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निकाय चुनाव: 111 प्रत्याशी को जमानत बचाने के पड़ गए लाले
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कासगंज। वर्ष 2017 में हुए निकाय चुनाव ने राजनीतिक दलों को गहरे जख्म दिए। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए 130 प्रत्याशी मैदान में रहे। जिसमें से विजेता 10 प्रत्याशियों के अलावा 9 अन्य प्रत्याशियों की ही जमानत बच सकी। जबकि 111 प्रत्याशियों को अपनी जमानत बचाने के लाले पड़ गए।
चुनाव निकाय हो या फिर विधायक या सांसद का चुनाव, चुनावी रण में कूदने को प्रत्याशी बेताव नजर आते हैं, प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतरना ही काफी नहीं होता। उसके लिए मतदाताओं का साथ मिलना भी जरूरी होता है। आयोग से चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी के लिए कुुल वैध मतों का छठवां हिस्सा लाना होता है। यदि प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त नहीं कर पाते तो उनकी जमानत जब्त हो जाती है। जमानत जब्त होने पर प्रत्याशी के द्वारा नामांकन के समय जो राशि जमा की जाती है उसे जब्त कर लिया जाता है। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव की बात की जाए तो इस चुनाव में विजेता 10 प्रत्याशियों के अलावा 7 उप विजेता एवं 2 तीसरे स्थान पर आने वाले प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके। इस चुनाव में भाजपा ने सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। जिसमें से सोरों, गंजडुंडवारा व सिढ़पुरा में भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। इसके अलावा कासगंज व भरगैन में ही पार्टी अपनी जमानत बचा सकी। शेष 5 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। सपा के आठ निकायों में प्रत्याशी मैदान में रहे। जिसमें से बिलराम व भरगैन निकाय में सपा को जीत मिली। जबकि शेष छह निकायों में पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। बसपा ने मोहनपुर एवं अमांपुर में जीत हांसिल की। वहीं गंजडुंडवारा एवं पटियाली में पार्टी प्रत्याशी उपविजेता रहे और अपनी जमानत बच सके। शेष 6 निकायों में पार्टी की जमानत जब्त हो गई। जबकि कांग्रेस ने किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं की। पार्टी प्रत्याशी मोहनपुर में उप विजेता रहे और उनकी जमानत बच गई। अन्य 9 निकायों में पार्टी प्रत्याशियों की जमानत नहीं बच सकी। आप प्रत्याशी भी किसी सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाए। जो प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके उनकी जमानत राशि को आयोग ने जब्त कर लिया।
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चुनाव निकाय हो या फिर विधायक या सांसद का चुनाव, चुनावी रण में कूदने को प्रत्याशी बेताव नजर आते हैं, प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतरना ही काफी नहीं होता। उसके लिए मतदाताओं का साथ मिलना भी जरूरी होता है। आयोग से चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी के लिए कुुल वैध मतों का छठवां हिस्सा लाना होता है। यदि प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त नहीं कर पाते तो उनकी जमानत जब्त हो जाती है। जमानत जब्त होने पर प्रत्याशी के द्वारा नामांकन के समय जो राशि जमा की जाती है उसे जब्त कर लिया जाता है। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव की बात की जाए तो इस चुनाव में विजेता 10 प्रत्याशियों के अलावा 7 उप विजेता एवं 2 तीसरे स्थान पर आने वाले प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके। इस चुनाव में भाजपा ने सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। जिसमें से सोरों, गंजडुंडवारा व सिढ़पुरा में भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। इसके अलावा कासगंज व भरगैन में ही पार्टी अपनी जमानत बचा सकी। शेष 5 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। सपा के आठ निकायों में प्रत्याशी मैदान में रहे। जिसमें से बिलराम व भरगैन निकाय में सपा को जीत मिली। जबकि शेष छह निकायों में पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। बसपा ने मोहनपुर एवं अमांपुर में जीत हांसिल की। वहीं गंजडुंडवारा एवं पटियाली में पार्टी प्रत्याशी उपविजेता रहे और अपनी जमानत बच सके। शेष 6 निकायों में पार्टी की जमानत जब्त हो गई। जबकि कांग्रेस ने किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं की। पार्टी प्रत्याशी मोहनपुर में उप विजेता रहे और उनकी जमानत बच गई। अन्य 9 निकायों में पार्टी प्रत्याशियों की जमानत नहीं बच सकी। आप प्रत्याशी भी किसी सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाए। जो प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके उनकी जमानत राशि को आयोग ने जब्त कर लिया।
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