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जादू है नशा है, मदहोशियां हैं....

Fri, 26 Feb 2016 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Fri, 26 Feb 2016 02:42 AM IST
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Jadoo Hai Nasha Hai, are Mdhoshian ....
मुहब्बत के  अजीम शाहकारसंगमरमरी ताजमहल का साया और श्रेया घोषाल के सुरों का जादू।  माहौल में मदहोशी छाना तो लाजिमी था। शिल्पग्राम में श्रेया के सुरों में सजे नगमों का जादू ऐसा चला कि आगराइट्स देर रात तक झूमते रहे।
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ताजमहोत्सव में गुरुवार को शिल्पग्राम की शाम श्रेया घोषाल के सुुरों से सजी। खचाखच भरे शिल्पग्राम में सुरमई शाम का आगाज मुंबई से श्रेया का साथ आए कलाकार ऋषिकेश रानाडे ने ‘आवाज दी तुमको सुनने तो आओ...’ के साथ की। इसके बाद उन्होंने ‘हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में...’ सुनाया तो लोग बेकाबू होने लगे। इसके बाद पीले सूट में सजी में श्रेया घोषाल ने स्टेज पर कदम रखे तो अपार भीड़ ने अपने मोबाइल की टार्च जलाकर उनका स्वागत किया। दर्शकों की दिलों की धड़कनों की आवाज सुनकर श्रेया ने भी बिना देर लगाए ‘सुन रहा है ना तू, रो रही हूं मैं...’ सुनाया। इसके बाद एक के बाद एक नान स्टाप गाने गाते हुए श्रेया घोषाल ने कहा कि आगरा में ताजमहल है, यह मुहब्बत की नगरी है यहां आशिकी की बात की जा सकती है। सुबह मैंने ताजमहल देखा तो उस एहसास को अपनी रूह से महसूस किया है। लिहाजा यहां अब सिर्फ आशिकी की बात हो सकती है। उन्होंने ‘बहारा, बहारा हुआ, दिल पहली बार रे...’ सुनाया तो लोगों ने तालियां बजाकर उनकी हौसलाअफजाई की। इसके बाद ‘अगर तुम मिल जाओ. जमाना छोड़ देंगे हम...’ ‘जादू है नशा है, मदहोशियां हैं...’ पर तो पीछे खड़ा युवाओं ने बेरीकेडिंग तोड़ने पर उतारू हो गए। इसके बाद उन्होंने मशहूर संगीतकार एआर रहमान की कंपोजीशन ‘आजा मैं हवाओं में ले चलूं तुमको...’ सुनाया। इसके बाद ‘सांस में तेरी सांस मिली तो, मुझे सांस आई...’  ‘मैं तैनू समझावांगी....’ सुनाया। श्रोताओं की जिंदादिली ने श्रेया का उत्साह बढ़ाया तो उन्होंने नान स्टाप ‘बरसो रे मेघा मेघा...’ ‘ढोली तारो  ढोल बाजे...’ ‘उ लाला उ लाला...’ और बाजीराव मस्तानी फिल्म के गीत गाए। अंत में उन्होंने अनारकली फिल्म का गाना गाया।
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12 महीने हो ताजमहोत्सव, मैं हर बार आऊं: श्रेया
आगरा। ताज महोत्सव के सिल्वर जुबली आयोजन में शिरकत आईं श्रेया घोषाल ने कहा कि आगरा आकर मुझे बेहद अच्छा लगता है। मुझे ताज महोत्सव में दूसरी बार आने का मौका मिला है। मैं तो चाहती हूं कि यहां 12 महीने ताज महोत्सव हो और मुझे हर बार बुलाया जाए। पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्रेया घोषाल ने कहा कि संगीत रूप से बदल सकता है लेकिन आत्मा नहीं बदल सकती है। शास्त्रीय संगीत भारतीय संगीत आत्मा है। उनसे पूछा गया कि आप इतनी खूबसूरत हैं एक्टिंग के बारे में क्यों नहीं सोचती हैं तो उन्होंने कहा कि मुझमें एक्टिंग का कीड़ा नहीं है।
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