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कार्तिक पूर्णिमाः हरि की पदी के घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर गंगे की हुई जयकार
Tue, 01 Dec 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 01 Dec 2020 12:06 AM IST
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हरि की पदी में स्नान करते श्रद्घालु
- फोटो : अमर उजाला
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कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को गंगाघाट हर हर गंगे के स्वर से गुंजायमान हो उठे। दूर दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु गंगास्नान के लिए घाटों पर पहुंचे। सोरों के हरिपदी, लहरा, कछला व कादरगंज गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना की और दान कर पुण्य लाभ कमाया। परिवार की खुशहाली के लिए साधू संतों से आशीष लिया।
सोमवार भोर से ही गंगाघाट गुंजायमान दिखाई दे रहे थे। राजस्थान, मध्यप्रदेश राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश के दूर-दराज इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाघाटों पर पहुंचे। मां गंगा के जल में दूध चढ़ाकर पूजा अर्चना की। घाटों पर दीप जलाए। श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया। संत आश्रमों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन कराया।
सोरों में हरिपदी के परिक्रमा मार्ग पर बैठे साधू संतों को वस्त्र दानकर भोजन कराया। तीर्थनगरी के मंदिरों में देव दर्शन किए। भगवान आदि वराह, रघुनाथ जी, सिद्धि हनुमान, सोमेश्वर, बालाजी दरबार, द्वारिकाधीश, पंच महाशक्ति मंदिर, 84 घंटे वाली माता मंदिर, मानस मंदिर, बटुकनाथ, योगेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
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सोमवार भोर से ही गंगाघाट गुंजायमान दिखाई दे रहे थे। राजस्थान, मध्यप्रदेश राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश के दूर-दराज इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाघाटों पर पहुंचे। मां गंगा के जल में दूध चढ़ाकर पूजा अर्चना की। घाटों पर दीप जलाए। श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया। संत आश्रमों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन कराया।
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सोरों में हरिपदी के परिक्रमा मार्ग पर बैठे साधू संतों को वस्त्र दानकर भोजन कराया। तीर्थनगरी के मंदिरों में देव दर्शन किए। भगवान आदि वराह, रघुनाथ जी, सिद्धि हनुमान, सोमेश्वर, बालाजी दरबार, द्वारिकाधीश, पंच महाशक्ति मंदिर, 84 घंटे वाली माता मंदिर, मानस मंदिर, बटुकनाथ, योगेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
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भीड़ की थी रौनक, लेकिन मेला न लगने से मायूसी
कादरगंजघाट पर कार्तिक पूर्णिमा से पहले ही हर साल ककोड़ा मेले का आयोजन होता था। बदायूं जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं रहतीं थीं, तो कासगंज की ओर के घाट भी गुलजार रहते थे। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल मेले में भीड़ का सैलाब उमड़ता था, लेकिन इस बार कोरोना काल के कारण मेले का आयोजन नहीं हो रहा है। घाटों पर स्नान को पहुंचे श्रद्धालुओं में मायूसी दिखी।
स्नान के बाद पूरी की परंपरा
कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के बाद सोरों में लोगों ने परंपरा का निर्वहन किया। परंपरा है कि लोहे के बने बर्तन तवा, कढ़ाई आदि श्रद्धालु खरीद कर ले जाते हैं। बाजार में श्रद्धालुओं की आवक से बर्तनों की दुकानों पर रौनक दिखाई दी।
बच्चों का कराया मुंडन संस्कार
गंगाघाटों पर स्नान को पहुंचे श्रद्धालुओं ने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया। तीर्थपुरोहितों ने विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना के साथ मुंडन संस्कार कराए। श्रद्धालुओं ने पुरोहितों को दान दक्षिणा दी।
मौनी आश्रम में हुआ भंडारा
कादरगंज घाट के मौनी आश्रम पर भी श्रद्धालुओं ने भंडारा आयोजित कराया। यहां लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी कर प्रसाद ग्रहण किया। घाट पर माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
कादरगंजघाट पर कार्तिक पूर्णिमा से पहले ही हर साल ककोड़ा मेले का आयोजन होता था। बदायूं जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं रहतीं थीं, तो कासगंज की ओर के घाट भी गुलजार रहते थे। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल मेले में भीड़ का सैलाब उमड़ता था, लेकिन इस बार कोरोना काल के कारण मेले का आयोजन नहीं हो रहा है। घाटों पर स्नान को पहुंचे श्रद्धालुओं में मायूसी दिखी।
स्नान के बाद पूरी की परंपरा
कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के बाद सोरों में लोगों ने परंपरा का निर्वहन किया। परंपरा है कि लोहे के बने बर्तन तवा, कढ़ाई आदि श्रद्धालु खरीद कर ले जाते हैं। बाजार में श्रद्धालुओं की आवक से बर्तनों की दुकानों पर रौनक दिखाई दी।
बच्चों का कराया मुंडन संस्कार
गंगाघाटों पर स्नान को पहुंचे श्रद्धालुओं ने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया। तीर्थपुरोहितों ने विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना के साथ मुंडन संस्कार कराए। श्रद्धालुओं ने पुरोहितों को दान दक्षिणा दी।
मौनी आश्रम में हुआ भंडारा
कादरगंज घाट के मौनी आश्रम पर भी श्रद्धालुओं ने भंडारा आयोजित कराया। यहां लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी कर प्रसाद ग्रहण किया। घाट पर माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।