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UP: फर्जी बैनामों और वसीयत से 500 करोड़ रुपये की जमीनों पर हो गए कब्जे, किसी को खबर तक नहीं लगी...
Wed, 26 Feb 2025 09:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 26 Feb 2025 09:07 AM IST
सार
आगरा में माफिया के गिरोह ने 500 करोड़ रुपये की जमीनों पर कब्जे का खेल किया। फर्जी बैनामे और वसीयत हो गईं और किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी।
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रजिस्ट्री कार्यालय से बाहर निकती एसआईटी की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा में बेशकीमती जमीनों का फर्जी बैनामा करके कब्जा करने वाले गिरोह की नजर डौकी के बाबा मुंशीदास सहित अन्य इलाकों में 500 करोड़ की जमीनों पर थी।
सोमवार को पुलिस ने मुंशीदास के बेटे राजकुमार और फर्जी वसीयत लगाने में आरोपी निबंधन कार्यालय के संविदा कर्मचारी चित्र सिंह को जेल भेजा है। एसआईटी की पूछताछ में राजकुमार ने बताया कि पिता मुंशीदास ने ट्रस्ट डीड में मां राजवती और दूसरी पत्नी विमला देवी उर्फ उर्मिला देवी के नाम दर्ज कराए थे। यह 11 फरवरी 2004 की थी। पिता की वर्ष 2017 में हत्या हो गई। दो पत्नियों के नाम होने के कारण वो जमीनों का सौदा नहीं कर पा रहा था।
पांच वर्ष पहले अजय सिसौदिया और प्रशांत शर्मा से मुलाकात हुई। दोनों ने काम के बदले दो भूखंड अपने नाम कराने का सौदा किया। 23 फरवरी 2004 की बाबा मुंशीदास की फर्जी वसीयत तैयार की। जिसे चित्र सिंह की मदद से सदर तहसील में जिल्द बही में लगवा दिया था।
शाहगंज थाने में 21 जनवरी को दर्ज मुकदमे में आरोपी प्रबल प्रताप, श्यामलाल और शिवचरन पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। उनकी तलाश की जा रही है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 500 करोड़ की जमीनों का खेल किया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी से कई और नाम सामने आएंगे।
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सोमवार को पुलिस ने मुंशीदास के बेटे राजकुमार और फर्जी वसीयत लगाने में आरोपी निबंधन कार्यालय के संविदा कर्मचारी चित्र सिंह को जेल भेजा है। एसआईटी की पूछताछ में राजकुमार ने बताया कि पिता मुंशीदास ने ट्रस्ट डीड में मां राजवती और दूसरी पत्नी विमला देवी उर्फ उर्मिला देवी के नाम दर्ज कराए थे। यह 11 फरवरी 2004 की थी। पिता की वर्ष 2017 में हत्या हो गई। दो पत्नियों के नाम होने के कारण वो जमीनों का सौदा नहीं कर पा रहा था।
पांच वर्ष पहले अजय सिसौदिया और प्रशांत शर्मा से मुलाकात हुई। दोनों ने काम के बदले दो भूखंड अपने नाम कराने का सौदा किया। 23 फरवरी 2004 की बाबा मुंशीदास की फर्जी वसीयत तैयार की। जिसे चित्र सिंह की मदद से सदर तहसील में जिल्द बही में लगवा दिया था।
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शाहगंज थाने में 21 जनवरी को दर्ज मुकदमे में आरोपी प्रबल प्रताप, श्यामलाल और शिवचरन पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। उनकी तलाश की जा रही है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 500 करोड़ की जमीनों का खेल किया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी से कई और नाम सामने आएंगे।
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