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International Day of the Girl Child: जागरूकता ने बदली सोच, 'परियों' की संख्या में बढ़ोत्तरी
Sun, 11 Oct 2020 01:33 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 11 Oct 2020 01:33 PM IST
सार
- लिंगानुपात:1000/920
- पांच साल तक के कुल बच्चे: 752507
- पांच साल तक के बच्चे-बच्चियों का अनुपात: 395640/356867
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2020: फाइल फोटो
विस्तार
बेटियां बोझ नहीं है, मौका मिले तो वह भी अपनों का नाम रोशन कर सकती हैं। अब यह बात लोग समझने लगे हैं। पढ़ाई-लिखाई और जागरूकता के कारण लोगों की बदली सोच से परियों की संख्या में करीब 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। लिंगानुपात का भी यही हाल है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में पांच साल तक के 752507 बालक-बालिकाएं हैं। इसमें से बालकों की संख्या 395640 है और 356867 बालिकाएं हैं। बीते दो साल में बालिकाओं की संख्या में दस से 11 फीसदी की वृद्धि हुई थी। यही हाल लिंगानुपात में हुआ है।
ये भी पढ़ें- शर्मनाकः ताजनगरी में सुरक्षित नहीं बालिकाएं, हैरान करने वाले हैं पुलिस के आंकड़े
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बालिकाओं की संख्या बढ़ने से लिंगानुपात में भी सुधार हुआ। 2017 में एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 909 थी, जो अब बढ़कर एक हजार पुरुषों के मुकाबले 920 हो गया है। बेटियों की बढ़ती संख्या में सामाजिक सोच में बदलाव के साथ भ्रूण लिंग जांच पर सख्त कानून और निगरानी का भी असर हुआ है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में पांच साल तक के 752507 बालक-बालिकाएं हैं। इसमें से बालकों की संख्या 395640 है और 356867 बालिकाएं हैं। बीते दो साल में बालिकाओं की संख्या में दस से 11 फीसदी की वृद्धि हुई थी। यही हाल लिंगानुपात में हुआ है।
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बालिकाओं की संख्या बढ़ने से लिंगानुपात में भी सुधार हुआ। 2017 में एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 909 थी, जो अब बढ़कर एक हजार पुरुषों के मुकाबले 920 हो गया है। बेटियों की बढ़ती संख्या में सामाजिक सोच में बदलाव के साथ भ्रूण लिंग जांच पर सख्त कानून और निगरानी का भी असर हुआ है।
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि भ्रूण लिंग जांच करने वालों पर सख्त कानून बना है, इससे गर्भ में बेटियों की पहचान कर हत्या करने के मामलों पर रोक लगी है। लोग भी अब बेटियों को बोझ न मानकर उनको आगे बढ़ने का पूरा मौका दे रहे हैं।