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कानपुर मुठभेड़ः डेढ़ साल में बिखरे परिवार के सपने, अभाव में पढ़कर बने सिपाही, राजमिस्त्री पिता का बढ़ाया मान

Sat, 04 Jul 2020 12:12 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 04 Jul 2020 12:12 AM IST
सार

  • पोखर पांडेय का रहने वाला था जाबाज बबलू, गांव में गम और गुस्सा
  • गांववाले बोले, अब कुख्यात विकास दुबे और उसके गैंग का सफाया होना चाहिए

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Kanpur Encounter Family Story Of Fatehabad Police Constable Babalu Martyred
शहीद सिपाही बबलू कुमार का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के कमरू गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों की गोली से शहीद हुए फतेहाबाद के सिपाही बबलू कुमार की मौत से परिवार के साथ गांव और रिश्तेदार भी सदमे में है। उसके सिपाही बनने परिवार को गरीबी बनने की उम्मीद जगी थी लेकिन डेढ़ साल की नौकरी के बाद ही वह दुनिया से चला गया।
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बबलू के परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं है। उनके पिता छोटे लाल के पास खेत नहीं हैं। चार भाइयों में बबलू तीसरे नंबर का था। पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं। बबलू के बड़े भाई दिनेश भी उनके साथ ही काम करते हैं।
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छोटे भाई उमेश ने इस वर्ष 12वीं की परीक्षा पास की है। बबलू के पांच बहनें हैं। बबलू की पुलिस में नौकरी लगने के बाद परिवार को उम्मीद की किरण जागी थी। बबलू दिसंबर 2018 में पुलिस कांस्टेबल के तौर पर भर्ती हुआ था। कानपुर में ही ट्रेनिंग की। वहीं तैनाती भी मिली। वर्तमान में वह बिठूर थाने में तैनात था।
 

अभाव में रहकर की पढ़ाई, बना सिपाही
मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही बबलू कुमार ने अभाव में जीवन व्यतीत किया। पर, वे शुरू से ही मेधावी थे और 2018 में पुलिस में भर्ती हो गए। उनके गांव के रहने वाले राकेश ने बताया कि  बबलू मिलनसार होने के साथ पढ़ने में भी होशियार था।

दसवीं कक्षा से ही उसने सिपाही बनने की ठान रखी थी। पढ़ाई के साथ सुबह को दौड़ लगाने जाता था। गांव के युवकों के साथ उसने तैयारी की। वह कहता था कि एक दिन गांव का नाम रोशन करूंगा। उसके सिपाही बनने पर पूरे गांव में खुशी मनाई गई थी।

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तहेरा भाई पीएसी में

बबलू के ताऊ का पुत्र जितेंद्र भी उसके बाद पीएसी में भर्ती हुआ है जो इस समय फतेहगढ़ में तैनात है। गांववालों का कहना है कि बबलू बहुत मिलनसार था। वह जब भी छुट्टी आता था, सबसे सम्मान देकर मिलता था। अब सरकार और पुलिस को बदमाशों का खात्मा करना चाहिए। तभी बबलू के बलिदान का बदला पूरा होगा।
 
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