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कैदियों की रिहाई पर शासन में माथापच्ची
कैदियों की रिहाई पर शासन में माथापच्ची
Updated Thu, 22 Sep 2016 12:53 AM IST
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JAIL SHIMLA
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सेंट्रल जेल में बंद 350 कैदियों की रिहाई के लिए शासन के अधिकारी लगातार माथापच्ची कर रहे हैं। यह कैदी उम्रकैद में 14 साल से अधिक जेल में काट चुके हैं। शासन के सामने दिक्कत यह है कि इनमें से अधिकांश के आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट इनके खिलाफ गई है। अब पुलिस की रिपोर्ट फिर से मंगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
जेल के 2050 कैदियों ने 18 दिन तक भूख हड़ताल की थी। कैदियों को मनाने के लिए कारागार महकमे के राज्यमंत्री रामपाल रामवंशी और काबीना मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया को सेंट्रल जेल आना पड़ा था। रामूवालिया ने आश्वासन दिया था कि रिहाई के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकाला जाएगा। इसके बाद ही शासन के अधिकारियों ने तमाम कैदियों की फाइल कई कई बार पलटकर देखी हैं ।
जेल सूत्रों ने बताया कि इसमें सबसे बड़ी अड़चन पुलिस की रिपोर्ट से आ रही है। ज्यादातर मामलों में पुलिस ने रिपोर्ट दी है कि कैदी के घर पहुंचने पर तनाव हो सकता है। इससे पीड़ित पक्ष को परेशानी हो सकती है। कई रिपोर्ट में बुजुर्ग कैदियों के बारे में कहा गया है कि भले ही वह खुद अपराध न कर पाएं, लेकिन साजिश तो रच ही सकता है।
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इसके चलते अब नए सिरे से पुलिस रिपोर्ट मंगाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर हर रिपोर्ट आला अफसरों की निगरानी में तैयार की जाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि एडीजी जेल और प्रमुख सचिव कारागार की मीटिंग हो चुकी हैं। जल्द ही कोई न कोई निर्णय हो सकता है।
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जेल के 2050 कैदियों ने 18 दिन तक भूख हड़ताल की थी। कैदियों को मनाने के लिए कारागार महकमे के राज्यमंत्री रामपाल रामवंशी और काबीना मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया को सेंट्रल जेल आना पड़ा था। रामूवालिया ने आश्वासन दिया था कि रिहाई के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकाला जाएगा। इसके बाद ही शासन के अधिकारियों ने तमाम कैदियों की फाइल कई कई बार पलटकर देखी हैं ।
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जेल सूत्रों ने बताया कि इसमें सबसे बड़ी अड़चन पुलिस की रिपोर्ट से आ रही है। ज्यादातर मामलों में पुलिस ने रिपोर्ट दी है कि कैदी के घर पहुंचने पर तनाव हो सकता है। इससे पीड़ित पक्ष को परेशानी हो सकती है। कई रिपोर्ट में बुजुर्ग कैदियों के बारे में कहा गया है कि भले ही वह खुद अपराध न कर पाएं, लेकिन साजिश तो रच ही सकता है।
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इसके चलते अब नए सिरे से पुलिस रिपोर्ट मंगाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर हर रिपोर्ट आला अफसरों की निगरानी में तैयार की जाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि एडीजी जेल और प्रमुख सचिव कारागार की मीटिंग हो चुकी हैं। जल्द ही कोई न कोई निर्णय हो सकता है।