फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   International Vulture Conservation Awareness Day 2023 White vultures are seen in Chambal

Vulture: दुनिया में हुए लापता..., पर चंबल में खूब दिख रहे सफेद गिद्ध; अब बढ़ेगा कुनबा

Sat, 02 Sep 2023 10:02 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 02 Sep 2023 10:02 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण जागरूकता दिवस आज दो सितंबर को मनाया जा रहा है। जहां दुनिया में सफेद गिद्ध लुप्तप्राय स्थिति में पहुंच चुके हैं, वहीं चंबल में इनकी मौजूदगी सुखद एहसास कराती है। 
 

विज्ञापन
International Vulture Conservation Awareness Day 2023 White vultures are seen in Chambal
सफेद गिद्ध - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण जागरुकता दिवस 2 सितंबर यानि आज है। अच्छी खबर ये है कि दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे सफेद गिद्ध (इजिप्शियन वल्चर) चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में खूब दिख रहे हैं। चंबल में राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा के उदयपुर खुर्द तक इनकी मौजूदगी सुखद एहसास कराती है।
विज्ञापन

ऐसे करें इनकी पहचान

सफेद गिद्ध का वैज्ञानिक नाम नियोफ्रॉन पर्कनोप्टेरस है। पतली चोंच वाले सफेद गिद्ध की लंबाई 55 से 70 सेमी, वजन 1.50 से 2.50 किग्रा, पंख फैलाव 150 से 175 सेमी होता है। चेहरे की त्वचा पीली नारंगी सी होती है। बाह के रेंजर उदय प्रताप सिंह के मुताबिक मरे हुए पशुओं के मांस से लेकर नदी के जैविक अपशिष्ट, छोटे स्तनधारी का आहार करने वाले सफेद गिद्धों की चंबल की सफाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें -  क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड: आगरा के व्यापारी को फंसाया, दिया 150 गुना लाभ का लालच, गवां बैठा 20 लाख रुपये
विज्ञापन
विज्ञापन

 

मई जून में होगा प्रजनन

प्रजनन सीजन मई-जून में इन गिद्धोें ने चंबल के कगारों, चट्टानों के ढलानों, गुफाओं में घोंसला बनाकर अंडे दिए थे। अंडों से निकले चूजे बड़े होने लगे हैं। नदी किनारे के गांवों के लोगों को संरक्षण के प्रति जागरूक किए जाने के भी सुखद परिणाम रहे हैं।

ये भी पढ़ें - Cyber Crime: ऑनलाइन ठगी का पैसा किसके बैंक खातों में जाता है, आगरा पुलिस का खुलासा; सच्चाई कर देगी हैरान
 

पशुओं से जुड़ीं 2 और दवाओं पर प्रतिबंध

पशुओं को दर्द और सूजनरोधी इंजेक्शन डाइक्लोफिनेक दिया जाता था। ऐसे मृत पशुओं के मांस खाने से गिद्धों के गुर्दे प्रभावित होते थे और उनकी जान चली जाती थी। वर्ष 2006 में डाइक्लोफिनेक को प्रतिबंधित किया गया। रेंजर ने बताया कि नदी किनारे के ग्रामीणों को प्रतिबंधित इंजेक्शन के इस्तेमाल के बारे में जागरुकता अभियान चलाया गया था। बीते 31 जुलाई को सरकार ने पशुओं को सूजनरोधी और दर्द निवारण के लिए दी जाने वाली दो दवाओं कैटोप्रोफेल और एसिक्लोफेनाक के निर्माण और बिक्री को प्रतिबंधित किया है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि प्रतिबंधित दवाओं को लेकर पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed