अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: फिरोजाबाद में 'आधी आबादी' बन रही प्रेरणा, काबिलियत से बनाई पहचान
फिरोजाबाद जिले की महिलाओं ने हर क्षेत्र में मुकाम पाया है। शिक्षा का क्षेत्र हो या समाजसेवा, खेल या फिर राजनीति। आज महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा बनीं हुई हैं। काबिलियत की बदौलत महिलाओं ने जिले में ही नहीं देश और प्रदेश में पहचान बनाई है। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले की कुछ ऐसी महिलाओं से बात की जो खुशियों से सबका दामन भरती हैं।
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विस्तार
फिरोजाबाद के प्राथमिक विद्यालय दबरई में शिक्षिका लुबना वसीम ने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय के लिए इंटरव्यू और लिखित परीक्षा पास की है। उन्होंने विद्यालय में गतिविधि आधारित प्रार्थना शुरू कराई है। कक्षा कक्षों को स्मार्ट क्लास रुम के रूप में विकसित किया है। स्वंय की बनाई वीडियो, मोबाइल एप्स का प्रयोग क्लास में शिक्षण कार्य को रोचक बनाने में कर रही हैं।
सामाजिक विज्ञान विषय बनाई उनकी वीडियो और वर्कशीट मिशन शिक्षण संवाद के सोशल मीडिया पेज पर आती हैं। उन्हें उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, यूपी एडु लीडर्स अवार्ड, आईसीटी आदि के लिए प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया गया है।
रेखा 800 बच्चों को बालश्रम से करा चुकीं मुक्त
कांचनगरी की रेखा वर्मा गत 14 वर्ष से बाल संरक्षण एवं बालकों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने में जुटीं हैं। चाइल्ड फंड इंडिया ऑगनाईजेशन से जुडीं रेखा अभी तक 800 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त करा चुकीं हैं। मध्यम वर्गीय परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही बाल श्रम एवं बालक-बालिकाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के विरोध में उनकी मुहिम जारी है।
मिशन शक्ति के तहत उन्हें वर्ष 2021 में बाल शक्ति योद्धा के रूप में जिला स्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया। जिलाधिकारी से पुरस्कार प्राप्त करने के बाद बच्चों के संरक्षण, पोषण व अधिकारों के प्रति रेखा की सक्रियता और बढ़ गई है।
जिम्नास्टिक में देश का नाम ऊंचा कर रहीं आरती
गांव मुईद्दीनपुर निवासी आरती यादव जिम्नास्टिक की खिलाड़ी हैं। उन्होंने यूपी की टीम से चार बार कलकत्ता, दो बार हैदराबाद और एक बार आगरा में सब जूनियर नेशनल मैच खेले हैं। जूनियर नेशनल मैच में उत्तर प्रदेश के लिए आरती ने सिल्वर मेडल जीता था।
सीनियर वर्ग में भी यूपी की टीम से आरती अपना परचम फहरा चुकी हैं। हाल में वे ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर खेलीं और तीसरे नंबर पर रही हैं। वर्तमान में वह अमृतसर में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेल में शामिल होने गई हैं। आरती ने बताया कि प्रयास है कि वह ओलंपिक खेलें और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत कर लाएं।
बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना लक्ष्य
बालिका शिक्षा एवं सशक्तिकरण की लड़ाई लड़ रहीं शिक्षिका मूवी शर्मा का फोकस दलित और अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं पर है। मूवी को भारतीय बौद्ध संघ द्वारा नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते एवं संसदीय कार्य एवं संस्कृति मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के हाथों वीरांगना झलकारी बाई रत्न से सम्मानित किया गया।
