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यूआईएन नहीं है तो जमा करा दें शस्त्र

Sun, 08 May 2016 02:18 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sun, 08 May 2016 02:18 AM IST
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बंदूक - फोटो : Logo
अगर आपके शस्त्र लाइसेंस का राष्ट्रीय डाटा बेस (एनडीएएल) के अंतर्गत यूआईएन जनरेट नहीं हुआ तो अपने असलहे और कारतूस तत्काल जमा करा दें। गृह मंत्रालय ने ऐसे सभी शस्त्र लाइसेंसों को अवैध घोषित कर दिया है। जारी गाइड लाइन के मुताबिक अब लाइसेंस पाने के लिए प्राधिकृत अधिकारी के यहां दोबारा आवेदन करना होगा। 
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गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने देश भर के शस्त्र लाइसेंसों का एकीकृत डाटा बेस तैयार करने के निर्देश के बाद सभी जिलों में एनआईसी के माध्यम से डाटा बेस तैयार किया गया था। इसमें जिन लाइसेंसों की एंट्री नहीं होगी वे अवैध माने जाएंगे। आन लाइन एंट्री के लिए कई बार तारीख बढ़ाई गईं और जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2016 थी। 01 अप्रैल 2016 से ऐसे शस्त्र लाइसेंसों की वैधता समाप्त हो गई। बावजूद इसके तमाम लाइसेंस धारक ऐसे हैं जिन्होंने एंट्री नहीं कराई है। प्रमुख सचिव गृह (उत्तर प्रदेश) देवाशीष पांडा ने ऐसी सभी लाइसेंसों को अवैध करार देते हुए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे हथियार और कारतूस तुरंत जमा कराएं। प्रदेश में करीब 1500-2000 ऐसे लाइसेंसधारक हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई होगी। आगरा जिले में करीब 25-50 ऐसे लाइसेंस होंगे। आयुध विभाग के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं वे ऐसे लाइसेंस धारकों से आयुध नियमावली 1952 के तहत नया आवेदन लेकर उनके लाइसेंस को एनडीएएल सिस्टम पर यूआईएन जनरेट करके उन्हें लाइसेंस निर्गत करें। 
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लाइसेंस से 4712 अधिक के यूआईएन जारी
आगरा। उत्तर प्रदेश में आनलाइन डाटा बेस तैयार में भी गड़बड़ी की गई है। कई लाइसेंस धारकों की एंट्री दो बार कर दी गई है। इससे एनडीएएल में फीड डाटा और जनरेट किए गए यूआईएन के आंकड़ों में अंतर आ रहा है। जारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 11,90,181 शस्त्र लाइसेंस हैं लेकिन यूआईएन 11,94,893 जारी हो गए हैं। आगरा में भी डबल एंट्री हुई थी। डाटा सुधार करने में कर्मचारियों को कई दिन मशक्कत करनी पड़ी थी। 
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प्रदेश के गृह विभाग की ओर से ऐसे निर्देश जारी किए गए हैं। साथ यह भी कहा गया है कि प्राधिकृत अधिकारी अपने स्तर से नया आवेदन पत्र लेकर यूआईएन जनरेटर कर लाइसेंस जारी कर दें। हालांकि आगरा में ऐसे लाइसेंसों की संख्या अधिक नहीं है। 

राजेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम सिटी/प्राधिकृत अधिकारी
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