फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Janmashtami Special Story Know About Lord Krishna Birth on Ashtmi

Janmashtami 2020: जानिये भगवान ने अष्टमी पर ही क्यों लिया जन्म और किसके वंशज हैं श्रीकृष्ण

Tue, 11 Aug 2020 10:13 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 11 Aug 2020 10:13 AM IST
सार

  • सात जन्मों के पापों को नष्ट करता जन्माष्टमी व्रत 
  • व्रत में इन बातों का रखें ध्यान 

विज्ञापन
Janmashtami Special Story Know About Lord Krishna Birth on Ashtmi
श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित भागवत भवन में स्थापित श्रीकृष्ण का विग्रह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

द्वापर में चंद्रवंशी श्रीकृष्ण ने अष्टमी पर ही क्यों जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म के साथ जुड़ी इस घटना का उल्लेख धर्मग्रंथों में भी देखने को मिलता है। पंडित अमित भारद्वाज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने बुधवार को रोहिणी नक्षत्र, रात्रि एवं अष्टमी को जन्म लिया था। इसलिए श्रीकृष्ण चंद्रवंशी हैं, अर्थात चंद्रदेव के वंशज हैं। 
विज्ञापन


पंडित अमित भारद्वाज बताया कि चंद्रमा का पुत्र बुध है। चंद्र वंश में पुत्रवत अवतार लेने के लिए बुधवार को चुना। रोहिणी चंद्रमा की प्रिय पत्नी व प्रिय नक्षत्र है इसी कारण जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था उस समय कृष्ण का प्रादुर्भाव हुआ। अष्टमी तिथि शक्ति का प्रतीक है। कृष्ण शक्ति से संपन्न व परब्रह्म हैं। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  Janmashtami 2020: मथुरा में आज से तीन दिन तक श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद, नंदगांव में जन्माष्टमी आज
विज्ञापन
विज्ञापन


अष्टमी तिथि पर जन्म लेने का प्रमुख कारण यही है। रात्रि में जन्म लेने का प्रमुख कारण उनका चंद्रवंशी होना है। रात्रि में अपने पूर्वज चंद्रदेव की आकाश में उपस्थिति में जन्म लेना। साथ ही चंद्रदेव की अभिलाषा कि नारायण का अपने कुल में जन्म लेने का वह स्वयं प्रत्यक्ष दर्शन कर सकें। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि कृष्ण के अवतार के समय अंतरिक्ष से पृथ्वी तक सारा वातावरण सकारात्मक हो गया।

प्रकृति, पशु-पक्षी सभी हर्षित थे। देव, ऋषि, किन्नर सभी प्रफुल्लित थे। अर्थात चहुंओर सुरम्य वातावरण बन गया। उन्होंने बताया कि धर्मग्रंथों में उल्लेख के आधार पर कहा जा सकता है कि प्रभु ने योजनाबद्ध रूप से पृथ्वी पर अवतार लिया। 

सात जन्मों के पापों को नष्ट करता जन्माष्टमी व्रत 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत लोगों के सात जन्मों के पापों को नष्ट कर देता है। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि व्रत से 1 दिन पूर्व सप्तमी तिथि को स्वल्प भोजन करें। व्रत के दिन बार-बार जलपान नहीं करें। अष्टमी तिथि को प्रात: काले ब्रह्म मुहूर्त में जग जाएं। भगवान श्रीकृष्ण के चरणों का ध्यान करें। स्नान आदि से निवृत्त होकर के संकल्प करें सकल मनोकामना सिद्धि के लिए एवं सर्व पाप क्षय के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत करूंगा।  

    

व्रत में इन बातों का रखें ध्यान 
- अष्टमी को प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में जागकर श्रीकृष्ण का ध्यान करें। 
- स्नानादि करके धर्म में तत्पर होकर व्रत रखें। 
- घर में नंद यशोदा, देवकी-वसुदेव, कृष्ण बलराम की झांकी सजाएं। 
- रात्रि 12 बजे खीरा को चीरकर गोपाल जी का जन्म करें। 
- पंचामृत बनाकर उन्हें स्नान कराकर पूजा-अर्चना व आरती करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed