोक जैन सीए ने कहा कि एमजी रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए प्रशासन ने भोगीपुरा से मदिया कटरा तक की सड़क को इसके समानांतर विकसित करने का प्लान बनाया था। इसे अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, लेकिन अब वही दशा हो गई है। एमजी रोड को ‘सांस’ मिले, इसके लिए अन्य सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट जरूरी है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के वीरेंद्र गुप्ता ने ट्रांसपोर्ट नगर और थोक मंडियों को शहर से बाहर करने और अंडरपाथ बनवाए जाने पर जोर दिया। उद्यमी डा. रंजना बंसल ने कहा कि सुचारु ट्रैफिक में बड़ी बाधा अतिक्रमण है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को छोटी बसें लगनी चाहिए। डा. अशोक सहाय ने बाजारों में लांग टर्म और शॉर्ट टर्म पार्किंग की बात कही। छावनी बोर्ड के उपाध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा कि ट्रैफिक प्लान में हमेशा छावनी बोर्ड को छोड़ दिया जाता है, जबकि इस इलाके में ज्यादा टूरिस्ट आता है। वक्ताओं ने पुणे और चेन्नई के ट्रैफिक मॉडलों पर चर्चा की। एंबुलेंस को अलग रास्ता देने, सड़क किनारे पिलर्स को हटाने के सुझाव आए। आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन के केसी जैन ने पैदल राहगीरों की समस्या उठाई। लोकस्वर के राजीव गुप्ता ने कहा कि महानगर बसें भी जाम का बड़ा कारण हैं। रोटरी क्लब के अध्यक्ष दिगंबर सिंह धाकरे ने कहा कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से सुधार करने, बेतरतीब होर्डिंग्स को हटाए जाने और ट्रैफिक नियमों को कड़ा करने का सुझाव दिया। डा. आरसी मिश्रा, उद्यमी पूरन डाबर, गिरिजाशंकर ने भी सुझाव दिए।
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जेपी होटल में शनिवार को स्पीहा की ओर से आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने कहा कि दिनोंदिन वाहनों (खासतौर से कार) की संख्या बढ़ने से शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ा है। आरटीओ के आंकड़ों को देखें तो हर माह साढ़े आठ हजार नए वाहन सड़क पर आ रहे हैं। अतिक्रमण और हादसों की दर भी बढ़ी है। ट्रैफिक सुधार के लिए सरकारी मशीनरी और जागरूक लोगों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने ‘सेफ स्ट्रीट्स फॉर आगरा’ और ‘ट्रैफिक एंड सेफ कम्युनिटीज’ का लोकार्पण किया। ये किताब आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर दिनेश मोहन और प्रोफेसर गीतम तिवारी ने आगरा के ट्रैफिक पर लिखी है। स्पीहा के प्रोफेसर आरएन सिंह ने कहा कि शहर के ट्रैफिक को 50 साल के तक के लिए सोचकर बनाना होगा। एसएसपी राजेश डी. मोदक, नगरायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। स्पीहा के सचिव प्रदीप सहगल, राजीव नरायन आदि मौजूद रहे।
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चौराहों की डिजाइन में बदलाव की जरूरत
प्रोफेसर दिनेश मोहन ने बताया कि आगरा में हादसों की दर अधिक होने का कारण पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ की कमी है। साइकिल चालकों के लिए भी कोई स्थान नहीं है। चौराहों का डिजाइन ठीक नहीं है। इसमें तकनीकी रूप से बदलाव की जरूरत है। उन्होंने अंडरपास और फुट ओवर ब्रिज की उपयोगिता के बारे में भी बताया। ट्रैफिक में सुधार के लिए विदेशों की तरह ही सड़क निर्माण में इंजीनियर, प्लानर और आर्किटेक्ट की मदद लेनी होगी।
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क्रॉसिंग के पास सबसे ज्यादा हादसे
प्रोफेसर गीतम तिवारी ने सेफ स्ट्रीट की व्याख्या करते हुए बताया कि सड़क पर पहला हक पैदल राहगीर का है। लेकिन उनके हक को दबा दिया गया है। रिसर्च में सामने आया कि हाईवे और क्रासिंग के आसपास सबसे ज्यादा हादसे होते हैं, जिनमें लोगों की मौत होती है। चौराहों पर संकेतक और मार्किंग भी ठीक नहीं है। सिग्नल की दशा भी कमोवेश यही है।
एमजी रोड का ट्रैफिक डायवर्ट हो तो बने बात
आगरा। सेमिनार में आगरा विकास मंच के अध्यक्ष अशोक जैन सीए ने कहा कि एमजी रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए प्रशासन ने भोगीपुरा से मदिया कटरा तक की सड़क को इसके समानांतर विकसित करने का प्लान बनाया था। इसे अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, लेकिन अब वही दशा हो गई है। एमजी रोड को ‘सांस’ मिले, इसके लिए अन्य सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट जरूरी है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के वीरेंद्र गुप्ता ने ट्रांसपोर्ट नगर और थोक मंडियों को शहर से बाहर करने और अंडरपाथ बनवाए जाने पर जोर दिया। उद्यमी डा. रंजना बंसल ने कहा कि सुचारु ट्रैफिक में बड़ी बाधा अतिक्रमण है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को छोटी बसें लगनी चाहिए। डा. अशोक सहाय ने बाजारों में लांग टर्म और शॉर्ट टर्म पार्किंग की बात कही। छावनी बोर्ड के उपाध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा कि ट्रैफिक प्लान में हमेशा छावनी बोर्ड को छोड़ दिया जाता है, जबकि इस इलाके में ज्यादा टूरिस्ट आता है। वक्ताओं ने पुणे और चेन्नई के ट्रैफिक मॉडलों पर चर्चा की। एंबुलेंस को अलग रास्ता देने, सड़क किनारे पिलर्स को हटाने के सुझाव आए। आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन के केसी जैन ने पैदल राहगीरों की समस्या उठाई। लोकस्वर के राजीव गुप्ता ने कहा कि महानगर बसें भी जाम का बड़ा कारण हैं। रोटरी क्लब के अध्यक्ष दिगंबर सिंह धाकरे ने कहा कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से सुधार करने, बेतरतीब होर्डिंग्स को हटाए जाने और ट्रैफिक नियमों को कड़ा करने का सुझाव दिया। डा. आरसी मिश्रा, उद्यमी पूरन डाबर, गिरिजाशंकर ने भी सुझाव दिए।