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Agra News: स्ट्रीट लाइट घोटाले की फाइल खुली तो फंसेंगी कई गर्दन
Mon, 19 Feb 2024 12:21 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 19 Feb 2024 12:21 AM IST
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स्ट्रीट लाइट घोटाले की फाइल खुली तो फंसेंगी कई गर्दन
- मैनपुरी, बेवर, किशनी, जागीर और बरनाहल में हुआ है सबसे अधिक खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। जिले की सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले की फाइल खुली तो कई गर्दनें फंसेंगी। यही कारण है कि जान बूझकर जिम्मेदार इस घोटाले की फाइल को खोलना नहीं चाहते हैं। घोटालेबाज सचिव लगातार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के संपर्क में भी बने हुए हैं। वे किसी भी तरह इस कार्रवाई को दबाना चाहते हैं।
2022 में स्ट्रीट लाइटें लगाने के नाम पर ग्राम पंचायतों में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया था। सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में लोकल स्ट्रीट लाइटें लगाकर ऊंची कीमत का भुगतान किया गया। इन ग्राम पंचायतों में सौ प्रधान और 30 से अधिक पंचायत सचिव फंसेंगे। यही कारण है कि पूरा विभाग स्ट्रीट लाइट घोटाले को दबाने में जुटा हुआ है। इतना ही नहीं अगर जांच हुई तो बड़े घोटाले के चलते विभागीय अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।
इसी के चलते अधिकारी भी मामले को जन बूझकर ठंडा करने के प्रयास में हैं। वहीं दूसरी तरफ सभी पंचायत सचिव विभागीय अधिकारियों के संपर्क में भी हैं। सूत्रों के अनुसार उनके बीच लंबी बैठकें चल रही हैं। वे चाहते हैं कि किसी तरह ये मामला रफादफा हो जाए। इसके लिए वे एड़ीचोटी का जोर लगा रहे हैं।
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कूड़ेदान घोटाले से कम नहीं है स्ट्रीट लाइट घोटाला
जिले में 2019 में स्ट्रीट लाइट घोटाले की तरह ही कूड़ेदान घोटाला भी हुआ था। ग्राम पंचायतों में दोयम दर्जे के कूड़ेदान लगाकर दोगुने से भी अधिक भुगतान कर दिया गया था। इस मामले को भी पंचायत राज विभाग दबाने में जुटा हुआ था। बाद में अमर उजाला द्वारा फर्जीवाड़ा उजागर करने के बाद तत्कालीन डीपीआरओ के निलंबन के साथ ही विजिलेंस आगरा को जांच सौंपी गई थी। विजिलेंस वर्तमान में मामले की जांच कर रही है। स्ट्रीट लाइट घोटाला भी कूड़ेदान घोटाले से छोटा नहीं है।
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- मैनपुरी, बेवर, किशनी, जागीर और बरनाहल में हुआ है सबसे अधिक खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। जिले की सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले की फाइल खुली तो कई गर्दनें फंसेंगी। यही कारण है कि जान बूझकर जिम्मेदार इस घोटाले की फाइल को खोलना नहीं चाहते हैं। घोटालेबाज सचिव लगातार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के संपर्क में भी बने हुए हैं। वे किसी भी तरह इस कार्रवाई को दबाना चाहते हैं।
2022 में स्ट्रीट लाइटें लगाने के नाम पर ग्राम पंचायतों में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया था। सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में लोकल स्ट्रीट लाइटें लगाकर ऊंची कीमत का भुगतान किया गया। इन ग्राम पंचायतों में सौ प्रधान और 30 से अधिक पंचायत सचिव फंसेंगे। यही कारण है कि पूरा विभाग स्ट्रीट लाइट घोटाले को दबाने में जुटा हुआ है। इतना ही नहीं अगर जांच हुई तो बड़े घोटाले के चलते विभागीय अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।
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इसी के चलते अधिकारी भी मामले को जन बूझकर ठंडा करने के प्रयास में हैं। वहीं दूसरी तरफ सभी पंचायत सचिव विभागीय अधिकारियों के संपर्क में भी हैं। सूत्रों के अनुसार उनके बीच लंबी बैठकें चल रही हैं। वे चाहते हैं कि किसी तरह ये मामला रफादफा हो जाए। इसके लिए वे एड़ीचोटी का जोर लगा रहे हैं।
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कूड़ेदान घोटाले से कम नहीं है स्ट्रीट लाइट घोटाला
जिले में 2019 में स्ट्रीट लाइट घोटाले की तरह ही कूड़ेदान घोटाला भी हुआ था। ग्राम पंचायतों में दोयम दर्जे के कूड़ेदान लगाकर दोगुने से भी अधिक भुगतान कर दिया गया था। इस मामले को भी पंचायत राज विभाग दबाने में जुटा हुआ था। बाद में अमर उजाला द्वारा फर्जीवाड़ा उजागर करने के बाद तत्कालीन डीपीआरओ के निलंबन के साथ ही विजिलेंस आगरा को जांच सौंपी गई थी। विजिलेंस वर्तमान में मामले की जांच कर रही है। स्ट्रीट लाइट घोटाला भी कूड़ेदान घोटाले से छोटा नहीं है।