{"_id":"618804b8a3bbe06a0d68ac5d","slug":"kasganj-jail-is-sensitive-there-is-no-adequate-security-arrangements-kasganj-news-agr5138725160","type":"story","status":"publish","title_hn":"संवेदनशील है कासगंज जेल, सुरक्षा के नहीं है पुख्ता इंतजाम्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संवेदनशील है कासगंज जेल, सुरक्षा के नहीं है पुख्ता इंतजाम्र
विज्ञापन
कासगंज की जिला जेल
- फोटो : KASGANJ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। फतेहगढ़ जेल में हुए बवाल से कासगंज में भी सबक लेेने की जरूरत है। जिले की जेल भी संवेदनशील है। यहां जेल परिसर में वारदातें भी हो चुकी हैं। यहां पर्याप्त मात्रा में बंदीरक्षक नहीं हैं। यहां तक कि तमाम सीसीटीवी कैमरे भी खराब हैं।
कैदी की मौत के बाद फतेहगढ़ जेल में जमकर बवाल हुआ है। पथराव, फायरिंग, आगजनी की घटना हुई। यह घटना स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बरतने का संकेत देती है। क्योंकि जिला जेल मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है और यह तराई इलाके में है। जेल से सोरोंजी थाने की दूरी भी लगभग 25 किलोमीटर है। ऐसे में जेल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की जरूरत है। क्योंकि जेल में पर्याप्त मात्रा में बंदी रक्षक नहीं है और सीसीटीवी कैमरे भी खराब है।
लगभग 50 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। इसके संबंध में जेल प्रशासन शासन को पत्र भेज चुका है। हालांकि अभी शासन स्तर से सीसीटीवी कैमरों को सही करने के लिए टीम नहीं आई है। संवेदनशीलता तो इसलिए और बढ़ रही है कि यहां पूर्व में घटनाएं हो चुकी हैं।
विज्ञापन
स्थानीय जेल में हुईं घटनाएं
घटना 01 : 26 मई 2018 में दो बंदी रक्षकों पर गांव पचलाना के पूर्व प्रधान नत्थू सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर हमला किया था। जिसमें बंदी रक्षक भुवनेश भारद्वाज और संजीव सारस्वत घायल हुए थे। जेल परिसर के बाहर इन पर हमला बोला गया और जेल गेट तक इनके साथ मारपीट की गई।
घटना 02 : बीते 8 अक्तूबर को जेल के बंदीरक्षक अजीत गौतम को जेल परिसर के बाहर पेट में गोली मारी गई। खून से लथपथ बंदीरक्षक पचलाना पुलिस चौकी पहुंचा। आरोप कैंटीन संचालक दिनेश पर लगाया गया। इस घटना के बाद से जेल परिसर के आसपास दहशत का माहौल बना।
जिला जेल की संवेदनशीलता इस लिए और बढ़ जाती है कि यहां कई माफिया दूसरे जिलों से हाई सिक्योरिटी बैरक में रखे गए हैं। फर्रुखाबाद, आजमगढ़ सहित अन्य जिलों के पांच कुख्यात यहां बंद हैं। इसको लेकर भी और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत दिख रही है।
विज्ञापन
कैदी की मौत के बाद फतेहगढ़ जेल में जमकर बवाल हुआ है। पथराव, फायरिंग, आगजनी की घटना हुई। यह घटना स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बरतने का संकेत देती है। क्योंकि जिला जेल मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है और यह तराई इलाके में है। जेल से सोरोंजी थाने की दूरी भी लगभग 25 किलोमीटर है। ऐसे में जेल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की जरूरत है। क्योंकि जेल में पर्याप्त मात्रा में बंदी रक्षक नहीं है और सीसीटीवी कैमरे भी खराब है।
विज्ञापन
लगभग 50 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। इसके संबंध में जेल प्रशासन शासन को पत्र भेज चुका है। हालांकि अभी शासन स्तर से सीसीटीवी कैमरों को सही करने के लिए टीम नहीं आई है। संवेदनशीलता तो इसलिए और बढ़ रही है कि यहां पूर्व में घटनाएं हो चुकी हैं।
विज्ञापन
स्थानीय जेल में हुईं घटनाएं
घटना 01 : 26 मई 2018 में दो बंदी रक्षकों पर गांव पचलाना के पूर्व प्रधान नत्थू सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर हमला किया था। जिसमें बंदी रक्षक भुवनेश भारद्वाज और संजीव सारस्वत घायल हुए थे। जेल परिसर के बाहर इन पर हमला बोला गया और जेल गेट तक इनके साथ मारपीट की गई।
घटना 02 : बीते 8 अक्तूबर को जेल के बंदीरक्षक अजीत गौतम को जेल परिसर के बाहर पेट में गोली मारी गई। खून से लथपथ बंदीरक्षक पचलाना पुलिस चौकी पहुंचा। आरोप कैंटीन संचालक दिनेश पर लगाया गया। इस घटना के बाद से जेल परिसर के आसपास दहशत का माहौल बना।
जिला जेल की संवेदनशीलता इस लिए और बढ़ जाती है कि यहां कई माफिया दूसरे जिलों से हाई सिक्योरिटी बैरक में रखे गए हैं। फर्रुखाबाद, आजमगढ़ सहित अन्य जिलों के पांच कुख्यात यहां बंद हैं। इसको लेकर भी और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत दिख रही है।