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अब मकान बनवाने के लिए भी पेरोल मांग रहे कैदी
अब मकान बनवाने के लिए भी पेरोल मांग रहे कैदी
Updated Sun, 04 Dec 2016 12:23 AM IST
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जेलों में बंद कैदियों को अब मकान बनवाने और खेती करने के लिए भी पैरोल चाहिए। उनमें यह ख्वाहिश पैरोल पर प्रदेश सरकार का नरम रुख देने के बाद जगी है। इसका ऐसा असर हुआ है कि पैरोल मांगने वाले कैदियों की संख्या सात से आठ गुना तक बढ़ गई है। सेंट्रल जेल में पहले एक महीने में पांच-छह प्रार्थना पत्र आते थे, अब 35 से 40 आ रहे हैं। पहले के मुकाबले पैरोल आसानी से मिल भी रहा है।
सितंबर से नवंबर तक तीनों महीनों में 35 से 40 प्रार्थना पत्र पेरोल के लिए आए हैं। इनमें बुलंदशहर और झांसी के दो कैदियों ने मकान बनवाने के लिए पेरोल मांगा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली के कैदियों ने फसल की देखरेख के लिए पेरोल का प्रार्थना पत्र दिया है। इन्हें दो दो महीने का पेरोल चाहिए।
दरअसल, 72 घंटे तक का पेरोल डीएम के स्तर से मिल जाता था। इससे अधिक के लिए फाइल शासन को भेजी जाती है। सेंट्रल जेल के रिकार्ड के मुताबिक सभी प्रार्थना पत्र शासन को जा चुके हैं। जेल के अधिकारियों की मानें तो पेरोल मांगने वाले कैदियों की संख्या इसलिए बढ़ी है क्योंकि अगस्त में शासन ने निर्देश दिए कि पेरोल देने में नरम रुख अपनाया जाए।
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किसी अपने की मृत्यु हो जाने या रिश्तेदार की शादी के लिए तो बहुत ही आसानी से पेरोल मिल रहा है। सेंट्रल जेल में बंद झांसी के अतर सिंह ने बेटी की शादी के लिए पेरोल मांगा है।
किश्तों में हो रही कैदियों की रिहाई
आगरा। सेंट्रल जेल में सिंतबर में ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल की गई थी जो उम्र कैद की सजा में 14 साल या इससे अधिक जेल में बिता चुके हैं। कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया को कैदियों की बात सुनने के लिए सेंट्रल जेल आना पड़ा था। जेल में ऐसे 350 कैदी बताए जाते हैं। इनकी एक साथ रिहाई तो नहीं हो पा रही। लेकिन धीरे धीरे एक एक दो दो करके रिहाई हो रही है। जेल अधिकारियों का कहना है कि इसकी प्रक्रिया है। जिन कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, उन्हें शासन स्तर से रिहा किया जाता है।
पेरोल केलिए कैदियों के प्रार्थना पत्र बढ़े हैं। सभी प्रार्थना पत्र प्रशासन और शासन को भेजे जा रहे हैं - एसएचएम रिजवी ( जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल )
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सितंबर से नवंबर तक तीनों महीनों में 35 से 40 प्रार्थना पत्र पेरोल के लिए आए हैं। इनमें बुलंदशहर और झांसी के दो कैदियों ने मकान बनवाने के लिए पेरोल मांगा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली के कैदियों ने फसल की देखरेख के लिए पेरोल का प्रार्थना पत्र दिया है। इन्हें दो दो महीने का पेरोल चाहिए।
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दरअसल, 72 घंटे तक का पेरोल डीएम के स्तर से मिल जाता था। इससे अधिक के लिए फाइल शासन को भेजी जाती है। सेंट्रल जेल के रिकार्ड के मुताबिक सभी प्रार्थना पत्र शासन को जा चुके हैं। जेल के अधिकारियों की मानें तो पेरोल मांगने वाले कैदियों की संख्या इसलिए बढ़ी है क्योंकि अगस्त में शासन ने निर्देश दिए कि पेरोल देने में नरम रुख अपनाया जाए।
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किसी अपने की मृत्यु हो जाने या रिश्तेदार की शादी के लिए तो बहुत ही आसानी से पेरोल मिल रहा है। सेंट्रल जेल में बंद झांसी के अतर सिंह ने बेटी की शादी के लिए पेरोल मांगा है।
किश्तों में हो रही कैदियों की रिहाई
आगरा। सेंट्रल जेल में सिंतबर में ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल की गई थी जो उम्र कैद की सजा में 14 साल या इससे अधिक जेल में बिता चुके हैं। कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया को कैदियों की बात सुनने के लिए सेंट्रल जेल आना पड़ा था। जेल में ऐसे 350 कैदी बताए जाते हैं। इनकी एक साथ रिहाई तो नहीं हो पा रही। लेकिन धीरे धीरे एक एक दो दो करके रिहाई हो रही है। जेल अधिकारियों का कहना है कि इसकी प्रक्रिया है। जिन कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, उन्हें शासन स्तर से रिहा किया जाता है।
पेरोल केलिए कैदियों के प्रार्थना पत्र बढ़े हैं। सभी प्रार्थना पत्र प्रशासन और शासन को भेजे जा रहे हैं - एसएचएम रिजवी ( जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल )