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प्रधानमंत्री जनधन योजना के 32 हजार खाते क्यों हो गए बंद
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1एमएनपी-04-शहर के स्टेशन रोड स्थिति इलाहाबाद बैंक
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। हर व्यक्ति का बैंक खाता खोलने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना जिले में कारगर साबित नहीं हो सकेगी। योजना के तहत खोले गए कुल खातों के सापेक्ष 30 प्रतिशत खाते बंद हो गए। अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। बैंक प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इन खातों में लेनदेन नहीं हो सका।
वर्ष अगस्त 2014 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति का बैंक में निशुल्क खाता खोलने का लक्ष्य रखा गया था। जिले में तेजी से योजना के तहत बैंकों में नए खाते खोले गए थे। अब तक की अगर बात करें तो जिले में कुल 1.13 लाख खाते जनधन योजना के तहत खोले गए लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में खाते ऐसे थे, जिनका संचालन एक भी बार नहीं हुआ। ऐसे में पहले ये खाते नॉन एक्टिव हो गए। बैंकों ने इन खातों को शुरू कराने के लिए लोगों से केवाईसी (नो योर कस्टमर) कराने की अपील की। लेकिन इसके बाद भी कुछ खाते तो चालू हुए, लेकिन 32 हजार खातों में केवाईसी भी नहीं कराई गई। ऐसे में जिले की 131 बैंक शाखाओं में संचालित ये खाते बंद हो गए। बंद हुए खातों की संख्या की अगर कुल खातों से तुलना करें तो ये लगभग 30 प्रतिशत है। इसकी रिपोर्ट बैंकों ने मुख्यालय को भी भेजी है।
किसान सम्मान निधि से चालू हुए 20 हजार खाते
प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंकों में खोले गए खातों के बंद होने का आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता था लेकिन बीते वर्ष केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने इन खातों को संजीवनी दी है। बैंकों के रिकॉर्ड के अनुसार 20 हजार जनधन खाते किसान सम्मान निधि आने के कारण क्रियाशील हो गए हैं। हालांकि इनमें लेनदेन को आगे बढ़ाना बैंक के लिए चुनौती से कम नहीं है।
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हाईलाइट्स
-1.13 लाख खोले गए जनधन के कुल खाते।
-56966 जनधन खाते चालू वित्तीय वर्ष में खोले गए।
-32 हजार जनधन के खातों में नहीं हुआ लेनदेन।
-20 हजार जनधन खाते सम्मान निधि से हुए चालू।
जनधन खातों के संचालन के लिए बैंकों ने खाताधारकों को प्रेरित किया। इसके बाद भी संचालन न करने पर मजबूरन इन खातों को बंद करने के अलावा बैंक के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
जोग्रिंद्र पाल, अग्रणी जिला प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया।
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वर्ष अगस्त 2014 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति का बैंक में निशुल्क खाता खोलने का लक्ष्य रखा गया था। जिले में तेजी से योजना के तहत बैंकों में नए खाते खोले गए थे। अब तक की अगर बात करें तो जिले में कुल 1.13 लाख खाते जनधन योजना के तहत खोले गए लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में खाते ऐसे थे, जिनका संचालन एक भी बार नहीं हुआ। ऐसे में पहले ये खाते नॉन एक्टिव हो गए। बैंकों ने इन खातों को शुरू कराने के लिए लोगों से केवाईसी (नो योर कस्टमर) कराने की अपील की। लेकिन इसके बाद भी कुछ खाते तो चालू हुए, लेकिन 32 हजार खातों में केवाईसी भी नहीं कराई गई। ऐसे में जिले की 131 बैंक शाखाओं में संचालित ये खाते बंद हो गए। बंद हुए खातों की संख्या की अगर कुल खातों से तुलना करें तो ये लगभग 30 प्रतिशत है। इसकी रिपोर्ट बैंकों ने मुख्यालय को भी भेजी है।
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किसान सम्मान निधि से चालू हुए 20 हजार खाते
प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंकों में खोले गए खातों के बंद होने का आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता था लेकिन बीते वर्ष केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने इन खातों को संजीवनी दी है। बैंकों के रिकॉर्ड के अनुसार 20 हजार जनधन खाते किसान सम्मान निधि आने के कारण क्रियाशील हो गए हैं। हालांकि इनमें लेनदेन को आगे बढ़ाना बैंक के लिए चुनौती से कम नहीं है।
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हाईलाइट्स
-1.13 लाख खोले गए जनधन के कुल खाते।
-56966 जनधन खाते चालू वित्तीय वर्ष में खोले गए।
-32 हजार जनधन के खातों में नहीं हुआ लेनदेन।
-20 हजार जनधन खाते सम्मान निधि से हुए चालू।
जनधन खातों के संचालन के लिए बैंकों ने खाताधारकों को प्रेरित किया। इसके बाद भी संचालन न करने पर मजबूरन इन खातों को बंद करने के अलावा बैंक के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
जोग्रिंद्र पाल, अग्रणी जिला प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया।