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99 हजार से ज्यादा जमा तो बैंककर्मियों की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:10 AM IST
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नोटबंदी के बाद निजी बैंकों के मैनेजरों ने जिस तरह से कालेधन को सफेद किया उससे बैंकर भी हैरान हैं। दिल्ली में एक्सिस बैंक के मैनेजरों की गिरफ्तारी के बाद सभी बैंकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जिन बैंक कर्मचारियों के एकाउंट में 99 हजार से ज्यादा रुपये नोटबंदी के बाद जमा कराए गए हैं उनकी जांच की जाए। सभी बैंक मैनेजरों को निर्देश दिए हैं कि उनके स्टाफ के बैंक एकाउंट का नोटबंदी के बाद का ब्योरा मांगा जाए।
निजी बैंकों समेत सभी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों को 13 बिंदुओं पर स्क्रूटनी के निर्देश दिए गए हैं। बैंकों ने अपने विजिलेंस अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वह ब्रांच के निरीक्षण के दौरान आठ नवंबर के बाद के आंकड़ों पर पैनी नजर रखें। जो खाते पैन कार्ड के बिना खोले गए हैं उनकी पड़ताल की जाएगी। यही नहीं जिन बैंक कर्मचारियों के एकाउंट में नोटबंदी के बाद 99 हजार रुपये से ज्यादा के पुराने नोट जमा हुए हैं उनका पूरा ब्योरा तैयार किया जाए। बैंक के सपोर्टिंग स्टाफ ने जिस कैश को जमा करने के लिए दबाव डाला हो या एक लाख रुपये से ज्यादा के आरटीजीएस में केवाईसी न ली गई हो, ऐसे एकाउंट जांचे जाएं। बैंक स्टाफ के एकाउंट से अगर एक लाख रुपये से ज्यादा की जमा-निकासी की गई है तो उनसे स्पष्टीकरण मांगने के साथ उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाएगी। नोटबंदी के बाद जिन एकाउंट में अनियमित ट्रांजेक्शन हो रहा हो बैंक मैनेजरों से ऐसी सूची मांगी जाए।
फोरेंसिक ऑडिट से फंसेंगे 50 से ज्यादा मैनेजर
दिल्ली में एक्सिस बैंक के दो मैनेजरों के पकड़े जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने देशभर में बैंकों पर छापे मारे हैं। आगरा में भी कई बैंक मैनेजरों के खेल की खुफिया सूचना आईबी ने प्रवर्तन निदेशालय को दी है। आगरा में निजी बैंकों समेत सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के 50 मैनेजरों पर कालेधन को सफेद करने का संदेह जताया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के साथ बैंकों के आला प्रबंधन को भी इसकी सूचना दी गई है। माना जा रहा है कि फोरेंसिक आडिट के जरिए बैंकों में नोटबंदी के दौर की जांच कराई जाएगी। आठ नवंबर के बाद की पूरी वीडियो फुटेज, बैंकों में जमा कैश, निकासी, 500/1000 के पुराने नोटों का ब्योरा और एक्सचेंज में प्रयोग की गई आईडी की जांच बैंक के विजिलेंस आफिसर करेंगे।
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जनधन की एक महीने की मांगी गई रिपोर्ट
रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से उनके यहां खुले जनधन योजना के एकाउंट में आठ नवंबर से पहले जमा की गई रकम और नोटबंदी के बाद जमा कैश का पूरा ब्योरा मांगा है। बैंकों को निर्देश दिए हैं कि नोटबंदी से पहले जनधन योजना के कितने एकाउंट थे और उसमें कितना कैश जमा था। बाद में ऐसे कितने एकाउंट रहे जिनमें 50 हजार रुपये से ज्यादा जमा कराए गए। सूत्रों के मुताबिक, हर बैंक शाखा में औसतन 15 जनधन खाते ऐसे हैं जिनमें आठ नवंबर से पहले जीरो बैलेंस था, जबकि उसके बाद एक से डेढ़ लाख रुपये तक बैलेंस बना हुआ है। इन एकाउंट से कितना कैश निकाला भी गया। इन सभी का ब्योरा रिजर्व बैंक को भेजा जा रहा है।
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निजी बैंकों समेत सभी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों को 13 बिंदुओं पर स्क्रूटनी के निर्देश दिए गए हैं। बैंकों ने अपने विजिलेंस अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वह ब्रांच के निरीक्षण के दौरान आठ नवंबर के बाद के आंकड़ों पर पैनी नजर रखें। जो खाते पैन कार्ड के बिना खोले गए हैं उनकी पड़ताल की जाएगी। यही नहीं जिन बैंक कर्मचारियों के एकाउंट में नोटबंदी के बाद 99 हजार रुपये से ज्यादा के पुराने नोट जमा हुए हैं उनका पूरा ब्योरा तैयार किया जाए। बैंक के सपोर्टिंग स्टाफ ने जिस कैश को जमा करने के लिए दबाव डाला हो या एक लाख रुपये से ज्यादा के आरटीजीएस में केवाईसी न ली गई हो, ऐसे एकाउंट जांचे जाएं। बैंक स्टाफ के एकाउंट से अगर एक लाख रुपये से ज्यादा की जमा-निकासी की गई है तो उनसे स्पष्टीकरण मांगने के साथ उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाएगी। नोटबंदी के बाद जिन एकाउंट में अनियमित ट्रांजेक्शन हो रहा हो बैंक मैनेजरों से ऐसी सूची मांगी जाए।
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फोरेंसिक ऑडिट से फंसेंगे 50 से ज्यादा मैनेजर
दिल्ली में एक्सिस बैंक के दो मैनेजरों के पकड़े जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने देशभर में बैंकों पर छापे मारे हैं। आगरा में भी कई बैंक मैनेजरों के खेल की खुफिया सूचना आईबी ने प्रवर्तन निदेशालय को दी है। आगरा में निजी बैंकों समेत सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के 50 मैनेजरों पर कालेधन को सफेद करने का संदेह जताया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के साथ बैंकों के आला प्रबंधन को भी इसकी सूचना दी गई है। माना जा रहा है कि फोरेंसिक आडिट के जरिए बैंकों में नोटबंदी के दौर की जांच कराई जाएगी। आठ नवंबर के बाद की पूरी वीडियो फुटेज, बैंकों में जमा कैश, निकासी, 500/1000 के पुराने नोटों का ब्योरा और एक्सचेंज में प्रयोग की गई आईडी की जांच बैंक के विजिलेंस आफिसर करेंगे।
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जनधन की एक महीने की मांगी गई रिपोर्ट
रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से उनके यहां खुले जनधन योजना के एकाउंट में आठ नवंबर से पहले जमा की गई रकम और नोटबंदी के बाद जमा कैश का पूरा ब्योरा मांगा है। बैंकों को निर्देश दिए हैं कि नोटबंदी से पहले जनधन योजना के कितने एकाउंट थे और उसमें कितना कैश जमा था। बाद में ऐसे कितने एकाउंट रहे जिनमें 50 हजार रुपये से ज्यादा जमा कराए गए। सूत्रों के मुताबिक, हर बैंक शाखा में औसतन 15 जनधन खाते ऐसे हैं जिनमें आठ नवंबर से पहले जीरो बैलेंस था, जबकि उसके बाद एक से डेढ़ लाख रुपये तक बैलेंस बना हुआ है। इन एकाउंट से कितना कैश निकाला भी गया। इन सभी का ब्योरा रिजर्व बैंक को भेजा जा रहा है।