{"_id":"5f6835138ebc3eb73a4adb5c","slug":"leopard-grows-in-chambal-eight-cubs-also-saw-forest-department-alert-villagers","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगराः संकट ग्रस्त सूची में शामिल तेंदुए का चंबल में बढ़ा कुनबा, आठ शावक दिखने से वन विभाग उत्साहित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगराः संकट ग्रस्त सूची में शामिल तेंदुए का चंबल में बढ़ा कुनबा, आठ शावक दिखने से वन विभाग उत्साहित
Mon, 21 Sep 2020 10:38 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 21 Sep 2020 10:38 AM IST
सार
चंबल में पहली बार सात तेंदुआ, आठ शावक दिखे हैं। इसके बाद ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मानव वन्य जीव संघर्ष जागरूकता
अभियान चलाया जा रहा है। तेंदुए के विचरण पर भी नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
हथकांत किले की छत पर तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की संकट ग्रस्त सूची में शामिल तेंदुए का चंबल में कुनबा बढ़ा है। हाल ही में गाय-बछड़ों पर हुए हमलों के बाद की गई निगरानी में सात तेंदुए और आठ शावक दिखे हैं। हमले बढ़ने की आशंका के कारण वन विभाग ने वन्य जीव संघर्ष जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।
एक पखवाडे़ में मऊ, मऊ की मढै़या, नावली, हथकांत, कैंजरा, बाघराजपुरा, पडुआपुरा में कई गाय-बछड़े तेंदुए के शिकार हुए हैं। इस पर वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई तो तेंदुए का बढ़ा हुआ कुनबा दिखा। मऊ, नावली, मऊ की मढै़या के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए, हथकांत, नंदगवां, महुआशाला के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए, केंजरा, सिमराई, गोंसिली, बाघराजपुरा के बीच दो शावकों के साथ मादा तेंदुआ, पडुआपुरा, मनसुखपुरा, रेहा, बरैंडा के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए दिखे हैं।
ये भी पढ़ें- इंतजार खत्म...छह महीने बाद ताजमहल-आगरा किला में नया सवेरा, पर्यटक, बोले वाह ताज, देखें तस्वीरें
विज्ञापन
चंबल में पहली बार सात तेंदुआ, आठ शावक दिखे हैं। इसके बाद ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मानव वन्य जीव संघर्ष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। तेंदुए के विचरण पर भी नजर रखी जा रही है। - आरके सिंह राठौड, रेंजर, चंबल सेंक्च्युरी बाह।
विज्ञापन
एक पखवाडे़ में मऊ, मऊ की मढै़या, नावली, हथकांत, कैंजरा, बाघराजपुरा, पडुआपुरा में कई गाय-बछड़े तेंदुए के शिकार हुए हैं। इस पर वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई तो तेंदुए का बढ़ा हुआ कुनबा दिखा। मऊ, नावली, मऊ की मढै़या के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए, हथकांत, नंदगवां, महुआशाला के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए, केंजरा, सिमराई, गोंसिली, बाघराजपुरा के बीच दो शावकों के साथ मादा तेंदुआ, पडुआपुरा, मनसुखपुरा, रेहा, बरैंडा के बीच दो शावकों के साथ नर-मादा तेंदुए दिखे हैं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- इंतजार खत्म...छह महीने बाद ताजमहल-आगरा किला में नया सवेरा, पर्यटक, बोले वाह ताज, देखें तस्वीरें
विज्ञापन
चंबल में पहली बार सात तेंदुआ, आठ शावक दिखे हैं। इसके बाद ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मानव वन्य जीव संघर्ष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। तेंदुए के विचरण पर भी नजर रखी जा रही है। - आरके सिंह राठौड, रेंजर, चंबल सेंक्च्युरी बाह।
हथकांत किले की छत पर तेंदुआ देख भागे चरवाहे
शनिवार को हथकांत के किले की छत पर तेंदुए को देखकर बीहड़ के चरवाहे शोर मचाते हुए भागे। किले की छत पर तेंदुए की चढ़ने के बावत वन कर्मियों ने बताया कि तेंदुआ पेड़ पर भी चढ़कर शिकार कर लेता है।
4 महीने पहले सिमराई में हुआ था शिकार
खेड़ा राठौर के सिमराई गांव के बीहड में 13 मई को नर तेंदुए का शव मिला था। गर्दन के पास नुुकीले जख्म थे। उसके बाद से इस इलाके में 2 शावकों के साथ मादा ही दिखी है। वन विभाग ने खेड़ा राठौर थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। तब से अब तक पुलिस शिकारियों तक नहीं पहुंच सकी है।
तेंदुए के हमलों की दहशत, प्रजनन काल में हो जाते है हिंसक
चंबल के बीहड़ के मऊ, मऊ की मढैया, नावली, हथकांत, महुआशाला, सिमराई, गौंसिली, केंजरा, भगवान पुरा, बरहा, बाघराजपुरा, पडुआपुरा, बरैंडा, रेहा आदि में तेंदुए के हमले हए हैं। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि सितंबर से दिसंबर तक तेंदुए का प्रजनन काल होता है। इस दौरान वे हिंसक हो उठते हैं।
तेंदुए एक नजर- ऊंचाई - 45-80 सेमी, लंबाई - 100-190 सेमी, पूंछ की लंबाई - 70-95 सेमी, वजन - नर - 30-70 किग्रा, मादा - 28 -60 किग्रा, गर्भकाल- 90 से 105 दिन, 1 से 3 बच्चे जन्म देते है, 2 साल तक शावक अपनी मादा के साथ रहते हैं, देख कर शिकार करना सीखते हैं।
शनिवार को हथकांत के किले की छत पर तेंदुए को देखकर बीहड़ के चरवाहे शोर मचाते हुए भागे। किले की छत पर तेंदुए की चढ़ने के बावत वन कर्मियों ने बताया कि तेंदुआ पेड़ पर भी चढ़कर शिकार कर लेता है।
4 महीने पहले सिमराई में हुआ था शिकार
खेड़ा राठौर के सिमराई गांव के बीहड में 13 मई को नर तेंदुए का शव मिला था। गर्दन के पास नुुकीले जख्म थे। उसके बाद से इस इलाके में 2 शावकों के साथ मादा ही दिखी है। वन विभाग ने खेड़ा राठौर थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। तब से अब तक पुलिस शिकारियों तक नहीं पहुंच सकी है।
तेंदुए के हमलों की दहशत, प्रजनन काल में हो जाते है हिंसक
चंबल के बीहड़ के मऊ, मऊ की मढैया, नावली, हथकांत, महुआशाला, सिमराई, गौंसिली, केंजरा, भगवान पुरा, बरहा, बाघराजपुरा, पडुआपुरा, बरैंडा, रेहा आदि में तेंदुए के हमले हए हैं। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि सितंबर से दिसंबर तक तेंदुए का प्रजनन काल होता है। इस दौरान वे हिंसक हो उठते हैं।
तेंदुए एक नजर- ऊंचाई - 45-80 सेमी, लंबाई - 100-190 सेमी, पूंछ की लंबाई - 70-95 सेमी, वजन - नर - 30-70 किग्रा, मादा - 28 -60 किग्रा, गर्भकाल- 90 से 105 दिन, 1 से 3 बच्चे जन्म देते है, 2 साल तक शावक अपनी मादा के साथ रहते हैं, देख कर शिकार करना सीखते हैं।