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आगरा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा
अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 29 Aug 2016 12:57 AM IST
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डा. महेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेश शर्मा ने कहा है कि आगरा में भी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनेगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। इसका जेवर में विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा है कि फीरोजाबाद के हिरनगांव में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को पहले ही नकारा जा चुका है। आगरा-दिल्ली के बीच हेलीकॉप्टर सेवा भी जल्द शुरू होने का आश्वासन दिया है।
रविवार को आगरा आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता की। इसमें कहा कि खेरिया हवाईअड्डे पर विकसित किए जा रहे सिविल टर्मिनल को ही अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल, एविएशन के सचिव और एयरपोर्ट अथॉरिटी के बीच हुई बैठक में यह निर्णय हो चुका है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सौ करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार ने भी 55 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी है। महेश शर्मा ने बताया कि इस हवाईअड्डे को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) में भी रखा गया है। इसके तहत यहां से एक घंटे की फ्लाइट 2500 रुपये और आधा घंट की फ्लाइट 1250 रुपये में उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि यूपी में जल्द ही नौ हवाई अड्डे होंगे। प्रदेश में अब तक व्यवहारिक रूप से दो ही हवाई अड्डे (लखनऊ और वाराणसी) थे।
केंद्रीय मंत्री ने जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की वजह से आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की संभावनाएं खत्म होने की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जेवर हवाईअड्डा एनसीआर के विकल्प में रूप में विकसित हो रहा है। आगरा का अपना एक अलग अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फ्लाइटों के बढ़ रहे ट्रैफिक को देखते हुए एनसीआर में तीन जगहों पर हवाईअड्डे विकसित करने का प्रस्ताव आया था। इसमें पहला राजस्थान के भिवाड़ी, हरियाणा के रोहतक और यूपी के जेवर में था। जेवर में हवाईअड्डे का प्रस्ताव वर्ष 2000 में राजनाथ सिंह ने रखा था। बता दें कि केंद्रीय मंत्री की इस घोषणा से पहले सिविल टर्मिनल को डोमेस्टिक एयरपोर्ट या इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने पर असमंजस की स्थिति थी।
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अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
ताजनगरी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अमर उजाला ने मुहिम छेड़ रखी है। इससे शहर ही नहीं, आसपास के गांव के तमाम लोग जुड़ रहे हैं। इसके लिए तमाम किसानों ने तो अपनी जमीन देने का भी प्रस्ताव रखा है। पूर्व में हुई कवायद के तहत सिविल एन्क्लेव के लिए जमीन अधिग्रहण कर रही प्रदेश सरकार को एक सुझाव यह मिला था कि धनौली में ही और ज्यादा जमीन अधिग्रहीत कर इसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के स्तर का बनाया जाए और एयरफोर्स का रनवे ही इसके लिए प्रयोग किया जाए। रक्षा मंत्रालय पूर्व में इस प्रस्ताव पर सहमत हो चुका है, तभी धनौली में नए सिविल टर्मिनल के लिए एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया तैयार हुई।
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रविवार को आगरा आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता की। इसमें कहा कि खेरिया हवाईअड्डे पर विकसित किए जा रहे सिविल टर्मिनल को ही अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल, एविएशन के सचिव और एयरपोर्ट अथॉरिटी के बीच हुई बैठक में यह निर्णय हो चुका है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सौ करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार ने भी 55 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी है। महेश शर्मा ने बताया कि इस हवाईअड्डे को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) में भी रखा गया है। इसके तहत यहां से एक घंटे की फ्लाइट 2500 रुपये और आधा घंट की फ्लाइट 1250 रुपये में उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि यूपी में जल्द ही नौ हवाई अड्डे होंगे। प्रदेश में अब तक व्यवहारिक रूप से दो ही हवाई अड्डे (लखनऊ और वाराणसी) थे।
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केंद्रीय मंत्री ने जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की वजह से आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की संभावनाएं खत्म होने की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जेवर हवाईअड्डा एनसीआर के विकल्प में रूप में विकसित हो रहा है। आगरा का अपना एक अलग अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फ्लाइटों के बढ़ रहे ट्रैफिक को देखते हुए एनसीआर में तीन जगहों पर हवाईअड्डे विकसित करने का प्रस्ताव आया था। इसमें पहला राजस्थान के भिवाड़ी, हरियाणा के रोहतक और यूपी के जेवर में था। जेवर में हवाईअड्डे का प्रस्ताव वर्ष 2000 में राजनाथ सिंह ने रखा था। बता दें कि केंद्रीय मंत्री की इस घोषणा से पहले सिविल टर्मिनल को डोमेस्टिक एयरपोर्ट या इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने पर असमंजस की स्थिति थी।
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अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
ताजनगरी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अमर उजाला ने मुहिम छेड़ रखी है। इससे शहर ही नहीं, आसपास के गांव के तमाम लोग जुड़ रहे हैं। इसके लिए तमाम किसानों ने तो अपनी जमीन देने का भी प्रस्ताव रखा है। पूर्व में हुई कवायद के तहत सिविल एन्क्लेव के लिए जमीन अधिग्रहण कर रही प्रदेश सरकार को एक सुझाव यह मिला था कि धनौली में ही और ज्यादा जमीन अधिग्रहीत कर इसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के स्तर का बनाया जाए और एयरफोर्स का रनवे ही इसके लिए प्रयोग किया जाए। रक्षा मंत्रालय पूर्व में इस प्रस्ताव पर सहमत हो चुका है, तभी धनौली में नए सिविल टर्मिनल के लिए एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया तैयार हुई।