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लाभचंद्र मार्केट प्रकरण : 4 अगस्त से पहले गिराना होगा अवैध निर्माण, मांगा अनुपालन शपथपत्र
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आगरा। राजामंडी स्थित लाभचंद्र मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 4 अगस्त से पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष को भी कार्रवाई से संबंधित शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए नई और अंतिम तारीख तय कर दी है। इसके बाद कोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।
शुक्रवार को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की डबल बेंच के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट के आदेशों के तहत की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए एक शपथपत्र दाखिल किया। दावा किया गया कि कोर्ट के पूर्व आदेशों का अनुपालन करते हुए मौके पर आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है। हालांकि, सरकार के इन दावों को पीड़ित पक्ष ने अदालत में पूरी तरह खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष दलील देते हुए दावा किया गया कि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई महज एक दिखावा है। जमीनी स्तर पर सिर्फ फड़ और रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि 28 फरवरी को जिलाधिकारी (डीएम) की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट के आधार पर सड़क पर बने पिलर और पक्के अवैध निर्माणों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि सीधे तौर पर आदेशों का उल्लंघन है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही पक्षों को कंप्लायंस एफिडेविट (अनुपालन शपथपत्र) दाखिल करने के लिए अगली सुनवाई तक का समय दे दिया है। अब इस चर्चित प्रकरण में अगली सुनवाई 4 अगस्त को मुकर्रर की गई है। इससे पहले प्रशासन को पक्के अवैध निर्माणों को हटाकर कोर्ट के समक्ष अनुपालन आख्या प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही उन्हें दुकानदारों के लिए पुनर्वास योजना को भी पेश करना होगा।
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शुक्रवार को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की डबल बेंच के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट के आदेशों के तहत की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए एक शपथपत्र दाखिल किया। दावा किया गया कि कोर्ट के पूर्व आदेशों का अनुपालन करते हुए मौके पर आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है। हालांकि, सरकार के इन दावों को पीड़ित पक्ष ने अदालत में पूरी तरह खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष दलील देते हुए दावा किया गया कि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई महज एक दिखावा है। जमीनी स्तर पर सिर्फ फड़ और रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि 28 फरवरी को जिलाधिकारी (डीएम) की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट के आधार पर सड़क पर बने पिलर और पक्के अवैध निर्माणों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि सीधे तौर पर आदेशों का उल्लंघन है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही पक्षों को कंप्लायंस एफिडेविट (अनुपालन शपथपत्र) दाखिल करने के लिए अगली सुनवाई तक का समय दे दिया है। अब इस चर्चित प्रकरण में अगली सुनवाई 4 अगस्त को मुकर्रर की गई है। इससे पहले प्रशासन को पक्के अवैध निर्माणों को हटाकर कोर्ट के समक्ष अनुपालन आख्या प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही उन्हें दुकानदारों के लिए पुनर्वास योजना को भी पेश करना होगा।
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