'जल जीवन मिशन' पर संकट: आगरा में बोरिंग के पानी में नहीं बन रहा प्रेशर, यह है कारण
केंद्रीय जल शक्ति विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से निपटने के लिए हर घर नल से जल योजना बनाई है। जिसमें गांव-गांव भूजल आधारित छोटी-छोटी पेयजल योजनाएं बननी हैं।
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आगरा में भूगर्भ जल के स्तर में गिरावट से जल जीवन मिशन योजना ही संकट में पड़ गई है। जिले के 59 गांवों में नल से जल पहुंचाने की यह योजना छह महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। भूगर्भ जल स्तर बहुत नीचे होने के कारण बोरिंग के पानी में इतना प्रेशर नहीं बन पा रहा कि चिह्नित गांव में हर घर को नल से प्राकृतिक प्रवाह के साथ जल उपलब्ध कराया जा सके।
जिले में जल जीवन मिशन योजना के तहत 59 गांव चिह्नित हो चुके हैं। राजस्व विभाग ने 30 गुणा 15 फीट क्षेत्रफल भूमि भी मई में उपलब्ध करा दी, परंतु जिस कार्यदायी संस्था को बोरिंग कर योजनाएं लागू करनी है उसने हाथ खड़े कर दिए हैं। कार्यदायी संस्था ने भूजल का सर्वे करने के बाद जल निगम व ग्राम विकास विभाग को रिपोर्ट भेजी है। इसमें उन्होंने 300 फुट से अधिक गहराई की बोरिंग में असमर्थता जताई है।
प्राकृतिक प्रवाह से नहीं पहुंच सकता पानी
मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने कहा कि कार्यदायी संस्था ने समस्या बताई है। पानी इतना नीचे चला गया है कि प्राकृतिक प्रवाह से नलों में पानी नहीं पहुंच सकता। शासन को अवगत करा दिया है। वैकल्पिक इंतजाम पर मंथन हो रहा है।
दस हजार हैंडपंप हो चुके फेल
गिरते भूजल स्तर के कारण 690 ग्राम पंचायतों में 10 हजार से अधिक हैंडपंप खराब हैं। री-बोरिंग के बाद भी हैंडपंप फेल हो गए। भूजल में गिरावट का असर टीटीएसपी योजनाओं पर भी है। जल निगम की रिपोर्ट के मुताबिक 2000 से अधिक टीटीएसपी योजनाएं इस कारण फेल हो चुकी हैं।
12 ब्लॉक है डार्क जोन
जिले में बाह, पिनाहट और सैंया को छोड़कर 12 ब्लॉक डार्क जोन घोषित हैं। इन ब्लॉक में भूजल भंडारण की तुलना में दोहन अधिक है। वर्षा जल संचयन व रेन वॉटर हार्वेस्टिंग नहीं होने से इन ब्लॉक में संकट गहराता जा रहा है। बाह, पिनाहट चंबल नदी के कारण डार्क जोन होने से बचे हुए हैं।