परिषदीय शिक्षा से जुड़ीं मूवी चूड़ी जुड़ाई, झलाई आदि कामों के जरिए आजीविका चलाने वालीं दलित व अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ का काम कर रही हैं। रविवार को किसी ने किसी मलिन बस्ती में बालिकाओं को पढ़ाई के लिए जागरुक करती हैं।
एचआईवी मरीजों की ढाल बनीं सरिता
एचआईवी मरीज की रिपोर्ट पॉजीटिव देखते ही चिकित्सक भी इलाज से हाथ खड़े कर लेते हैं। मगर अहाना परियोजना की काउंसलर सरिता यादव जिले में एचआईवी ग्रसित मरीजों की ढाल बनीं हुई है। अस्पताल से एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला की रिपोर्ट लेकर प्रसव तक उनका फॉलोअप करती हैं।कई बार चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मरीज का इलाज नहीं करते तो डीएम और सीएमओ से वार्ता कर इलाज मुहैया कराती हैं। अभी तक वह 200 एचआईवी महिलाओं के सुरक्षित प्रसव करा चुकी हैं। उनके बच्चों का तब तक फालोअप करती हैं, जब तक रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए।
23 साल की उम्र में प्रधान बनीं वंशिकाराज
फिरोजाबाद ब्लाक की ग्राम पंचायत बैंदी निवासी वंशिका राज शर्मा गांव की राजनीति में पुराने दिग्गजों को मात देकर जिले में सबसे कम उम्र की प्रधान बनीं हैं। 23 वर्ष की उम्र में प्रधान बनीं वंशिका ने बीसीए की पढ़ाई पूरी कर ली है। वह गांव का विकास कराने के साथ ही ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक कर रहीं हैं।कोरोना संक्रमण के दौरान गांव में ग्रामीणों को सावधानी बरतनें के लिए खुद घर-घर दस्तक दी। पंचायत घर की बाउंड्रीवाल कराने के साथ ही गांव में स्वच्छता की अलख जगा रही हैं। कहती हैं कि बेटियां भी किसी से कम नहीं। समाज में बेटियों को हर मोर्चे पर आगे आना चाहिए।
कांच निर्यात के क्षेत्र में रितिका ने बनाई पहचान
उच्च शिक्षित रितिका ने अच्छे पद पर नौकरी करने की जगह उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा। फै शन डिजाइनिंग व कम्प्यूटर साइंस में स्नातक रितिका जैन ने निजी उद्यम के सहारे चंद्र ग्लास की स्थापना की। वे फ्रांस और अमेरिका में तमाम तरह के उत्पादों का निर्यात करतीं हैं।
स्वदेशी कंपनियां रिलायंस, डीएलएस, विदेश के रिटेलर शोरूम मैकडोनाल्ड आदि से भी चंद्रा ग्लास को काष्ठ और कांच से निर्मित किचिन वेयर, होटल-शोरूम में फैंसी ग्लास आयटम के अतिरिक्त बाथरूम एसेसरीज सप्लाई के आर्डर मिलते हैं। रितिका के मुताबिक करीब दो वर्ष पूर्व स्थापित कंपनी 500 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करती है।
दिव्यांग ललितेश प्रीती ने जीवन में संघर्षकर की
बोधाश्रम रोड, कमला नेहरू स्कूल के पास रहने वाली दिव्यांग ललितेश प्रीती ने अभावों के बीच एलएलबी तक की पढ़ाई पूरी की। परिवार में बड़ी होने के कारण उन पर घर का बोझ था। 2014 में रजिस्ट्रेशन कराने के साथ विधिवत काम प्रारंभ कर दिया।
ललितेश ने बताया कि वह दिव्यांग होने के बाद भी कैलीपर्स के माध्यम से न्यायालय से घर आती-जाती हैं। परिवार में दो छोटी बहनें रिचा सिंह एमएड, टीना एमए कर चुकी हैं। छोटे भाई दिग्बहादुर सिंह व पुष्पेंद्र सिंह पढ़ाई कर रहे हैं। पिता दिगेंद्र भानु प्रताप सिंह भाष्कर समाजसेवी हैं। वर्तमान में वह जनपद न्यायालय में स्थाई लोक अदालत की सदस्य हैं।