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इच्छाशक्ति एेसी तो स्मार्ट सिटी कैसी
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा।
Updated Sat, 29 Aug 2015 01:41 AM IST
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शहरियों के लिए हर्ष का विषय है कि उनका आगरा भविष्य में देश के 100 स्मार्ट शहरों में शामिल होगा। मगर, स्मार्ट सिटी की राह में दुश्वारियां भी अनेक हैं। बजट के साथ-साथ इच्छाशक्ति की भी जरूरत है। क्योंकि शहर के सुनियोजित और समग्र विकास के लिए वर्ष 2004 में लागू मास्टर प्लान पर 11 साल बाद भी अमल नहीं हो सका है। बहुत से क्षेत्रों में जनसमस्याओं का अभी भी रोना है।
शहर के लिए एडीए ने वर्ष 2004 में दूसरा मास्टर प्लान लागू किया था। इससे पहले वर्ष 1975 का मास्टर प्लान था। मगर, दोनों ही मास्टर प्लान उदासीनता की भेंट चढ़ गए। दूसरे मास्टर प्लान को अमल में लाने के लिए शहर को सात जोनों में बांटने का निर्णय लिया गया था। ताकि जोनल प्लान बनाकर विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा सके। उदासीनता का आलम यह रहा कि सात में से सिर्फ छह जोन ही निर्धारित हो पाए, सातवां जोन बनाने के लिए अभी मशक्कत चल रही है। इन छह जोनों में भी स्थानीय अधिकारियों का अमला अब तक सिर्फ दो जोन (जोन 2 व 6) के लिए ही प्लान बना पाया है। बाकी रामभरोसे हैं। बता दें कि विकास कार्यों की रूपरेखा भी जोनल प्लान के तहत ही तय होनी थी। ऐसे में मास्टर प्लान में शामिल बहुत से क्षेत्रों में सड़क तक नहीं हैं। सीवर लाइन और बिजली के खंबे तो दूर की बात हैं। मास्टर प्लान में शामिल बहुत सी सौ फुटा रोड तक गायब हैं। मास्टर प्लान के हिसाब से बहुत से बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट लांच कर दिए। मगर, उन क्षेत्रों का विकास ही नहीं हो पाए। ऐसे में बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट बीच में ही बंद करने पड़े।
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शहर के लिए एडीए ने वर्ष 2004 में दूसरा मास्टर प्लान लागू किया था। इससे पहले वर्ष 1975 का मास्टर प्लान था। मगर, दोनों ही मास्टर प्लान उदासीनता की भेंट चढ़ गए। दूसरे मास्टर प्लान को अमल में लाने के लिए शहर को सात जोनों में बांटने का निर्णय लिया गया था। ताकि जोनल प्लान बनाकर विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा सके। उदासीनता का आलम यह रहा कि सात में से सिर्फ छह जोन ही निर्धारित हो पाए, सातवां जोन बनाने के लिए अभी मशक्कत चल रही है। इन छह जोनों में भी स्थानीय अधिकारियों का अमला अब तक सिर्फ दो जोन (जोन 2 व 6) के लिए ही प्लान बना पाया है। बाकी रामभरोसे हैं। बता दें कि विकास कार्यों की रूपरेखा भी जोनल प्लान के तहत ही तय होनी थी। ऐसे में मास्टर प्लान में शामिल बहुत से क्षेत्रों में सड़क तक नहीं हैं। सीवर लाइन और बिजली के खंबे तो दूर की बात हैं। मास्टर प्लान में शामिल बहुत सी सौ फुटा रोड तक गायब हैं। मास्टर प्लान के हिसाब से बहुत से बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट लांच कर दिए। मगर, उन क्षेत्रों का विकास ही नहीं हो पाए। ऐसे में बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट बीच में ही बंद करने पड़े।
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