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आगरा कथा: अंग्रेज कलक्टर के नाम पर पड़ा बेलनगंज, अब मिलता है ये सामान
Sun, 03 Jan 2021 01:52 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 03 Jan 2021 01:52 PM IST
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आगरा में बेलनगंज
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में बेलनगंज का नाम सुनते ही ख्याल आता है कि जैसे शहर में हींग, नमक और लोहे की मंडी थी, वैसे ही इस बाजार में बेलन बिका करते होंगे लेकिन ऐसा है नहीं। इस इलाके का नाम अंग्रेजी कलक्टर मिस्टर बैल्लून के नाम पर पड़ा। बैल्लूनगंज बाद में बैल्लनगंज और फिर बेलनगंज कहा जाने लगा।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे बताते हैं कि यह इलाका मुगलकाल में ही आबाद हो गया था लेकिन तब इसका नाम मुहल्ला रफीउद्दीन चौक था। अंग्रेजों के समय में नाम बदल दिया गया। बेलनगंज में सूरजभान के फाटक की बड़ी अहमियत है। यह फाटक सेठ सूरजभान के नाम पर है। मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले सेठ सूरजभान का जन्म वर्ष 1810 में हुआ था। वह बड़े धर्मात्मा और दानवीर थे। बेलनगंज आज कारोबार का बड़ा केंद्र है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का कारोबार होता है। 500 से ज्यादा दुकानें हैं।
कांग्रेसी बनाते थे रणनीति
जंग ए आजादी के दौरान कांग्रेसी बेलनगंज में अपनी रणनीति बनाते थे। यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन होते थे और जुलूस निकाले जाते थे। विदेशी कपड़ों की होली भी जलाई जाती थी।
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हमारी धरोहर आगरा कथा: जानिए शहर की नाई की मंडी का इतिहास
व्यापार का प्रमुख केंद्र था आगरा
राजकिशोर राजे ने बताया कि मुगलिया दौर में आगरा व्यापार का बड़ा केंद्र रहा। अकबर के समय में देश का ही नहीं, एशिया के प्रमुख बाजार लाहौर और आगरा थे। अकबर के वजीर ए आजम रहे अबुल फजल ने भी इसका वर्णन किया है। दरी-गलीचे, शॉल, मसाले, हाथी दांत, सूती वस्त्र, लोहे के हथियार का कारोबार होता था। आगरा और सीकरी में सिक्कों की टकसालें थीं।
मंडियां ही नहीं, गंज और हाई भी
इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया कि व्यापार को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए अकबर के समय सिर्फ मंडियों की ही स्थापना नहीं की गई, बल्कि हाई और गंज भी बनाए गए। हाई ऐसी जगह होती थी जहां साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक बाजार लगते थे, जैसे नुनिहाई। इसी तरह गंज संभवत: वे स्थान थे, जहां सामान का भंडारण किया जाता था, जैसे ताजगंज, बेलनगंज, शाहगंज, आलमगंज, मोतीगंज।
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इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे बताते हैं कि यह इलाका मुगलकाल में ही आबाद हो गया था लेकिन तब इसका नाम मुहल्ला रफीउद्दीन चौक था। अंग्रेजों के समय में नाम बदल दिया गया। बेलनगंज में सूरजभान के फाटक की बड़ी अहमियत है। यह फाटक सेठ सूरजभान के नाम पर है। मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले सेठ सूरजभान का जन्म वर्ष 1810 में हुआ था। वह बड़े धर्मात्मा और दानवीर थे। बेलनगंज आज कारोबार का बड़ा केंद्र है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का कारोबार होता है। 500 से ज्यादा दुकानें हैं।
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कांग्रेसी बनाते थे रणनीति
जंग ए आजादी के दौरान कांग्रेसी बेलनगंज में अपनी रणनीति बनाते थे। यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन होते थे और जुलूस निकाले जाते थे। विदेशी कपड़ों की होली भी जलाई जाती थी।
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व्यापार का प्रमुख केंद्र था आगरा
राजकिशोर राजे ने बताया कि मुगलिया दौर में आगरा व्यापार का बड़ा केंद्र रहा। अकबर के समय में देश का ही नहीं, एशिया के प्रमुख बाजार लाहौर और आगरा थे। अकबर के वजीर ए आजम रहे अबुल फजल ने भी इसका वर्णन किया है। दरी-गलीचे, शॉल, मसाले, हाथी दांत, सूती वस्त्र, लोहे के हथियार का कारोबार होता था। आगरा और सीकरी में सिक्कों की टकसालें थीं।
मंडियां ही नहीं, गंज और हाई भी
इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया कि व्यापार को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए अकबर के समय सिर्फ मंडियों की ही स्थापना नहीं की गई, बल्कि हाई और गंज भी बनाए गए। हाई ऐसी जगह होती थी जहां साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक बाजार लगते थे, जैसे नुनिहाई। इसी तरह गंज संभवत: वे स्थान थे, जहां सामान का भंडारण किया जाता था, जैसे ताजगंज, बेलनगंज, शाहगंज, आलमगंज, मोतीगंज।