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Agra News: विधवा को बीमा के 4 लाख देने का कोर्ट ने दिया आदेश, 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के भी मिलेंगे, स्थायी लोक अदालत ने सुनाया फैसला
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कासगंज। स्थायी लोक अदालत ने कंपनी के बीमा न दिए जाने के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतक की पत्नी को बीमा के 4 लाख रुपये के साथ ही क्षतिपूर्ति के 20 हजार रुपये देने काभी आदेश दिया है।
मिर्जापुर निवासी पप्पू ने एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी से 17 मार्च 2020 को 4 लाख रुपये का बीमा कराया था। इसकी प्रीमियम राशि 200 रुपये खाते से भुगतान की गई। सड़क दुर्घटना में 4 जून 2020 को उनकी मौत हो गई। पति की मौत की सूचना पत्नी हेमलता ने बीमा कंपनी को दी। साथ ही मांगे गए प्रपत्र बीमा कंपनी को उपलब्ध करा दिए। बीमा न मिलने पर 20 अक्तूबर 2021 को नोटिस के माध्यम से बीमा कंपनी को बीमा की राशि न मिलने के संबंध में अवगत कराया गया। इसके बाद भी बीमा की राशि नहीं दी गई।
इस पर पीड़िता ने अस्थायी लोक अदालत में वाद दायर करते हुए बीमा की 4 लाख रुपये की धनराशि ब्याज सहित एवं क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की। लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य बसंत कुमार और डॉ. सपना अग्रवाल ने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को 4 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित वाद संस्थित होने की तारीख से भुगतान तिथि तक देने के साथ ही 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने का आदेश दिया। कंपनी को 30 दिन के भीतर यह धनराशि स्थायी लोक अदालत के खाते में जमा करनी होगी।
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मिर्जापुर निवासी पप्पू ने एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी से 17 मार्च 2020 को 4 लाख रुपये का बीमा कराया था। इसकी प्रीमियम राशि 200 रुपये खाते से भुगतान की गई। सड़क दुर्घटना में 4 जून 2020 को उनकी मौत हो गई। पति की मौत की सूचना पत्नी हेमलता ने बीमा कंपनी को दी। साथ ही मांगे गए प्रपत्र बीमा कंपनी को उपलब्ध करा दिए। बीमा न मिलने पर 20 अक्तूबर 2021 को नोटिस के माध्यम से बीमा कंपनी को बीमा की राशि न मिलने के संबंध में अवगत कराया गया। इसके बाद भी बीमा की राशि नहीं दी गई।
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इस पर पीड़िता ने अस्थायी लोक अदालत में वाद दायर करते हुए बीमा की 4 लाख रुपये की धनराशि ब्याज सहित एवं क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की। लोक अदालत के अध्यक्ष चंद्र शेखर प्रसाद, सदस्य बसंत कुमार और डॉ. सपना अग्रवाल ने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को 4 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित वाद संस्थित होने की तारीख से भुगतान तिथि तक देने के साथ ही 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने का आदेश दिया। कंपनी को 30 दिन के भीतर यह धनराशि स्थायी लोक अदालत के खाते में जमा करनी होगी।
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