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Agra: जूट की बोरी में हो रही थी हलचल, खोलकर देखा तो रस्सी से बंधा मिला 25kg का कछुआ

Sat, 28 May 2022 05:38 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 28 May 2022 05:38 PM IST
सार

आगरा की रेलवे कॉलोनी में जूट की बोरी के अंदर लगभग 25 किलोग्राम वज़न का इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल (कछुआ) पाया गया, जिसे वाइल्डलाइफ एसओएस ने रेस्क्यू किया। कछुए को वर्तमान में चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।

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Indian softshell turtle weighing 25 kg was rescued from Agra's railway colony
Indian softshell turtle - फोटो : wildlife sos

विस्तार

आगरा छावनी क्षेत्र में रेलवे कॉलोनी के एक युवक ने सड़क से गुजरते समय अजीब दृश्य देखा। एक बड़ा सा कछुआ, जिसकी बाद में इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल के रूप में पहचान हुई, सड़क किनारे जूट की बोरी में बंद था और उसके शरीर के चारों ओर रस्सियां बंधी हुईं थी। इस घटना के बारे में वाइल्डलाइफ एसओएस हेल्पलाइन से तुरंत सतर्क किया गया, जिसके बाद दो सदस्यीय टीम सहायता के लिए वहां पहुंची।

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इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली एक मीठे पानी की प्रजाति का कछुआ है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है, जिसके तहत इसे एक बाघ के समान सुरक्षा प्रदान की गई है। अवैध शिकार या किसी भी संरक्षित वन्यजीव प्रजाति को कैद में रखना और उनके शरीर के अंगों का अवैध व्यापार एक अपराध है, जिसके लिए तीन से सात साल तक की कैद हो सकती है।
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वाइल्डलाइफ एसओएस को कॉल करने वाले विपिन सिंह ने कहा कि जब वे किसी काम से बाहर जा रहे थे तब जूट की बोरी में हल्की हलचल देखी। पास जाने पर बोरी के अंदर एक विशाल कछुआ मिला, जो रस्सियों से बंधा हुआ था। उन्होंने कहा कि खुशी है कि वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कछुआ अब सुरक्षित हाथों में है।
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आगरा सिटी रेंज के फॉरेस्ट ऑफिसर राम गोपाल सिंह ने कहा कि 'हमें संदेह है कि शिकारियों द्वारा कछुए को अवैध रूप से कहीं और ले जाया जा रहा होगा। मेडिकल जांच के बाद कछुए को वापस एक सुरक्षित आवास में छोड़ दिया जाएगा।'

बड़े पैमाने पर किया जाता है शिकार 

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा  कि 'सॉफ्टशेल कछुओं का उनके शरीर के अंगों के लिए बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता है और उनके मांस को दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में स्वादिष्ट माना जाता है। यह कछुआ एक बहुत ही अजीबोगरीब दिखने वाली मीठे पानी की प्रजाति है।'

दी जा रही चिकित्सा देखभाल 

वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. इलियाराजा ने कहा कि 'लंबे समय तक सीधे धूप में रहने के कारण कछुआ तनाव में और बेहद निर्जलित था। हम कछुए को ज़रूरी चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहे हैं और जल्द ही ठीक होने के बाद उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देंगे।'

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