आगरा: बेटों की नौकरी के नाम पर दस लाख की धोखाधड़ी, पीड़ित होमगार्ड ने की खुदकुशी
थाना हरी पर्वत के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार का कहना है कि होमगार्ड ने खुदकुशी की है। उन्होंने विषाक्त पदार्थ खाया था। परिजनों ने उनके धोखाधड़ी होने से तनाव में आने की बात कही है। मामले में तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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थाना हरी पर्वत स्थित जज कंपाउंड परिसर की सुरक्षा में तैनात होमगार्ड विजय सिंह ने मंगलवार रात को खुदकुशी कर ली। परिजनों का आरोप है कि दो लोगों ने उनसे बेटों की सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर दस लाख रुपए हड़प लिए थे। मगर, नौकरी नहीं लग पाई। रुपयों का इंतजाम कर्ज लेकर किया था। रुपये वापस मांगने पर धमकी दी जा रही थी। मुकदमा दर्ज कराने पर भी आरोपी नहीं माने। इससे तनाव में आकर विजय सिंह ने आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस का कहना है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
गांव इकराम नगर निवासी विजय सिंह होमगार्ड की 24 नंबर कंपनी में तैनात थे। वर्तमान में सिकंदरा थाने में तैनाती थी। उनकी ड्यूटी जज कंपाउंड परिसर की सुरक्षा में थी। उनके भाई फूल सिंह भी होमगार्ड हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार रात को उनके पास थाना हरीपर्वत पुलिस का फोन आया। बताया कि विजय सिंह की हालत खराब है। उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया है। वह परिवार के साथ पहुंचे, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
भाई फूल सिंह ने बताया कि विजय सिंह के दो बेटे प्रवीन और भूपेंद्र चाहर हैं। दोनों पुलिस और सेना भर्ती की तैयारी में लगे हैं। एक वर्ष पहले नवल सिंह के माध्यम से बुलंदशहर के देवराऊ निवासी प्रताप सिंह राघव से विजय सिंह की मुलाकात हुई। आरोप है कि प्रताप सिंह ने विजय सिंह को झांसे में ले लिया। उनसे दोनों बेटों की नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया। दस लाख रुपये की मांग की। इस पर विजय सिंह ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर रकम का इंतजाम किया। मार्च 2021 में दस लाख रुपये दे दिए। मगर, नौकरी नहीं लगी। इस पर विजय सिंह ने प्रताप और नवल सिंह से रकम लौटाने की कहा। मगर, दोनों टालमटोल करते रहे। विजय सिंह ने काफी प्रयास किया, लेकिन उन्होंने रकम नहीं लौटाई। आठ अप्रैल को विजय ने प्रताप सिंह और नवल सिंह के खिलाफ थाना सदर में शिकायत की, लेकिन मुकदमा दर्ज में हुआ। जांच की जा रही थी।
भाई फूल सिंह और बेटों ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने पर आरोपियों ने धमकी देना शुरू कर दिया। 15 अप्रैल को घर आकर धमकी दी। इससे विजय दहशत में आ गए। रिश्तेदार भी उधारी में दी रकम का तगादा कर रहे थे। तनाव में आकर उन्होंने खुदकुशी कर ली।