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विश्व धरोहर सप्ताह: ताजनगरी में तीन हजार अवैध निर्माणों से घिरे स्मारक, जाने का रास्ता भी नहीं छोड़ा
Fri, 20 Nov 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 20 Nov 2020 12:03 AM IST
सार
- ताजमहल के 500 मीटर दायरे में लगातार हो रहे निर्माणों पर भी कार्रवाई नहीं
- अवैध निर्माणों के कारण सलावत खां और सादिक खां मकबरे का रास्ता भी घिरा
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स्मारक चौबुर्जी के पास अतिक्रमण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्व धरोहर सप्ताह का आगाज गुरुवार से हो गया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पर्यटकों को धरोहरों को सहेजने का संकल्प दिला रहा है, लेकिन ताजनगरी के 200 से ज्यादा स्मारकों के चारों ओर अवैध निर्माण है। ताजमहल, चौबुर्जी, मरियम का मकबरा, सिकंदरा, एत्माद्दौला, फतेहपुर सीकरी, रामबाग, जोधबाई की छतरी, दिल्ली गेट, सलावत खां-सादिक खां मकबरे के प्रतिबंधित दायरे में तीन हजार से ज्यादा अवैध निर्माण हैं, जिन्हें तोड़ने के आदेश हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
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एएसआई ने कराई एफआईआर, थाने के सामने बनी दुकानें
अकबर का मकबरा सिकंदरा स्मारक के ठीक सामने एएसआई ने 15 दुकानों के कॉम्प्लेक्स को बनाने पर एफआईआर दर्ज कराई। पूर्व में पेट्रोल पंप की जमीन पर मुरारी प्रसाद अग्रवाल द्वारा बनाए गए कॉम्प्लेक्स पर एफआईआर दर्ज होने के बाद तोड़ने के भी आदेश हो गए, लेकिन सभी 15 दुकानें बनी हुई हैं। केवल यही नहीं, सिकंदरा स्मारक पार्किंग गेट के सामने टायर शोरूम, रेस्टोरेंट, 5 होटल, गेस्ट हाउस भी अवैध हैं और इन्हें तोड़ने के आदेश हैं।
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सलावत खां, सादिक खां मकबरे का रास्ता घेरा
नेशनल हाईवे पर सलावत खां, सादिक खां के दो मकबरे हैं, जिनमें प्रवेश के लिए रास्ता तक नहीं छोड़ा। दोनों स्मारकों के प्रतिबंधित दायरे में लगातार अवैध निर्माण जारी हैं। महज छह माह पहले एएसआई ने पतली सकरी गली से अतिक्रमण हटवाकर बाउंड्री और गेट लगवाया। दोनों स्मारकों में पहुंच मार्ग पर एक ओर यूपी पावर कॉरपोरेशन ने ट्रांसफार्मर रखवाए हैं, वहीं दूसरी ओर अतिक्रमण हैं। यही हाल जोधबाई की छतरी और दिल्ली गेट का है।
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'हम केवल एफआईआर दर्ज करा सकते हैं'
अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) एक्ट में हम केवल एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। काम रुकवाने का अधिकार पुलिस पर है। ध्वस्तीकरण आदेश मिलने के बाद कार्रवाई संबंधित नगर निकाय या प्राधिकरण को करनी है। एएसआई के पास तोड़ने, काम रुकवाने का अधिकार नहीं है।
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