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UP: विदेशी नस्ल के लिए बेजुबान श्वानों पर ब्रीडिंग का अत्याचार, झोपड़ी में चला रहे गोरखधंधा

Thu, 20 Jun 2024 08:26 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 20 Jun 2024 08:26 AM IST
सार

ताजनगरी में विदेशी नस्ल के लिए बेजुबान श्वानों पर ब्रीडिंग का अत्याचार किया जा रहा है। झोपड़ी में गोरखधंधा चल रहा है। 

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innocent dogs being tortured for breeding for foreign breed In Agra
ब्रीडिंग के लिए रखा यंग रॉटविलर, रेस्क्यू करा कर लाई गई फीमेल लैब्राडोर - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में बेजुबानों पर ब्रीडिंग का अत्याचार किया जा रहा है। यह बेजुबान, इंसानी भाषा में अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते। इंसानी अत्याचार को चुपचाप सहन करते रहते है। ऐसी कहानी है स्वीटी की, जो एक लैब्राडोर डॉग है। उसने अपने मालिक के हर सितम को सहन किया। पैसा कमाने के चक्कर में उसके मालिक ने ब्रीडिंग के नर्क में फेंक दिया।

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उत्तेजक इंजेक्शन लगाकर ब्रीडिंग के लिए विवश किया गया। पशु प्रेमी शिक्षिका गुंजन उसकी जिंदगी में फरिश्ता बनकर आई। कैस्पर्स होम में यह लैब्राडोर अब अपने जीवन की अंतिम सांस ले रही है। ऐसी कई स्वीटी है, जो ब्रीडिंग नर्क को झेल रही है। एक रॉटविलर को भी मुक्त कराया गया। इसका प्रयोग भी ब्रीडिंग के धंधे में किया जा रहा था।
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शहर में हर एक कदम की दूरी पर पिल्ले ही पिल्ले, हमारे यहां पर हर नस्ल के पिल्ले मिलते हैं। इस तरह के बोर्ड दिखाई दे जाएंगे , जो ब्रीड शहर के पर्यावरण में पल भी नहीं सकती है। वह ब्रीड बड़ी आसानी से मोटे दाम देने के बाद मिल जाएगी। लेकिन, खरीदने वाला व्यक्ति कभी भी उस पेट शॉप मालिक से नहीं पूछता क्या उसके पास ब्रीडिंग का लाइसेंस है।
 

ये जागरूकता लोगों में आ जाए कि पिल्ले लेने से पहले ब्रीडिंग का लाइसेंस पूछ लें तो शायद श्वानों पर होने वाली क्रूरता रोकी जा सकती है। नगर निगम के पशु चिकित्सक अधिकारी डॉ. अजय सिंह यादव बताते हैं कि नगर निगम में अभी तक ब्रीडिंग लाइसेंस की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। न ही कोई ब्रीडर अभी तक हमारे पास पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकरण करा रजिस्ट्रेशन के लिए आया। 

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पशु प्रेमी विनीता अरोड़ा बताती है कि अप्रैल माह में जलेसर मार्ग के पास स्थित एक वीरान जगह से लैब्राडोर (स्वीटी) को मुक्त कराया। उस समय कई तरह की बीमारियों से जूझ रही थी । रॉटविलर को उसका मालिक पेट शॉप मालिकों को ब्रीडिंग करने के लिए किराए पर देता था, जिसके बदले में रुपये वसूलता था। शहर में ही कई बस्तियों में धड़ल्ले से ब्रीडिंग का धंधा चल रहा है। जब रेस्क्यू कराने जाते हैं, तो टीम को डराने का प्रयास किया जाता है।

कुत्तों पर होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए 2017 में ब्रीडिंग व मार्केटिंग के लिए बने कानून

  • हर ब्रीडर के पास पंजीकरण प्रमाण पत्र होना चाहिए, जो भारतीय पशु कल्याण बोर्ड निरीक्षण के बाद जारी करता है। जिसका हर दो साल में नवीनीकरण करना अनिवार्य है।
  • नियम के तहत 8 सप्ताह से कम उम्र के पिल्ले को बेचा नहीं जा सकता।
  • ब्रीडर को प्रजनन करने वाले श्वान सहित हर श्वान का रिकॉर्ड रखना होगा।
  • ब्रीडर्स को छह महीने के भीतर नहीं बिकने वाले पिल्लों को पशु कल्याण संगठन के माध्यम से पुनर्वासित करना होगा। उन्हें अपनी देखभाल में पैदा हुए या मरने वाले कुत्तों की संख्या का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा।
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