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ईशन नदी में पानी लाने के लिए तलाशे जाएंगे प्राकृतिक जल स्रोत
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मैनपुरी। शहर से होकर गुजरने वाली ईशन नदी में पानी लाने के लिए एक बार फिर से कवायद शुरू हो गई है। डीएम और सीडीओ के निरीक्षण के बाद सिंचाई विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों को तलाशने का काम किया जाएगा ताकि एक बार फिर नदी में पानी की अविरल धारा बह सके ।
लगभग डेढ़ साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने ईशन नदी की सफाई कराई थी। अथक प्रयासों के बाद भी इसमें पानी नहीं आ सका। एक बार फिर जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह और सीडीओ विनोद कुमार ने दो दिन पूर्व नदी का निरीक्षण किया। बताया कि ईशन नदी को तभी पुनर्जीवित किया जा सकता है जब उसमें पानी उपलब्ध रहे। उन्होंने इसके लिए सिंचाई विभाग को प्राकृतिक जल स्रोत तलाशने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिन स्रोतों के माध्यम से नदी को पानी मिलता था उन्हें तलाश करते हुए दोबारा से शुरू कराया जाए। इससे नदी में पानी उपलब्ध रहेगा।
वहीं जहां भी जरूरत है वहां मनरेगा के तहत काम कराने के लिए भी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए। आदेश के बाद सिंचाई विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
...तो पानी की होगी कमी
पूर्व में ईशन नदी में पानी लाने के लिए नहर से भी जोड़ने पर विचार किया गया था। तेज गर्मी में फसलों की सिचाईं की अधिक आवश्यकता है। ऐसे में अगर नहर से नदी को जोड़ा जाता है तो नहर में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचेगा।
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ईशन नदी का निरीक्षण किया गया था, इसमें पानी लाने के लिए प्रयास किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग को जल स्रोतों को तलाशकर उन्हें पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।
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लगभग डेढ़ साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने ईशन नदी की सफाई कराई थी। अथक प्रयासों के बाद भी इसमें पानी नहीं आ सका। एक बार फिर जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह और सीडीओ विनोद कुमार ने दो दिन पूर्व नदी का निरीक्षण किया। बताया कि ईशन नदी को तभी पुनर्जीवित किया जा सकता है जब उसमें पानी उपलब्ध रहे। उन्होंने इसके लिए सिंचाई विभाग को प्राकृतिक जल स्रोत तलाशने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिन स्रोतों के माध्यम से नदी को पानी मिलता था उन्हें तलाश करते हुए दोबारा से शुरू कराया जाए। इससे नदी में पानी उपलब्ध रहेगा।
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वहीं जहां भी जरूरत है वहां मनरेगा के तहत काम कराने के लिए भी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए। आदेश के बाद सिंचाई विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
...तो पानी की होगी कमी
पूर्व में ईशन नदी में पानी लाने के लिए नहर से भी जोड़ने पर विचार किया गया था। तेज गर्मी में फसलों की सिचाईं की अधिक आवश्यकता है। ऐसे में अगर नहर से नदी को जोड़ा जाता है तो नहर में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचेगा।
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ईशन नदी का निरीक्षण किया गया था, इसमें पानी लाने के लिए प्रयास किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग को जल स्रोतों को तलाशकर उन्हें पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।