{"_id":"61632e918ebc3e05f02ce793","slug":"international-girl-child-day-mainpuri-news-agr5110132107","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटियां किसी से कम नहीं, सफलता हासिल कर कर रहीं जिले का नाम रोशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटियां किसी से कम नहीं, सफलता हासिल कर कर रहीं जिले का नाम रोशन
विज्ञापन
मैनपुरी। समय के साथ लोगों की सोच बदली है। जिले में प्रति एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या भले ही 884 हो लेकिन बालिकाओं को आगे बढ़ाने में लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैं। माता-पिता के सहयोग से जिले की कई बेटियां प्रशासनिक पद, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन कर रहीं हैं।
-----
पिता की प्रेरणा से एसडीएम बनीं अपूर्वा
प्रतिभा केवल शहर से ही नहीं निकलती गांव में भी इनकी कमी नहीं है। यदि बालिकाओं को अवसर प्रदान किया जाएं तो वह हर क्षेत्र में आगे बढ़कर जिले का नाम रोशन कर सकती हैं। गांव नगला उदी निवासी सेवानिवृत्त अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत गोपी सिंह यादव की पुत्री अपूर्वा यादव को पिता ने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का कार्य किया। बेटी की इच्छा थी कि वह अधिकारी बनें। इसके लिए उन्होंने बेटी का पूरा सहयोग किया। अपूर्वा वर्ष 2019 में एसडीएम बनीं। गोपी सिंह का कहना है कि बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं होना चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि वह माता-पिता का नाम रोशन करने का कार्य करें।
------
प्रियंका निभा रही आबकारी निरीक्षक की जिम्मेदारी
जागीर विकास खंड के गांव मंगलपुर निवासी उमेश मिश्रा ने अपनी पुत्री प्रियंका मिश्रा की पढ़ाई में कभी बाधा नहीं आनी दी। पुत्री प्रियंका मिश्रा जिले का नाम रोशन कर रही हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने पीसीएस परीक्षा पास कर आबकारी निरीक्षक के रूप में चयन पाया। तब से वह लगातार प्रयागराज में आबकारी निरीक्षक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रियंका जिले के युवाओं के लिए एक नया संदेश दे रही हैं।
विज्ञापन
----
मां की प्रेरणा से नेशनल तक पहुंची पलक
नगर के मोहल्ला राजा का बाग निवासी पलक तिवारी ने जब बैडमिंटन के क्षेत्र में कदम रखा तो खेल मैदान और प्रशिक्षक की कमी सामने आईं। पिता डॉ. विकास तिवारी ने पंड़ित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में तत्कालीन जिला क्रीड़ाधिकारी पीके गुप्ता ने बात की। उन्होंने अलग से खेल मैदान उपलब्ध कराने के लिए 500 रुपये महीने के हिसाब से मांगे। पिता ने अतिरिक्त 500 रुपये दिए लेकिन बेटी के खेल में रुकावट नहीं आने दी। बेटी ने भी जनपद, मंडल, स्टेट के बाद नेशनल तक प्रतिभाग किया। मां छाया तिवारी बाहर जाते समय उनके साथ रहीं।
-----
पिता ने बढ़ाया उत्साह तो पारितोष बनीं खिलाड़ी
नगर के निकटवर्ती गांव लोधीपुर की बेटी पारितोष को जब वालीबॉल खेलने के लिए गांव में मैदान नहीं मिला तो शिक्षक पिता प्रेमचंद्र ने मैनपुरी में किराए का मकान ले लिया। बेटी के खेल में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई। वर्ष 2017 में पहलीबार सुल्तानपुर में खेली गई यूपी स्टेट चैंपियनशिप में पारितोष को प्रतिभाग करने का मौका मिला तो हौसला और बढ़ गया। वर्ष 2018 में अयोध्या में खेली गई स्टेट चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने का मौका मिला। 2019 नेशनल प्रतियोगिता में चयन पाने का अवसर मिला। पारितोष का सपना है कि वह इंटरनेशनल वालीबॉल में खेलें।
------------
बिंदेश्वरी गांव में लड़कियों को दे रहीं प्रशिक्षण
