फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Innocent Parents Live In Jail For Five Years Read Full Story

विडंबना: पांच साल तक जेल में बेगुनाह होने के बावजूद काटी सजा, निर्दोष मां-बाप की बच्चों को दिलाने की गुहार

Mon, 25 Jan 2021 12:16 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 25 Jan 2021 12:16 AM IST
विज्ञापन
Innocent Parents Live In Jail For Five Years Read Full Story
पांच साल जेल में रहे निर्दोष नरेंद्र और नजमा - फोटो : अमर उजाला
आगरा में बाह के जरार निवासी नरेंद्र और नजमा ने पांच साल तक जेल में बेगुनाह होने के बावजूद सजा काटी। उनके बच्चे भी आश्रय गृह में रहकर सजा काट रहे हैं। दोनों का पालन-पोषण करने में असमर्थ दादा-दादी ने आश्रय गृह में रखने की गुहार बाल कल्याण समिति से लगाई थी। समिति के आदेश पर दोनों को कानपुर के आश्रय गृह में रखा है। निर्दोष साबित होने के बाद जेल से छूटे पति-पत्नी ने अधिकारियों से बच्चों को दिलाने की गुहार लगाई है। अब बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर यहां लाया जाएगा। 
विज्ञापन


एक सितंबर 2015 को बाह के जरार निवासी योगेंद्र सिंह के पांच साल के बेटे रंजीत सिंह उर्फ चुन्ना की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। दूसरे दिन बृह्मचारी गुप्ता के बंद मकान में उसका शव मिला था। पिता ने पड़ोस के नरेंद्र और उसकी पत्नी नजमा पर शक जताया था। पुलिस ने दोनों को जेल भेजा था। 21 जनवरी 2021 को कोर्ट ने दोनों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। वह पांच साल से जेल में बंद थे। जेल से छूटने के बाद नरेंद्र और नजमा ने अपने बच्चों की तलाश की। 
विज्ञापन


नरेंद्र बताया कि नजमा से प्रेम विवाह किया था। वह पहले से शादीशुदा थी। उसका पति से तलाक हो गया था। दो बच्चे पति ले गया, जबकि एक बेटा अजीत और अंजू को नजमा ने अपने पास रख लिया था। नजमा के साथ जेल जाने के बाद बच्चों को नरेंद्र के पिता भगवान दास और मां गंगा देवी ने रख लिया। लेकिन बाद में आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने बच्चों को साथ में रखने से मना कर दिया था। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपने बच्चों के बारे में जानकारी जुटाई। एसएसपी और जिलाधिकारी को अधिवक्ता वंशो बाबू के माध्यम से प्रार्थनापत्र भेजा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

कानपुर के आश्रय गृह में रह रहे दोनों बच्चे 
नरेंद्र ने बताया कि उन्हें अधिकारियों से जानकारी पर पता चला कि बच्चे माता-पिता के पास थे। मगर, आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बच्चों को आश्रय गृह भेजने के लिए मानवाधिकार आयोग, बाल आयोग और अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था। उनके प्रार्थनापत्र के आधार पर बाल कल्याण समिति ने जांच की।

समिति ने जांच में पाया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बाद समिति ने बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में लिया। इसके लिए थाना में 22 अक्तूबर 2019 को जीडी भी कराई। दोनों बच्चों को बाल गृह सिरौली मलपुरा में भेजा गया। 17 अगस्त 2020 को 13 वर्षीय अजीत को फिरोजाबाद आश्रय गृह बालक में भेज दिया, जबकि 18 अगस्त 2020 को 11 वर्षीय अंजू को राजकीय बालिका गृह कानपुर भेज दिया। बाद में बालक को भी कानपुर भेज दिया गया। 

असली आरोपी को पकड़े पुलिस 
नरेंद्र ने बताया कि जरार में असली हत्यारोपी अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। कोर्ट ने भी पुन: विवेचना के आदेश किए हैं। जरार में उनका परिवार रहता है। वह वहां पर नहीं जा सकते हैं। इसलिए पुलिस प्रशासन से यही गुहार है कि असली हत्यारोपी को जल्द से जल्द पकड़ लें।  

खुद ही दी थी पुलिस को सूचना 
नरेंद्र ने बताया कि वह एक स्कूल में शिक्षक थे। इसके साथ ही शाम को सब्जी बेचने जाते थे। पत्नी नजमा घर के नीचे ही चूड़ियों की दुकान चलाती थी। इससे घर का खर्च चलता था। अब उनका सामान भी मकान मालिक ने हटा दिया है। उन्हें यह भी नहीं पता कि सामान कहां है। बच्चे की लाश उनके पड़ोस में मिली थी। इस पर पत्नी ने मृतक के घर पर बताया था। इसके साथ ही वह खुद पुलिस को सूचना देने थाने गया था। इसके बावजूद उनको फंसा दिया गया। अब वह मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालेगा। 

महफूज संस्था के समन्वयक ने लिखा पत्र 
महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने बताया कि बाल कल्याण समिति को पत्र लिखकर दंपती के दोनों बच्चों  को सुपुर्दगी में देने के लिए पत्र लिखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed