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झोलाछाप एक सिरिंज से ही तीन मरीजों को लगा रहा था इंजेक्शन
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पिनाहट। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को बसई अरेला के गांव स्याहीपुरा में बंगाली क्लीनिक सील की है। यहां झोलाछाप एक सिरिंज से बुखार के दो-तीन मरीजों को इंजेक्शन लगाता मिला।
सीएचसी पिनाहट के अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि शाम के करीब सात बजे स्याहीपुरा स्थित बंगाली क्लीनिक पर पहुंचे। यहां पर बंगाली बुखार के मरीज का इलाज करते मिला। अलमारी में तीन इंजेक्शन आधे-आधे भरे हुए थे। सिरिंज में आधे-आधे इंजेक्शन भरे होने पर वह कुछ नहीं बोला। सख्ती पर उसने बताया कि एक सिरिंज से दो-तीन मरीजों को लगाता है। डस्टबिन में भी कई सिरिंज और खाली वाइल पड़ी हुई थीं। उससे चिकित्सकीय डिग्री, क्लीनिक का लाइसेंस और बायो मेडिकल वेस्ट की लॉगबुक मांगी। इनमें से वह कुछ भी नहीं दिखा पाया। आसपास के लोगों से पता चला कि यह चार-पांच साल पहले से दुकान चला रहा है। दो महीने से यहां मरीजों की भारी भीड़ रहती है। दुकान सील करते हुए इसे नोटिस दिया है। इसमें चिकित्सकीय डिग्री, क्लीनिक का लाइसेंस समेत अन्य प्रमाण पत्र तलब किए हैं। तीन दिन में उपलब्ध न कराने पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
सीएचसी प्रभारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि सिरिंज का दो-तीन मरीजों पर इस्तेमाल करने से एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक है। अगर किसी मरीज में यह बीमारी हैं और उसकी संक्रमित सुई से दूसरे को लगाने से वह भी संक्रमित हो जाएगा। झोलाछाप इलाज के नाम पर जानलेवा मर्ज भी बांट रहा था।
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सीएचसी पिनाहट के अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि शाम के करीब सात बजे स्याहीपुरा स्थित बंगाली क्लीनिक पर पहुंचे। यहां पर बंगाली बुखार के मरीज का इलाज करते मिला। अलमारी में तीन इंजेक्शन आधे-आधे भरे हुए थे। सिरिंज में आधे-आधे इंजेक्शन भरे होने पर वह कुछ नहीं बोला। सख्ती पर उसने बताया कि एक सिरिंज से दो-तीन मरीजों को लगाता है। डस्टबिन में भी कई सिरिंज और खाली वाइल पड़ी हुई थीं। उससे चिकित्सकीय डिग्री, क्लीनिक का लाइसेंस और बायो मेडिकल वेस्ट की लॉगबुक मांगी। इनमें से वह कुछ भी नहीं दिखा पाया। आसपास के लोगों से पता चला कि यह चार-पांच साल पहले से दुकान चला रहा है। दो महीने से यहां मरीजों की भारी भीड़ रहती है। दुकान सील करते हुए इसे नोटिस दिया है। इसमें चिकित्सकीय डिग्री, क्लीनिक का लाइसेंस समेत अन्य प्रमाण पत्र तलब किए हैं। तीन दिन में उपलब्ध न कराने पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि सिरिंज का दो-तीन मरीजों पर इस्तेमाल करने से एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक है। अगर किसी मरीज में यह बीमारी हैं और उसकी संक्रमित सुई से दूसरे को लगाने से वह भी संक्रमित हो जाएगा। झोलाछाप इलाज के नाम पर जानलेवा मर्ज भी बांट रहा था।
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