मैनपुरी विकास खंड क्षेत्र के गांव प्रहलापुर निवासी बिन्देश्वरी यादव का लालन-पालन बेटे के तरह हुआ। एथलेटिक्स में मंडल और प्रदेश के बाद उनका चयन इंटरनेशनल के लिए हुआ। मां सीमा देवी ने हौसाल बढ़ाया तो एक के बाद एक कई मेडल जीते। वर्ष 2002 एथलेटिक्स ऊना हिमाचल प्रदेश में प्रथम स्थान, वर्ष 2005 में उदयपुर राजस्थान एथलेटिक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में साउथ अफ्रीका एथलेटिक्स में चयन हुआ। बिंदेश्वरी पढ़ाई में भी अव्वल रहीं। वर्ष 2009 में सीआईएसएफ ऑल इंडिय़ा मेरिट लिस्ट में द्वितीय स्थान पर रहीं। 2010 में पुलिस में चयन, 2011 यूपी एसआई क्वालीफाई किया, 2014 से अध्यापक है। घर पर ही सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं। गांव की लड़कियों को ख्ेाल में प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
----------
बेटियां हैं मेरा गर्व
शहर के निकटवर्ती गांव लालपुर निवासी शुभम शक्ति भदौरिया के दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अंबिका भदौरिया कक्षा सात की छात्रा है वहीं छोटी बेटी मलिका भदौरिया अभी दो साल की है। शुभम और उनकी पत्नी स्नेहलता को अपनी बेटियों पर गर्व है। शुभम कहते हैं कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। वे अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने का कार्य करेंगे।
-----
मेरी बेटी मेरा अभिमान
नगर के ज्योंती तिराहा निवासी अजय कुमार के एक बेटी है। बेटी संस्कृति को अजय अपना अभिमान मानते हैं। अजय कुमार का कहना है कि वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाने का कार्य करेंगे। बेटी को वह अपना अभिमान मानते हैं। उनका कहना है कि कई लोग ऐसे हुए हैं जिन्हें अपनी बेटियों के नाम से ही पहचान मिली है।
---------
बेटियां भी करती हैं बाप का नाम रोशन
नगर के मोहल्ला मिश्राना निवासी अनिल शर्मा को अपनी बेटियों पर गर्व है। उनका कहना है कि बेटियों को किसी प्रकार से कम नहीं आंकना चाहिए। वह अपनी बेटियों का बेटों की तरह से लालन-पालन कर रहे हैं। बड़ी बेटी आंचल बीएससी की परीक्षा पास कर चुकी है। वहीं दूसरी बेटी निकिता शर्मा बीए कर रही है। अनिल शर्मा का कहना है कि बेटियां भी पिता का नाम रोशन करती हैं।
विज्ञापन
-----
पिता की प्रेरणा से एसडीएम बनीं अपूर्वा
प्रतिभा केवल शहर से ही नहीं निकलती गांव में भी इनकी कमी नहीं है। यदि बालिकाओं को अवसर प्रदान किया जाएं तो वह हर क्षेत्र में आगे बढ़कर जिले का नाम रोशन कर सकती हैं। गांव नगला उदी निवासी सेवानिवृत्त अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत गोपी सिंह यादव की पुत्री अपूर्वा यादव को पिता ने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का कार्य किया। बेटी की इच्छा थी कि वह अधिकारी बनें। इसके लिए उन्होंने बेटी का पूरा सहयोग किया। अपूर्वा वर्ष 2019 में एसडीएम बनीं। गोपी सिंह का कहना है कि बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं होना चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि वह माता-पिता का नाम रोशन करने का कार्य करें।
विज्ञापन
------
प्रियंका निभा रही आबकारी निरीक्षक की जिम्मेदारी
जागीर विकास खंड के गांव मंगलपुर निवासी उमेश मिश्रा ने अपनी पुत्री प्रियंका मिश्रा की पढ़ाई में कभी बाधा नहीं आनी दी। पुत्री प्रियंका मिश्रा जिले का नाम रोशन कर रही हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने पीसीएस परीक्षा पास कर आबकारी निरीक्षक के रूप में चयन पाया। तब से वह लगातार प्रयागराज में आबकारी निरीक्षक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रियंका जिले के युवाओं के लिए एक नया संदेश दे रही हैं।
विज्ञापन
----
