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केदारनाथ मंदिर पर लगाई सिलिकॉन की परत
अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:55 PM IST
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केदारनाथ्ा मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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700 किमी दूर 3500 मीटर की ऊंचाई पर केदारनाथ के प्रतिकूल मौसम में आगरा एएसआई के अधिकारी मंदिर के संरक्षण में जुटे हैं। प्रकृतिक आपदा के तीन साल बाद मंदिर की केमिकल क्लीनिंग के लिए आगरा के एएसआई केमिकल ब्रांच के दो अधिकारी जुटे हुए हैं। प्राचीन शिव मंदिर की दीवारों पर सिलिकॉन और प्रिजरवेटिव की परत चढ़ाकर संरक्षण किया जा रहा है।
एएसआई आगरा केमिकल ब्रांच के सहायक रसायनविद डा. सुग्रीव सिंह मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों की केमिकल से सफाई कर 15 दिन बाद लौटे हैं। छह महीने बर्फ में दबे रहने और हर दिन बारिश से मंदिर की दीवारों पर न केवल काई जम चुकी थी, बल्कि वेजीटेशन भी होने लगा था। पाड़ बांधकर सिलिकॉन की तरह अन्य प्रिजरवेटिव की पतली परत लगाई जा रही है, ताकि वेजीटेशन न लगें।
बता दें कि आपदा के बाद सबसे पहले पहुंची टीम में आगरा एएसआई में तैनात रहे सहायक पुरातत्वविद डा. आरके सिंह ही केदारनाथ पहुंचे थे।
हादसा रोकने को बनाई तीन स्तरीय दीवार
16 जून 2013 को केदारनाथ में हादसे के बाद एएसआई और आईआईटी मद्रास ने निरीक्षण के बाद भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने को आधा दर्जन कार्यों की संस्तुति की थीं। इनमें मंदिर के पीछे त्रिस्तरीय ढलवां दीवार बनाने, 300 मीटर दायरे में निर्माण प्रतिबंधित करने, एएसआई द्वारा संरक्षित करने, दीवारों पर ड्रिलिंग न करने, दोनों ओर नदी धारा में निर्माण न करने और दरके पत्थरों को निकालकर दोबारा जुड़वाने की सिफारिश की गई थीं। अब तक मंदिर के ठीक पीछे अर्द्धचंद्राकार 15 फुट ऊंची दीवार बनाई जा चुकी है। मंदिर की ओर कंक्रीट की दीवार है तो गांधी सरोवर की ओर लोहे के पाइप और तारों की दीवार है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कराया केमिकल ट्रीटमेंट
एएसआई आगरा केमिकल ब्रांच से इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य परिसर में केमिकल ट्रीटमेंट कराया गया था। 150 साल पूरे होने के मौके पर राष्ट्रपति के कार्यक्रम से पहले ही ट्रीटमेंट संपन्न हुआ था। न्यायाधीशों की बेंच ने विशेष रूप से आगरा केमिकल ब्रांच को यह जिम्मा सौंपा था। हाईकोर्ट ने एएसआई आगरा को प्रशस्ति पत्र भी भेजा है।
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एएसआई आगरा केमिकल ब्रांच के सहायक रसायनविद डा. सुग्रीव सिंह मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों की केमिकल से सफाई कर 15 दिन बाद लौटे हैं। छह महीने बर्फ में दबे रहने और हर दिन बारिश से मंदिर की दीवारों पर न केवल काई जम चुकी थी, बल्कि वेजीटेशन भी होने लगा था। पाड़ बांधकर सिलिकॉन की तरह अन्य प्रिजरवेटिव की पतली परत लगाई जा रही है, ताकि वेजीटेशन न लगें।
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बता दें कि आपदा के बाद सबसे पहले पहुंची टीम में आगरा एएसआई में तैनात रहे सहायक पुरातत्वविद डा. आरके सिंह ही केदारनाथ पहुंचे थे।
हादसा रोकने को बनाई तीन स्तरीय दीवार
16 जून 2013 को केदारनाथ में हादसे के बाद एएसआई और आईआईटी मद्रास ने निरीक्षण के बाद भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने को आधा दर्जन कार्यों की संस्तुति की थीं। इनमें मंदिर के पीछे त्रिस्तरीय ढलवां दीवार बनाने, 300 मीटर दायरे में निर्माण प्रतिबंधित करने, एएसआई द्वारा संरक्षित करने, दीवारों पर ड्रिलिंग न करने, दोनों ओर नदी धारा में निर्माण न करने और दरके पत्थरों को निकालकर दोबारा जुड़वाने की सिफारिश की गई थीं। अब तक मंदिर के ठीक पीछे अर्द्धचंद्राकार 15 फुट ऊंची दीवार बनाई जा चुकी है। मंदिर की ओर कंक्रीट की दीवार है तो गांधी सरोवर की ओर लोहे के पाइप और तारों की दीवार है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कराया केमिकल ट्रीटमेंट
एएसआई आगरा केमिकल ब्रांच से इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य परिसर में केमिकल ट्रीटमेंट कराया गया था। 150 साल पूरे होने के मौके पर राष्ट्रपति के कार्यक्रम से पहले ही ट्रीटमेंट संपन्न हुआ था। न्यायाधीशों की बेंच ने विशेष रूप से आगरा केमिकल ब्रांच को यह जिम्मा सौंपा था। हाईकोर्ट ने एएसआई आगरा को प्रशस्ति पत्र भी भेजा है।