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आगरा: वीवीआईपी फ्लाइंग के सबसे अच्छे पायलट थे पृथ्वी सिंह, भारतीय वायुसेना के अफसरों ने किया सलाम
Sun, 12 Dec 2021 12:37 PM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:37 PM IST
सार
एसके माथुर की जगह जनवरी 2021 में एसके वर्मा ने खेरिया एयरफोर्स में कमांडिंग अफसर का चार्ज संभाला है। 1987 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास आउट श्रीवर्मा ने 1988 में फ्लाइंग ब्रांच से वायु सेना में शामिल हुए।
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शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खेरिया एयरफोर्स स्टेशन के कमांडिंग अफसर एयर कोमोडोर सुरेंद्र कुमार वर्मा ने जनरल विपिन रावत के साथ हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद हुए उनके ‘सारथी’ विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को सबसे अच्छा पायलट बताया है। उन्होंने कहा हर फ्लाइंग कोर्स में पृथ्वी हमेशा अव्वल रहते थे। इसीलिए उन्हें वीवीआईपी फ्लाइंग के लिए चुना गया। वीवीआईपी फ्लाइंग के लिए उनकी योग्यता सर्वश्रेष्ठ थी। उनकी इस सेवा को मैं सलाम करता हूं।
नहीं हो सकी जवानों की भरपाई
ताजगंज मोक्षधाम पर शनिवार को पृथ्वी की अंतिम विदाई के बाद वह मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा उस हादसे में शहीद हुए जवानों की भरपाई नहीं हो सकती। उसमें हमारे बेहतरीन सोल्जर, एयरमेन, जनरल व विंग कमांडर थे। उनकी भरपाई संभव नहीं है। एओआईसी एसके वर्मा ने कहा पृथ्वी ने हमेशा अपने नाम को ऊंचा किया। मैं यही कामना करता हूं ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उन्होंने जो छाप छोड़ी है हम उसको और आगे लेकर जाएं। राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित एसके वर्मा ने कहा मैं मानता हूं कि एक शहीद होता है उसके पीछे 100 शहीद और पैदा होते है। यही जज्बा हमें महान बनता है। हमारा यही प्रयास होना चाहिए कि हम उन शहीदों के नाम को और ऊपर लेकर जाएं।
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नहीं हो सकी जवानों की भरपाई
ताजगंज मोक्षधाम पर शनिवार को पृथ्वी की अंतिम विदाई के बाद वह मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा उस हादसे में शहीद हुए जवानों की भरपाई नहीं हो सकती। उसमें हमारे बेहतरीन सोल्जर, एयरमेन, जनरल व विंग कमांडर थे। उनकी भरपाई संभव नहीं है। एओआईसी एसके वर्मा ने कहा पृथ्वी ने हमेशा अपने नाम को ऊंचा किया। मैं यही कामना करता हूं ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उन्होंने जो छाप छोड़ी है हम उसको और आगे लेकर जाएं। राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित एसके वर्मा ने कहा मैं मानता हूं कि एक शहीद होता है उसके पीछे 100 शहीद और पैदा होते है। यही जज्बा हमें महान बनता है। हमारा यही प्रयास होना चाहिए कि हम उन शहीदों के नाम को और ऊपर लेकर जाएं।
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आठ दिसंबर को वायुसेना का हेलिकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर क्षेत्र में क्रैश हो गया था। जिसमें जनरल बिपिन रावत, पत्नी सहित 14 जवानों के साथ वेलिंग्टन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे। रास्ते में ये हादसा हुआ। वेलिंग्टन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज से प्रशिक्षित एसके वर्मा ने कहा जनरल रावत ने जो रैंक व ओहदा पाया वह सबसे ऊंचा था। वह भारतीय सेनाओं के पहले चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ (सीडीएस) थे। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए काफी सुधार किए। तीनों सेनाओं को एक साथ सम्मलित करने की मंशा के पीछे उन्हीं का योगदान था। वह बहुत मजबूत नेता था। अब उनका जो काम है उसे हम आगे लेकर जाएंगे। जीवन चलता रहेगा। हम और मजबूत होकर उभरेंगे।
जांबाज पायलट हैं एसके वर्मा
एसके माथुर की जगह जनवरी 2021 में एसके वर्मा ने खेरिया एयरफोर्स में कमांडिंग अफसर का चार्ज संभाला है। 1987 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास आउट श्रीवर्मा ने 1988 में फ्लाइंग ब्रांच से वायु सेना में शामिल हुए। 142 से अधिक फ्लाइंग कोर्स कर चुके पायलट एसके वर्मा 1993 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट, फिर 2004 में विंग कमांडर और 2010 में ग्रुप कैप्टन बने। ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट के अनुभवी पायलट वर्मा दोल्ताबाग ऑल्डी में एयरक्रॉप्ट से अपना कमाल दिखा चुके हैं।
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एसके माथुर की जगह जनवरी 2021 में एसके वर्मा ने खेरिया एयरफोर्स में कमांडिंग अफसर का चार्ज संभाला है। 1987 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास आउट श्रीवर्मा ने 1988 में फ्लाइंग ब्रांच से वायु सेना में शामिल हुए। 142 से अधिक फ्लाइंग कोर्स कर चुके पायलट एसके वर्मा 1993 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट, फिर 2004 में विंग कमांडर और 2010 में ग्रुप कैप्टन बने। ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट के अनुभवी पायलट वर्मा दोल्ताबाग ऑल्डी में एयरक्रॉप्ट से अपना कमाल दिखा चुके हैं।
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