मां की प्रेरणा से नेशनल तक पहुंची पलक
नगर के मोहल्ला राजा का बाग निवासी पलक तिवारी ने जब बैडमिंटन के क्षेत्र में कदम रखा तो खेल मैदान और प्रशिक्षक की कमी सामने आईं। पिता डॉ. विकास तिवारी ने पंड़ित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में तत्कालीन जिला क्रीड़ाधिकारी पीके गुप्ता ने बात की। उन्होंने अलग से खेल मैदान उपलब्ध कराने के लिए 500 रुपये महीने के हिसाब से मांगे। पिता ने अतिरिक्त 500 रुपये दिए लेकिन बेटी के खेल में रुकावट नहीं आने दी। बेटी ने भी जनपद, मंडल, स्टेट के बाद नेशनल तक प्रतिभाग किया। मां छाया तिवारी बाहर जाते समय उनके साथ रहीं।
-----
पिता ने बढ़ाया उत्साह तो पारितोष बनीं खिलाड़ी
नगर के निकटवर्ती गांव लोधीपुर की बेटी पारितोष को जब वालीबॉल खेलने के लिए गांव में मैदान नहीं मिला तो शिक्षक पिता प्रेमचंद्र ने मैनपुरी में किराए का मकान ले लिया। बेटी के खेल में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई। वर्ष 2017 में पहलीबार सुल्तानपुर में खेली गई यूपी स्टेट चैंपियनशिप में पारितोष को प्रतिभाग करने का मौका मिला तो हौसला और बढ़ गया। वर्ष 2018 में अयोध्या में खेली गई स्टेट चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने का मौका मिला। 2019 नेशनल प्रतियोगिता में चयन पाने का अवसर मिला। पारितोष का सपना है कि वह इंटरनेशनल वालीबॉल में खेलें।
------------
बिंदेश्वरी गांव में लड़कियों को दे रहीं प्रशिक्षण
मैनपुरी विकास खंड क्षेत्र के गांव प्रहलापुर निवासी बिन्देश्वरी यादव का लालन-पालन बेटे के तरह हुआ। एथलेटिक्स में मंडल और प्रदेश के बाद उनका चयन इंटरनेशनल के लिए हुआ। मां सीमा देवी ने हौसाल बढ़ाया तो एक के बाद एक कई मेडल जीते। वर्ष 2002 एथलेटिक्स ऊना हिमाचल प्रदेश में प्रथम स्थान, वर्ष 2005 में उदयपुर राजस्थान एथलेटिक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में साउथ अफ्रीका एथलेटिक्स में चयन हुआ। बिंदेश्वरी पढ़ाई में भी अव्वल रहीं। वर्ष 2009 में सीआईएसएफ ऑल इंडिय़ा मेरिट लिस्ट में द्वितीय स्थान पर रहीं। 2010 में पुलिस में चयन, 2011 यूपी एसआई क्वालीफाई किया, 2014 से अध्यापक है। घर पर ही सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं। गांव की लड़कियों को ख्ेाल में प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
----------
बेटियां हैं मेरा गर्व
शहर के निकटवर्ती गांव लालपुर निवासी शुभम शक्ति भदौरिया के दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अंबिका भदौरिया कक्षा सात की छात्रा है वहीं छोटी बेटी मलिका भदौरिया अभी दो साल की है। शुभम और उनकी पत्नी स्नेहलता को अपनी बेटियों पर गर्व है। शुभम कहते हैं कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। वे अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने का कार्य करेंगे।
-----
मेरी बेटी मेरा अभिमान
नगर के ज्योंती तिराहा निवासी अजय कुमार के एक बेटी है। बेटी संस्कृति को अजय अपना अभिमान मानते हैं। अजय कुमार का कहना है कि वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाने का कार्य करेंगे। बेटी को वह अपना अभिमान मानते हैं। उनका कहना है कि कई लोग ऐसे हुए हैं जिन्हें अपनी बेटियों के नाम से ही पहचान मिली है।
---------
बेटियां भी करती हैं बाप का नाम रोशन
नगर के मोहल्ला मिश्राना निवासी अनिल शर्मा को अपनी बेटियों पर गर्व है। उनका कहना है कि बेटियों को किसी प्रकार से कम नहीं आंकना चाहिए। वह अपनी बेटियों का बेटों की तरह से लालन-पालन कर रहे हैं। बड़ी बेटी आंचल बीएससी की परीक्षा पास कर चुकी है। वहीं दूसरी बेटी निकिता शर्मा बीए कर रही है। अनिल शर्मा का कहना है कि बेटियां भी पिता का नाम रोशन करती हैं।