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मौत का मंजर याद कर कांप उठते मजदूर
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कासगंज। जिला अस्पताल में भर्ती मजदूर मौत के मंजर को याद कर कांप उठते हैं। अस्पताल में भर्ती घायल किसरौली निवासी विजय ने बताया कि जब लिंटर का मसाला खत्म हो गया तो सभी मजदूर मसाला बनाने में जुट गए। कुछ मजदूर नीचे थे कुछ लिंटर के ऊपर काम कर रहे थे। इसी बीच गार्डर खिसके और भरभराकर लिंटर गिर गया। जब तक कुछ समझ पाते मजदूर मलबे में दब गए। बताया कि हम सरियों के बीच फंस गए। गनीमत थी कि मलबा इधर-उधर हट गया और स्वयं तो कोशिश की है और अन्य लोगों की मदद से मलबे से बाहर निकल पाए।
घायल मजदूर अजय और धर्मेंद्र ने बताया कि रात में लिंटर डालने का काम शुरू कर दिया था। जो सुबह तक पूरा नहीं हो पाया। सुबह मसाला बनाने में जुटे हुए थे। उस समय समझ ही नहीं पाए कि कब गार्डर खिसके और तेजी के साथ लिंटर का मलबा नीचे आ गया। बचाव के लिए चीखे और चिल्लाए। मलबे से लगी चोटों का दर्द था वहीं मौत के मुंह से बाहर निकलने की छटपटाहट भी थी।
सीने में दर्द से कराह रहे मजदूर
अस्पताल में भर्ती घायल में तीन मजदूर ऐसे हैं जिनके सीने और पसलियों में काफी गंभीर चोटें हैं। चिकित्सकों ने उन्हें उचित उपचार तो दिया ही है, एक्स रे और अन्य जांचें भी कराई हैं। हादसे में घायल मजदूरों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। कोई मजदूर रेफर नहीं है।
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घायल मजदूर अजय और धर्मेंद्र ने बताया कि रात में लिंटर डालने का काम शुरू कर दिया था। जो सुबह तक पूरा नहीं हो पाया। सुबह मसाला बनाने में जुटे हुए थे। उस समय समझ ही नहीं पाए कि कब गार्डर खिसके और तेजी के साथ लिंटर का मलबा नीचे आ गया। बचाव के लिए चीखे और चिल्लाए। मलबे से लगी चोटों का दर्द था वहीं मौत के मुंह से बाहर निकलने की छटपटाहट भी थी।
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सीने में दर्द से कराह रहे मजदूर
अस्पताल में भर्ती घायल में तीन मजदूर ऐसे हैं जिनके सीने और पसलियों में काफी गंभीर चोटें हैं। चिकित्सकों ने उन्हें उचित उपचार तो दिया ही है, एक्स रे और अन्य जांचें भी कराई हैं। हादसे में घायल मजदूरों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। कोई मजदूर रेफर नहीं है।
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