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Independence Day 2022: बचपन से था आजादी का जुनून, राजाबाबू वासलस ने जला दी थी विदेशी कपड़ों की होली

Sat, 13 Aug 2022 12:47 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 13 Aug 2022 12:47 AM IST
सार

राजाबाबू वासलस नौ वर्ष की उम्र में ही कांग्रेस के कार्यक्रमों में जाने लगे थे। परिवार आर्थिक संकट से जूझता रहा, लेकिन आजादी की ऐसी दीवानगी थी कि कदम नहीं डिगे।

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Independence Day 2022 Story of freedom fighter Rajababu Vaslas started attending Congress programs at the age
राजाबाबू वासलस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुहाग नगरी फिरोजाबाद के रणबांकुरों ने भी आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ अलग-अलग तरीकों से बिगुल फूंक रखा था। इन्हीं अमर सपूतों में एक नाम है राजाबाबू वासलस का। नौ वर्ष की उम्र में ही ये स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े आयोजनों में जाने लगे। विदेशी कपड़ों की भी होली जलाई। अंग्रेजों ने इन्हें तमाम यातनाएं दीं। मगर देश को आजाद कराने के जुनून के समक्ष यातनाएं छोटी थीं। इसी के चलते राजाबाबू वासलस ने परिवार की तरफ ध्यान हटा लिया था। 

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पिता ने करा दी जल्दी शादी 

आजादी के आंदोलन के दौरान मक्खनपुर में राजा के नाम से पहचान रखने वाले राजाबाबू उन गिने चुने स्वतंत्रता सेनानियों में से हैं, जिन्होंने आजादी के लिए सबकुछ न्योछावर कर दिया था। नौ वर्ष की बाल्यावस्था से ही कांग्रेस के कार्यक्रमों में भाग लेने पर पिता को चिंता हुई। इसके बाद उनकी शादी करा दी गई। एक बार तो आंदोलन का हिस्सा बनकर राजाबाबू ने विदेशी कपड़ों की होली जलाई। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने के साथ अन्य लोगों को साथ लेकर विरोध किया था।

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आर्थिक संकट से जूझा परिवार 

 उनके पुत्र सुभाष गांधी ने बताया कि पिता के जेल जाने या घर से बाहर चले जाने पर उनको भी आर्थिक संकट से जूझना पड़ता था। कई बार घर की चीजें बेचकर गुजारा करना पड़ा। बहन की शादी तय कर दी। लेकिन पिताजी जेल गए तो अन्य परिजन व अन्य लोगों को ही शादी करनी पड़ी। पिताजी ने प्रशासनिक दबाव पर पेंशन और ताम्रपत्र लेना स्वीकार किया था। 

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1989 में स्थापित राजाबाबू वासलस की प्रतिमा की नहीं हो रही देखदेख 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाबाबू वासलस के पुत्र सुभाष गुप्ता गांधी ने बताया कि प्रतिमा की स्थापना बड़े भाई मोहनदास गांधी ने कांग्रेस में सक्रिय रहते हुए 1989 में कराई थी। उस समय विधान परिषद के सदस्य शिव प्रसाद गुप्त आए थे। प्रतिमा को हम लोग खरीदकर लाए थे। पार्क की जिस प्रकार से प्रतिमा की देख रेख होनी चाहिए वह नहीं हो रही है। रसूलपुर थाने के पास स्थित पार्क दुर्दशा का शिकार है। वैसे समाज की ओर से मुझे 14 अगस्त को आगरा के पचकुइंया में आयोजित होने वाले माथुर वैश्य महासभा के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। इसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का आगमन प्रस्तावित है। स्वतंत्रता आंदोलन में सभी का सहयोग रहा। मेरे परिवार और पिता को बहुत सम्मान मिला, पार्क की देखभाल नगर निगम प्रशासन को करानी चाहिए।

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